ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना से आत्मनिर्भर बनीं पुष्पा: संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायक कहानी
प्रदीप कुमार
हरिद्वार/श्रीनगर गढ़वाल।मुख्य विकास अधिकारी हरिद्वार,आकांक्षा कोण्डे के नेतृत्व में जनपद हरिद्वार में ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के अंतर्गत अल्ट्रा पूवर सपोर्ट,फार्म एवं नॉन-फार्म एंटरप्राइजेज और सीबीओ स्तर के उद्यमों की स्थापना के सतत प्रयास किए जा रहे हैं। इन्हीं प्रयासों की एक प्रेरणादायक मिसाल हैं-ग्राम ठसका, विकासखंड नारसन की पुष्पा।एकता स्वयं सहायता समूह की सदस्य श्रीमती पुष्पा,जो सपना सीएलएफ से जुड़ी हुई हैं,कभी जीवन में कठिनाइयों और आर्थिक तंगी से जूझ रही थीं।लेकिन एनआरएलएम से जुड़ाव ने उन्हें आत्मनिर्भरता की राह दिखाई। ग्रामोत्थान परियोजना से जुड़े स्टाफ के निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग से उन्होंने डेयरी व्यवसाय की शुरुआत का संकल्प लिया।वित्तीय वर्ष 2024-25 में परियोजना अंतर्गत तैयार किए गए व्यवसाय योजना के आधार पर उन्हें बैंक से ₹1,50,000 का ऋण स्वीकृत हुआ,जिसमें ₹75,000 स्वयं का निवेश और ₹75,000 ग्रामोत्थान परियोजना का अंशदान रहा। इस सहायता से उन्होंने दो भैंसें खरीदीं और नियमित रूप से दूध उत्पादन प्रारंभ किया।आज पुष्पा प्रतिदिन लगभग 14 लीटर दूध निकालती हैं,जिसमें से 12 लीटर की बिक्री कर वे हर महीने ₹13,000 से ₹14,000 की शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं। इस आमदनी से वे न केवल अपने परिवार की जरूरतें पूरी कर रही हैं,बल्कि आर्थिक रूप से सशक्त होकर समाज में आत्मसम्मान के साथ जीवन यापन कर रही हैं।पुष्पा ने अपनी सफलता का श्रेय ग्रामोत्थान परियोजना और जिला प्रशासन को देते हुए कहा कि यदि सही मार्गदर्शन,योजनाबद्ध सहायता और आत्मविश्वास हो,तो ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की चमकती मिसाल बन सकती हैं।
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ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना से आत्मनिर्भर बनीं पुष्पा: संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायक कहानी
प्रदीप कुमार
हरिद्वार/श्रीनगर गढ़वाल।मुख्य विकास अधिकारी हरिद्वार,आकांक्षा कोण्डे के नेतृत्व में जनपद हरिद्वार में ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के अंतर्गत अल्ट्रा पूवर सपोर्ट,फार्म एवं नॉन-फार्म एंटरप्राइजेज और सीबीओ स्तर के उद्यमों की स्थापना के सतत प्रयास किए जा रहे हैं। इन्हीं प्रयासों की एक प्रेरणादायक मिसाल हैं-ग्राम ठसका, विकासखंड नारसन की पुष्पा।एकता स्वयं सहायता समूह की सदस्य श्रीमती पुष्पा,जो सपना सीएलएफ से जुड़ी हुई हैं,कभी जीवन में कठिनाइयों और आर्थिक तंगी से जूझ रही थीं।लेकिन एनआरएलएम से जुड़ाव ने उन्हें आत्मनिर्भरता की राह दिखाई। ग्रामोत्थान परियोजना से जुड़े स्टाफ के निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग से उन्होंने डेयरी व्यवसाय की शुरुआत का संकल्प लिया।वित्तीय वर्ष 2024-25 में परियोजना अंतर्गत तैयार किए गए व्यवसाय योजना के आधार पर उन्हें बैंक से ₹1,50,000 का ऋण स्वीकृत हुआ,जिसमें ₹75,000 स्वयं का निवेश और ₹75,000 ग्रामोत्थान परियोजना का अंशदान रहा। इस सहायता से उन्होंने दो भैंसें खरीदीं और नियमित रूप से दूध उत्पादन प्रारंभ किया।आज पुष्पा प्रतिदिन लगभग 14 लीटर दूध निकालती हैं,जिसमें से 12 लीटर की बिक्री कर वे हर महीने ₹13,000 से ₹14,000 की शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं। इस आमदनी से वे न केवल अपने परिवार की जरूरतें पूरी कर रही हैं,बल्कि आर्थिक रूप से सशक्त होकर समाज में आत्मसम्मान के साथ जीवन यापन कर रही हैं।पुष्पा ने अपनी सफलता का श्रेय ग्रामोत्थान परियोजना और जिला प्रशासन को देते हुए कहा कि यदि सही मार्गदर्शन,योजनाबद्ध सहायता और आत्मविश्वास हो,तो ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भरता की चमकती मिसाल बन सकती हैं।