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प्रदीप कुमार
हरिद्वार/श्रीनगर गढ़वाल। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर हरिद्वार जनपद में सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने और नाबालिग छात्र-छात्राओं द्वारा दोपहिया वाहन चलाने पर प्रभावी रोक लगाने के लिए परिवहन विभाग ने गुरुवार को विद्यालयों और उनके आसपास के क्षेत्रों में विशेष प्रवर्तन अभियान चलाया। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी निखिल शर्मा ने बताया कि यह अभियान सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन नेहा झा के नेतृत्व में संचालित किया गया। अभियान में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन निखिल शर्मा और परिवहन कर अधिकारी वरुणा सैनी भी मौजूद रहीं। अभियान के दौरान विभिन्न विद्यालयों के आसपास की सड़कों और गलियों के साथ पार्किंग स्थलों पर खड़े दोपहिया वाहनों की जांच की गई। विशेष रूप से ऐसे वाहनों को चिह्नित किया गया जिनका उपयोग विद्यालयों में अध्ययनरत नाबालिग छात्र-छात्राओं द्वारा किए जाने की आशंका थी। जांच के दौरान विद्यालयों के आसपास खड़े संदिग्ध वाहनों के पंजीकृत स्वामियों को परिवहन विभाग की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। नोटिस के माध्यम से वाहन स्वामियों से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि संबंधित वाहन विद्यालय के समीप किस व्यक्ति द्वारा लाया गया था और वाहन चलाने वाले व्यक्ति की आयु क्या थी। साथ ही यह जानकारी भी मांगी गई है कि वाहन चालक के पास संबंधित श्रेणी का वैध ड्राइविंग लाइसेंस था या नहीं। यदि वाहन का उपयोग किसी नाबालिग द्वारा किया गया था तो वाहन उसे किस व्यक्ति ने और किन परिस्थितियों में उपलब्ध कराया था। वाहन स्वामियों को तीन दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण और आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। प्राप्त स्पष्टीकरण और जांच में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। अभियान के दौरान विद्यालय प्रबंधन को भी सख्त निर्देश दिए गए कि विद्यालय परिसर में नाबालिग छात्र-छात्राओं द्वारा लाए जाने वाले मोटरसाइकिल और स्कूटी सहित अन्य मोटर वाहनों के लिए पार्किंग की सुविधा उपलब्ध न कराई जाए। विद्यालय प्रशासन को ऐसे छात्र-छात्राओं की पहचान करने के निर्देश दिए गए जो बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के दोपहिया वाहनों से विद्यालय आते हैं। ऐसे विद्यार्थियों के अभिभावकों को तत्काल सूचित करने और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया। इसके अतिरिक्त विद्यालय प्रबंधन को छात्र-छात्राओं और अभिभावकों को सड़क सुरक्षा नियमों तथा वाहन चलाने की न्यूनतम वैधानिक आयु के साथ बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस वाहन चलाने के कानूनी परिणामों के बारे में जागरूक करने के निर्देश दिए गए। परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया कि मोटर वाहन अधिनियम 1988 के अंतर्गत निर्धारित आयु और लाइसेंस संबंधी शर्तों का उल्लंघन कर वाहन चलाना दंडनीय है। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199ए के अंतर्गत किशोर द्वारा मोटर वाहन संबंधी अपराध किए जाने की स्थिति में अधिनियम में निर्धारित शर्तों के अधीन वाहन स्वामी या अभिभावक के विरुद्ध भी दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। इसके अंतर्गत तीन वर्ष तक के कारावास और 25 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान बताया गया है। परिवहन विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने नाबालिग बच्चों को मोटरसाइकिल या स्कूटी चलाने के लिए उपलब्ध न कराएं। ऐसा करना कानून का उल्लंघन होने के साथ बच्चों और सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन नेहा झा ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुपालन में नाबालिगों द्वारा वाहन संचालन रोकने के लिए विद्यालयों के आसपास नियमित रूप से प्रवर्तन अभियान चलाए जाएंगे। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन निखिल शर्मा ने बताया कि अभियान का उद्देश्य केवल दंडात्मक कार्रवाई करना नहीं है बल्कि विद्यालय प्रबंधन और अभिभावकों के साथ छात्र-छात्राओं में सड़क सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है। उन्होंने कहा कि वाहन स्वामियों से प्राप्त स्पष्टीकरण और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। परिवहन विभाग ने सभी विद्यालय प्रबंधन और अभिभावकों से नाबालिगों द्वारा अवैध वाहन संचालन रोकने में सक्रिय सहयोग करने की अपील की है ताकि संभावित सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सके और छात्र-छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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