गुरु पूर्णिमा पर भटोली के गढखालेश्वर महादेव मंदिर में स्वच्छता अभियान व देववृक्षों का रोपण भंडारे के अभाव में श्रद्धालुओं में नाराजगी
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर भटोली स्थित प्राचीन जय शिव गोरखनाथ गढखालेश्वर महादेव मंदिर परिसर में इस वर्ष भी परंपरा अनुसार वृक्षारोपण एवं स्वच्छता कार्यक्रम का आयोजन श्रद्धा व भक्ति भाव के साथ किया गया।आयोजन के अंतर्गत पैय्या,रुद्राक्ष और बेलपत्र जैसे देववृक्षों का रोपण किया गया,जिनका धार्मिक और औषधीय महत्व दोनों है।मंदिर के महंत एवं उपासक नरेश कुमार भारती ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे श्रावण मास के दौरान गुरु पूर्णिमा से लेकर कृष्ण जन्माष्टमी तक अधिक से अधिक पौधारोपण कर प्रकृति और धर्म दोनों की सेवा करें। उन्होंने कहा कि वृक्ष हमारे गुरु समान होते हैं,जो नि:स्वार्थ रूप से जीवनदायी वायु,छाया और फल प्रदान करते हैं।इस अवसर पर मंदिर परिसर की सफाई हेतु घास और झाड़ियां हटाकर स्वच्छता अभियान भी चलाया गया,जिससे संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक और शुद्ध बना रहे। स्थानीय युवाओं और श्रद्धालुओं ने स्वेच्छा से भाग लेकर आयोजन को सफल बनाया।हर वर्ष की भांति इस बार भी गुरु पूर्णिमा पर भव्य भंडारे की परंपरा को निभाने की तैयारी थी,किंतु चुनावी आचार संहिता के कारण सार्वजनिक भोज की अनुमति नहीं मिल सकी। इस कारण कई श्रद्धालु निराश दिखाई दिए और उन्होंने भविष्य में धार्मिक आयोजनों को चुनावी प्रभाव से मुक्त रखने की मांग भी की।गढखालेश्वर मंदिर क्षेत्र में हर वर्ष यह आयोजन श्रद्धालुओं की आस्था,पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक एकता का प्रतीक बन चुका है।
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गुरु पूर्णिमा पर भटोली के गढखालेश्वर महादेव मंदिर में स्वच्छता अभियान व देववृक्षों का रोपण भंडारे के अभाव में श्रद्धालुओं में नाराजगी
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर भटोली स्थित प्राचीन जय शिव गोरखनाथ गढखालेश्वर महादेव मंदिर परिसर में इस वर्ष भी परंपरा अनुसार वृक्षारोपण एवं स्वच्छता कार्यक्रम का आयोजन श्रद्धा व भक्ति भाव के साथ किया गया।आयोजन के अंतर्गत पैय्या,रुद्राक्ष और बेलपत्र जैसे देववृक्षों का रोपण किया गया,जिनका धार्मिक और औषधीय महत्व दोनों है।मंदिर के महंत एवं उपासक नरेश कुमार भारती ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे श्रावण मास के दौरान गुरु पूर्णिमा से लेकर कृष्ण जन्माष्टमी तक अधिक से अधिक पौधारोपण कर प्रकृति और धर्म दोनों की सेवा करें। उन्होंने कहा कि वृक्ष हमारे गुरु समान होते हैं,जो नि:स्वार्थ रूप से जीवनदायी वायु,छाया और फल प्रदान करते हैं।इस अवसर पर मंदिर परिसर की सफाई हेतु घास और झाड़ियां हटाकर स्वच्छता अभियान भी चलाया गया,जिससे संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक और शुद्ध बना रहे। स्थानीय युवाओं और श्रद्धालुओं ने स्वेच्छा से भाग लेकर आयोजन को सफल बनाया।हर वर्ष की भांति इस बार भी गुरु पूर्णिमा पर भव्य भंडारे की परंपरा को निभाने की तैयारी थी,किंतु चुनावी आचार संहिता के कारण सार्वजनिक भोज की अनुमति नहीं मिल सकी। इस कारण कई श्रद्धालु निराश दिखाई दिए और उन्होंने भविष्य में धार्मिक आयोजनों को चुनावी प्रभाव से मुक्त रखने की मांग भी की।गढखालेश्वर मंदिर क्षेत्र में हर वर्ष यह आयोजन श्रद्धालुओं की आस्था,पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक एकता का प्रतीक बन चुका है।