गढ़वाल विश्वविद्यालय में उद्योग-अकादमिक सहयोग पर जोर बौद्धिक संपदा सृजन पर विचार
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल,15 सितम्बर को बौद्धिक संपदा सृजन के लिए उद्योग-अकादमिक सहभागिता आवश्यक-प्रो.राणा प्रताप सिंह बौद्धिक संपदा(Intellectual Property)के सृजन हेतु उद्योग और अकादमिक जगत के बीच मजबूत सहभागिता आवश्यक है। यह विचार गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय,ग्रेटर नोएडा के कुलपति प्रो.राणा प्रताप सिंह ने व्यक्त किए। वे आज दिनांक 15 सितम्बर,2025 को श्रीनगर गढ़वाल,उत्तराखंड स्थित हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र (MMTTC) द्वारा आयोजित बौद्धिक संपदा अधिकार:नवाचार और उद्यमशीलता के प्रेरक विषयक एक सप्ताहीय संकाय विकास कार्यक्रम (FDP) के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। प्रो.सिंह ने नए तकनीकी नवाचारों और सामग्रियों के विकास में उद्योग-अकादमिक सहयोग को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इनके संरक्षण के लिए बौद्धिक संपदा अधिकारों का होना अनिवार्य है। उन्होंने वास्तविक उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि किस प्रकार मजबूत IPR ढांचा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करता है।वैज्ञानिक-एफ,डॉ.विशाल चौधरी,कार्यालय–प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार,भारत सरकार,नई दिल्ली,ने अतिथि सम्मानित वक्ता के रूप में उद्बोधन दिया। उन्होंने सरकार की विभिन्न पहल,जैसे i-STEM कार्यक्रम,के माध्यम से IPR और उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करने के प्रयासों पर प्रकाश डाला।सत्र की अध्यक्षता करते हुए,प्रो.श्री प्रकाश सिंह,कुलपति,एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय,ने विश्वविद्यालयों में IPR सेल्स की आवश्यकता और उनकी बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रसार में भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि पेटेंट दाखिल करने की प्रक्रिया को सरल और कम लागत वाला बनाया जाना चाहिए,ताकि अधिक से अधिक शोधकर्ता और नवप्रवर्तक इससे लाभान्वित हो सकें। डॉ.राहुल के.सिंह,निदेशक,MMTTC,ने अपने विचार रखते हुए कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार,नवप्रवर्तकों की सृजनशीलता और मौलिकता के सम्मान एवं संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह एफडीपी प्रतिभागियों के लिए IPR और उसके नवाचार व उद्यमशीलता में योगदान को समझने का एक उत्कृष्ट मंच साबित हुआ है।डॉ.सोमेश थपलियाल,सहायक निदेशक,ने अतिथियों का स्वागत किया और सत्र का संचालन किया।तकनीकी रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए,डॉ.सौरभ यादव,पाठ्यक्रम समन्वयक,ने बताया कि इस कार्यक्रम में देशभर से कुल 30 संकाय सदस्यों ने भाग लिया,जिन्हें सात राज्यों के प्रतिष्ठित संस्थानों से आए 22 विशेषज्ञ संसाधन व्यक्तियों ने प्रशिक्षण प्रदान किया। डॉ.सौरभ यादव ने अंत में धन्यवाद ज्ञापन भी प्रस्तुत किया।
Spread the love
गढ़वाल विश्वविद्यालय में उद्योग-अकादमिक सहयोग पर जोर बौद्धिक संपदा सृजन पर विचार
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल,15 सितम्बर को बौद्धिक संपदा सृजन के लिए उद्योग-अकादमिक सहभागिता आवश्यक-प्रो.राणा प्रताप सिंह बौद्धिक संपदा(Intellectual Property)के सृजन हेतु उद्योग और अकादमिक जगत के बीच मजबूत सहभागिता आवश्यक है। यह विचार गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय,ग्रेटर नोएडा के कुलपति प्रो.राणा प्रताप सिंह ने व्यक्त किए। वे आज दिनांक 15 सितम्बर,2025 को श्रीनगर गढ़वाल,उत्तराखंड स्थित हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र (MMTTC) द्वारा आयोजित बौद्धिक संपदा अधिकार:नवाचार और उद्यमशीलता के प्रेरक विषयक एक सप्ताहीय संकाय विकास कार्यक्रम (FDP) के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। प्रो.सिंह ने नए तकनीकी नवाचारों और सामग्रियों के विकास में उद्योग-अकादमिक सहयोग को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इनके संरक्षण के लिए बौद्धिक संपदा अधिकारों का होना अनिवार्य है। उन्होंने वास्तविक उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि किस प्रकार मजबूत IPR ढांचा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करता है।वैज्ञानिक-एफ,डॉ.विशाल चौधरी,कार्यालय–प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार,भारत सरकार,नई दिल्ली,ने अतिथि सम्मानित वक्ता के रूप में उद्बोधन दिया। उन्होंने सरकार की विभिन्न पहल,जैसे i-STEM कार्यक्रम,के माध्यम से IPR और उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करने के प्रयासों पर प्रकाश डाला।सत्र की अध्यक्षता करते हुए,प्रो.श्री प्रकाश सिंह,कुलपति,एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय,ने विश्वविद्यालयों में IPR सेल्स की आवश्यकता और उनकी बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रसार में भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि पेटेंट दाखिल करने की प्रक्रिया को सरल और कम लागत वाला बनाया जाना चाहिए,ताकि अधिक से अधिक शोधकर्ता और नवप्रवर्तक इससे लाभान्वित हो सकें। डॉ.राहुल के.सिंह,निदेशक,MMTTC,ने अपने विचार रखते हुए कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार,नवप्रवर्तकों की सृजनशीलता और मौलिकता के सम्मान एवं संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह एफडीपी प्रतिभागियों के लिए IPR और उसके नवाचार व उद्यमशीलता में योगदान को समझने का एक उत्कृष्ट मंच साबित हुआ है।डॉ.सोमेश थपलियाल,सहायक निदेशक,ने अतिथियों का स्वागत किया और सत्र का संचालन किया।तकनीकी रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए,डॉ.सौरभ यादव,पाठ्यक्रम समन्वयक,ने बताया कि इस कार्यक्रम में देशभर से कुल 30 संकाय सदस्यों ने भाग लिया,जिन्हें सात राज्यों के प्रतिष्ठित संस्थानों से आए 22 विशेषज्ञ संसाधन व्यक्तियों ने प्रशिक्षण प्रदान किया। डॉ.सौरभ यादव ने अंत में धन्यवाद ज्ञापन भी प्रस्तुत किया।