मेरी संस्कृति मेरी पहचान अभियान की शुरुआत श्रीनगर गढ़वाल से ब्रह्माकुमारीज ने दी धार्मिक व सांस्कृतिक पर्यटन को नई दिशा
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। ब्रह्माकुमारीज के शिपिंग एविएशन टूरिज्म विंग उत्तराखंड के रजत जयंती समारोह के उपलक्ष में ब्रह्माकुमारीज श्रीनगर गढ़वाल सेवा केंद्र में मेरी संस्कृति मेरी पहचान अभियान का शुभारंभ किया गया।इस अवसर पर अंबाला से पधारी ब्रह्माकुमारी शैली बहन ने संस्था तथा पर्यटक विभाग की गतिविधियों का परिचय देते हुए बताया कि ब्रह्माकुमारी संस्था विगत 90 वर्षों से समाज में नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों की पुनर्स्थापना के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यह अभियान श्रीनगर से प्रारंभ होकर रुद्रप्रयाग,गुप्तकाशी,कर्णप्रयाग,ज्योर्तिमठ आदि स्थानों से होता हुआ 19 नवंबर को उत्तरकाशी में संपन्न होगा। अभियान का उद्देश्य उत्तराखंड को धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करना है। कार्यक्रम में गढ़वाल विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी डॉ.संजय ध्यानी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे,जबकि एडवोकेट विवेक जोशी और होटल एसोसिएशन श्रीनगर के अध्यक्ष अप्पल रतूड़ी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।मुख्य वक्ता दिल्ली से आए ब्रह्माकुमार पीयूष भाई ने कहा कि उत्तराखंड प्राचीन मठ-मंदिरों,पवित्र नदियों और ऋषि-मुनियों की तपोभूमि रहा है। उन्होंने कहा कि जगद्गुरु शंकराचार्य,महात्मा गांधी,कालिदास,स्वामी विवेकानंद और स्वामी रामतीर्थ जैसे अनेक महापुरुषों ने इस भूमि से आध्यात्मिक प्रेरणाएँ लेकर भारतीय संस्कृति को विश्वभर में प्रसारित किया।ब्रह्माकुमारीज के क्षेत्रीय निदेशक ब्रह्माकुमार मेंहरचंद ने कहा कि भारत प्राचीनकाल से अध्यात्म और विज्ञान का केंद्र रहा है।पराधीन काल में भारतीय संस्कृति को कमजोर करने के प्रयास हुए,किंतु आज भी यह अपने मूल्यों पर अडिग है। उन्होंने बताया कि ब्रह्माकुमारीज संस्था विश्व के 140 देशों में राजयोग ध्यान के माध्यम से गीता में वर्णित भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार कर रही है। इस अवसर पर गढ़वाल विश्वविद्यालय के एनएसएस छात्रों ने गढ़वाली,जौनसारी और कुमाऊनी परिधानों में उत्तराखंड की पारंपरिक संस्कृति और विरासत का प्रदर्शन किया।कार्यक्रम में प्रो.जे.के.तिवारी,प्रो.राकेश नेगी,भोपाल चौधरी,कमला गोयल और उमा जोशी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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मेरी संस्कृति मेरी पहचान अभियान की शुरुआत श्रीनगर गढ़वाल से ब्रह्माकुमारीज ने दी धार्मिक व सांस्कृतिक पर्यटन को नई दिशा
प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। ब्रह्माकुमारीज के शिपिंग एविएशन टूरिज्म विंग उत्तराखंड के रजत जयंती समारोह के उपलक्ष में ब्रह्माकुमारीज श्रीनगर गढ़वाल सेवा केंद्र में मेरी संस्कृति मेरी पहचान अभियान का शुभारंभ किया गया।इस अवसर पर अंबाला से पधारी ब्रह्माकुमारी शैली बहन ने संस्था तथा पर्यटक विभाग की गतिविधियों का परिचय देते हुए बताया कि ब्रह्माकुमारी संस्था विगत 90 वर्षों से समाज में नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों की पुनर्स्थापना के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यह अभियान श्रीनगर से प्रारंभ होकर रुद्रप्रयाग,गुप्तकाशी,कर्णप्रयाग,ज्योर्तिमठ आदि स्थानों से होता हुआ 19 नवंबर को उत्तरकाशी में संपन्न होगा। अभियान का उद्देश्य उत्तराखंड को धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करना है। कार्यक्रम में गढ़वाल विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी डॉ.संजय ध्यानी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे,जबकि एडवोकेट विवेक जोशी और होटल एसोसिएशन श्रीनगर के अध्यक्ष अप्पल रतूड़ी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।मुख्य वक्ता दिल्ली से आए ब्रह्माकुमार पीयूष भाई ने कहा कि उत्तराखंड प्राचीन मठ-मंदिरों,पवित्र नदियों और ऋषि-मुनियों की तपोभूमि रहा है। उन्होंने कहा कि जगद्गुरु शंकराचार्य,महात्मा गांधी,कालिदास,स्वामी विवेकानंद और स्वामी रामतीर्थ जैसे अनेक महापुरुषों ने इस भूमि से आध्यात्मिक प्रेरणाएँ लेकर भारतीय संस्कृति को विश्वभर में प्रसारित किया।ब्रह्माकुमारीज के क्षेत्रीय निदेशक ब्रह्माकुमार मेंहरचंद ने कहा कि भारत प्राचीनकाल से अध्यात्म और विज्ञान का केंद्र रहा है।पराधीन काल में भारतीय संस्कृति को कमजोर करने के प्रयास हुए,किंतु आज भी यह अपने मूल्यों पर अडिग है। उन्होंने बताया कि ब्रह्माकुमारीज संस्था विश्व के 140 देशों में राजयोग ध्यान के माध्यम से गीता में वर्णित भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार कर रही है। इस अवसर पर गढ़वाल विश्वविद्यालय के एनएसएस छात्रों ने गढ़वाली,जौनसारी और कुमाऊनी परिधानों में उत्तराखंड की पारंपरिक संस्कृति और विरासत का प्रदर्शन किया।कार्यक्रम में प्रो.जे.के.तिवारी,प्रो.राकेश नेगी,भोपाल चौधरी,कमला गोयल और उमा जोशी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।