गढ़वाल विश्वविद्यालय का कुलगीत निर्माण अंतिम चरण में समिति की बैठक में प्रारूप को मिला अंतिम स्वरूप
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल।हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलगीत समिति के संयोजक प्रो.मोहन सिंह पंवार की अध्यक्षता में बैठक संपन्न हुई साथ ही कुलगीत निर्माण की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरणों में पहुँच गई है। आज दिनांक 7 नवंबर 2025 को समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई,जिसमें कुलगीत के प्रारूप पर विस्तृत चर्चा की गई तथा अधिकांश कार्य को अंतिम रूप प्रदान किया गया।बैठक के पश्चात संयोजक प्रो.मोहन सिंह पवार ने बताया कि समिति के सभी सदस्यों द्वारा विचार-विमर्श के उपरांत कुलगीत के शब्द तथा भाव-धारा को लगभग निर्धारित कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि कुलगीत का प्रारूप विश्वविद्यालय की गौरवमयी परंपरा,शैक्षणिक मूल्यों एवं हिमालयी सांस्कृतिक विरासत को ससम्मान अभिव्यक्त करता है। बहुत शीघ्र ही इसकी ऑडियो रिकॉर्डिंग प्रक्रिया औपचारिक रूप से प्रारंभ कर दी जाएगी।सहसंयोजिका प्रो.गुड्डी बिष्ट ने जानकारी देते हुए कहा कि कुलगीत को पूरी तरह लिपिबद्ध कर लिया गया है तथा लेखन संबंधी सभी चरण पूर्ण हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि गीत का साहित्यिक रूप संयमित,प्रेरणादायी और विश्वविद्यालय की पहचान के अनुरूप तैयार किया गया है।समिति के संगीत विशेषज्ञ डॉ.संजय पांडे ने कुलगीत को भावानुरूप धुनबद्ध कर दिया है।बैठक में समिति के अन्य सम्मानित सदस्य प्रो.मृदुला जुगराण,कवि नीरज नैथानी,महेश डोभाल सहित सभी आमंत्रित सदस्य उपस्थित रहे।सभी सदस्यों ने कुलगीत के अंतिम प्रारूप पर अपने सुझाव दिए और इसे और अधिक उत्कृष्ट बनाने के लिए सामूहिक रूप से कार्य किया।
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गढ़वाल विश्वविद्यालय का कुलगीत निर्माण अंतिम चरण में समिति की बैठक में प्रारूप को मिला अंतिम स्वरूप
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल।हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलगीत समिति के संयोजक प्रो.मोहन सिंह पंवार की अध्यक्षता में बैठक संपन्न हुई साथ ही कुलगीत निर्माण की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरणों में पहुँच गई है। आज दिनांक 7 नवंबर 2025 को समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई,जिसमें कुलगीत के प्रारूप पर विस्तृत चर्चा की गई तथा अधिकांश कार्य को अंतिम रूप प्रदान किया गया।बैठक के पश्चात संयोजक प्रो.मोहन सिंह पवार ने बताया कि समिति के सभी सदस्यों द्वारा विचार-विमर्श के उपरांत कुलगीत के शब्द तथा भाव-धारा को लगभग निर्धारित कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि कुलगीत का प्रारूप विश्वविद्यालय की गौरवमयी परंपरा,शैक्षणिक मूल्यों एवं हिमालयी सांस्कृतिक विरासत को ससम्मान अभिव्यक्त करता है। बहुत शीघ्र ही इसकी ऑडियो रिकॉर्डिंग प्रक्रिया औपचारिक रूप से प्रारंभ कर दी जाएगी।सहसंयोजिका प्रो.गुड्डी बिष्ट ने जानकारी देते हुए कहा कि कुलगीत को पूरी तरह लिपिबद्ध कर लिया गया है तथा लेखन संबंधी सभी चरण पूर्ण हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि गीत का साहित्यिक रूप संयमित,प्रेरणादायी और विश्वविद्यालय की पहचान के अनुरूप तैयार किया गया है।समिति के संगीत विशेषज्ञ डॉ.संजय पांडे ने कुलगीत को भावानुरूप धुनबद्ध कर दिया है।बैठक में समिति के अन्य सम्मानित सदस्य प्रो.मृदुला जुगराण,कवि नीरज नैथानी,महेश डोभाल सहित सभी आमंत्रित सदस्य उपस्थित रहे।सभी सदस्यों ने कुलगीत के अंतिम प्रारूप पर अपने सुझाव दिए और इसे और अधिक उत्कृष्ट बनाने के लिए सामूहिक रूप से कार्य किया।