प्रदीप कुमार
देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड के दूरस्थ गांवों में रहकर प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना देखने वाले दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए आधुनिक तकनीक और निःशुल्क कोचिंग की सुविधा नई उम्मीद बन रही है। राजधानी देहरादून में संचालित सिविल सेवा कोचिंग केंद्र के माध्यम से प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले दिव्यांग अभ्यर्थी भी आईएएस और पीसीएस बनने की तैयारी कर रहे हैं। गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक के विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यम से एक मंच पर जोड़ने वाली यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में समावेशिता और समान अवसरों की मिसाल पेश कर रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के अनुरूप समाज कल्याण विभाग और राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान के संयुक्त प्रयासों से यह निःशुल्क कोचिंग व्यवस्था संचालित की जा रही है। इसके अंतर्गत प्रत्येक जिले से चयनित दिव्यांग विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। राजपुर रोड स्थित राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान में स्थापित कोचिंग केंद्र में विषय विशेषज्ञ विद्यार्थियों को सिविल सेवा परीक्षाओं के विभिन्न विषयों की तैयारी करा रहे हैं। इस पहल की सबसे खास बात यह है कि विद्यार्थियों को कोचिंग का लाभ लेने के लिए हर बार राजधानी देहरादून पहुंचने की आवश्यकता नहीं है। प्रतिदिन शाम चार से सात बजे तक संचालित ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले अभ्यर्थी भी शिक्षकों से जुड़कर पढ़ाई कर रहे हैं। गूगल मीट और साइन लैंग्वेज जैसी सुविधाओं के माध्यम से शिक्षण को अधिक सुलभ बनाने का प्रयास किया गया है ताकि अलग-अलग आवश्यकताओं वाले विद्यार्थी अपनी सुविधा के अनुसार अध्ययन कर सकें। कोचिंग में सामान्य अध्ययन यानी जीएस और सीसैट के साथ तार्किक क्षमता गणित तथा अन्य अर्हकारी विषयों की तैयारी कराई जा रही है। विषयवार कक्षाओं के माध्यम से विद्यार्थियों की शैक्षणिक क्षमता विकसित करने और अवधारणाओं को स्पष्ट करने के साथ उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुरूप तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। समाज कल्याण विभाग के सचिव डॉ.श्रीधर बाबू अद्दांकी ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप समाज कल्याण विभाग और राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान के सहयोग से दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क सिविल सेवा कोचिंग की पहल शुरू की गई है। इसका उद्देश्य दिव्यांग अभ्यर्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में केंद्र में आईएएस और पीसीएस परीक्षाओं की तैयारी कराई जा रही है। विद्यार्थियों को रोजगार और करियर के अधिक अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जल्द ही बैंकिंग तथा कर्मचारी चयन आयोग यानी एसएससी की परीक्षाओं के लिए भी निःशुल्क कोचिंग शुरू की जाएगी। दिव्यांग विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन देहरादून और समाज कल्याण विभाग ने मुख्यमंत्री की घोषणा के अंतर्गत 19 लाख रुपये की लागत से हाईटेक साउंडप्रूफ कोचिंग रूम तैयार कराया है। यह केंद्र आधुनिक तकनीकी उपकरणों से सुसज्जित है। यहां डिजिटल माध्यम से कक्षाओं के संचालन और दूरस्थ विद्यार्थियों तक शिक्षण सामग्री पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। कोचिंग रूम में वीडियो मिक्सर और कॉर्डलेस माइक्रोफोन के साथ 75 इंच की टीवी स्क्रीन तथा तीन कंप्यूटर कंसोल उपलब्ध हैं। इसके अलावा थिएटर लाइट और हाईटेक कैमरों सहित विभिन्न आधुनिक सुविधाएं भी स्थापित की गई हैं। इन उपकरणों की सहायता से शिक्षकों के व्याख्यान और कक्षाओं का संचालन डिजिटल माध्यम से किया जा रहा है जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थी भी शिक्षण प्रक्रिया से जुड़ पा रहे हैं। देहरादून जिले से चयनित दिव्यांग अभ्यर्थी मोहन दास ने बताया कि मुख्यमंत्री की इस पहल ने दिव्यांग विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनने और अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों को एक मंच पर जोड़ना इस व्यवस्था की महत्वपूर्ण विशेषता है। इससे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक मार्गदर्शन प्राप्त करने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में मदद मिल रही है। निःशुल्क सिविल सेवा कोचिंग की यह व्यवस्था केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी तक सीमित नहीं है बल्कि दिव्यांग विद्यार्थियों को आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के साथ सम्मानजनक भविष्य की ओर आगे बढ़ाने का माध्यम भी बन रही है। आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ शिक्षकों के मार्गदर्शन के साथ सुलभ शिक्षण व्यवस्था के जरिए उन विद्यार्थियों तक अवसर पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है जिनके लिए संसाधनों की कमी और भौगोलिक दूरी के कारण बड़े शहरों में जाकर तैयारी करना कठिन होता है। यह पहल इस सोच को मजबूत करती है कि प्रतिभा किसी शारीरिक अक्षमता या भौगोलिक दूरी की मोहताज नहीं होती। उचित मार्गदर्शन और सुलभ संसाधनों के साथ समान अवसर मिलने पर दूरस्थ गांवों में रहने वाले दिव्यांग विद्यार्थी भी सिविल सेवा सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
