Spread the love

प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। मुंदोली गांव की सुशीला देवी ने अपने हुनर और मेहनत के दम पर स्वरोजगार की राह चुनकर परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाया है। आज वह अपने सिलाई-बुनाई केंद्र के माध्यम से प्रतिमाह 10 हजार से 15 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। उनके पति हयात राम कृषि कार्य करते हैं और परिवार में दो बच्चे हैं। परिवार की आय मुख्य रूप से खेती और पशुपालन पर निर्भर होने के कारण घरेलू खर्चों और बच्चों की शिक्षा की जरूरतों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण था। ऐसे में सुशीला देवी ने अपने सिलाई के हुनर को आजीविका का साधन बनाने का निर्णय लिया। सुशीला देवी को पहले से ही सिलाई का शौक था। उन्होंने दूसरों की दुकान पर सिलाई का काम सीखकर अपने हुनर को निखारा। वर्ष 2020 में संतोषी स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें स्वरोजगार के नए अवसरों की जानकारी मिली। वर्तमान में वह समूह की अध्यक्ष हैं। समूह और ग्राम संगठन की बैठकों के माध्यम से उन्हें सरकारी योजनाओं और आजीविका से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त हुई। इसी क्रम में उन्हें अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष आईएफएडी द्वारा वित्तपोषित आरईएपी ग्रामोत्थान परियोजना के अंतर्गत व्यक्तिगत उद्यम स्थापित करने का अवसर मिला। वर्ष 2024-25 में उन्होंने अपना सिलाई-बुनाई केंद्र खोलने का प्रस्ताव क्लस्टर स्तरीय संघ के समक्ष रखा। प्रस्ताव का चयन होने के बाद उन्हें उद्यम की स्थापना बैंक ऋण और स्वयं के अंशदान से संबंधित आवश्यक मार्गदर्शन दिया गया। सुशीला देवी ने एक लाख रुपये की व्यवसाय योजना तैयार की। इसमें 30 हजार रुपये की परियोजना सहायता 50 हजार रुपये का बैंक ऋण और 20 हजार रुपये का स्वयं का अंशदान शामिल था। इस आर्थिक सहयोग से उन्होंने दो सिलाई मशीनों एक पीको मशीन और आवश्यक सामग्री के साथ अपना सिलाई-बुनाई केंद्र स्थापित किया। इसके बाद उन्होंने अपने हुनर को व्यवसाय का रूप देकर गांव में ही आजीविका का साधन तैयार किया। आज सुशीला देवी के सिलाई-बुनाई केंद्र पर मुंदोली सहित आसपास के गांवों के लोग भी कपड़े सिलवाने पहुंच रहे हैं। पहले स्थानीय लोगों को कपड़ों की सिलाई के लिए दूर जाना पड़ता था लेकिन अब गांव के निकट ही यह सुविधा उपलब्ध हो गई है। इससे लोगों का समय और मेहनत बच रही है। साथ ही ग्रामीणों को अपने क्षेत्र में ही सिलाई की सुविधा मिल रही है। अपने हुनर और मेहनत से सुशीला देवी प्रतिमाह 10 हजार से 15 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। उनकी इस कमाई से परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और बच्चों की शिक्षा सहित घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है। स्वयं सहायता समूह से जुड़कर शुरू हुआ उनका यह सफर अब उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही गांव के अन्य लोगों के लिए भी स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *