केवड़िया में कुलपतियों का महाकुंभ उच्च शिक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की पहल
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। 10 जुलाई 2025 को गुजरात के केवड़िया में आयोजित कुलपतियों के सम्मेलन में देश भर के केंद्रीय विश्वविद्यालयों के 50 से अधिक कुलपति एक मंच पर एकत्र हुए। इस महत्त्वपूर्ण सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने किया।सम्मेलन में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने भी सक्रिय सहभागिता की। उन्होंने विकसित भारत 2047 की दिशा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के प्रभावी कार्यान्वयन को लेकर अपने विचार साझा किए।केंद्रीय मंत्री प्रधान ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 अब केवल एक नीति नहीं,बल्कि पंच संकल्प के रूप में एक प्रेरक शक्ति बन चुकी है जिसमें अगली पीढ़ी की शिक्षा,बहु-विषयकता,नवाचार,समग्रता और भारतीयता प्रमुख आधार हैं।उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा को दिशा देने के लिए अब 50 प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात (GER),छात्र-प्रथम दृष्टिकोण,बहु-विषयक पाठ्यक्रम,डिजिटल लर्निंग,भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS), और समानता पर केंद्रित सुधारों की आवश्यकता है।सम्मेलन के पहले दिन की चर्चाएं रणनीतिक योजना,कार्यबल विकास,डिजिटल रूपांतरण,समावेशिता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसे विषयों को केंद्र में रखकर की गईं। विचार-विमर्श के दौरान यह भी तय किया गया कि प्रत्येक विश्वविद्यालय नई शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अपना रणनीति पत्र तैयार करेगा।यह सम्मेलन भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली को सशक्त,समावेशी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।
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केवड़िया में कुलपतियों का महाकुंभ उच्च शिक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की पहल
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। 10 जुलाई 2025 को गुजरात के केवड़िया में आयोजित कुलपतियों के सम्मेलन में देश भर के केंद्रीय विश्वविद्यालयों के 50 से अधिक कुलपति एक मंच पर एकत्र हुए। इस महत्त्वपूर्ण सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने किया।सम्मेलन में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने भी सक्रिय सहभागिता की। उन्होंने विकसित भारत 2047 की दिशा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के प्रभावी कार्यान्वयन को लेकर अपने विचार साझा किए।केंद्रीय मंत्री प्रधान ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 अब केवल एक नीति नहीं,बल्कि पंच संकल्प के रूप में एक प्रेरक शक्ति बन चुकी है जिसमें अगली पीढ़ी की शिक्षा,बहु-विषयकता,नवाचार,समग्रता और भारतीयता प्रमुख आधार हैं।उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा को दिशा देने के लिए अब 50 प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात (GER),छात्र-प्रथम दृष्टिकोण,बहु-विषयक पाठ्यक्रम,डिजिटल लर्निंग,भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS), और समानता पर केंद्रित सुधारों की आवश्यकता है।सम्मेलन के पहले दिन की चर्चाएं रणनीतिक योजना,कार्यबल विकास,डिजिटल रूपांतरण,समावेशिता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसे विषयों को केंद्र में रखकर की गईं। विचार-विमर्श के दौरान यह भी तय किया गया कि प्रत्येक विश्वविद्यालय नई शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अपना रणनीति पत्र तैयार करेगा।यह सम्मेलन भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली को सशक्त,समावेशी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।