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महिला जनप्रतिनिधियों के अधिकारों की रक्षा को पौड़ी जनपद में प्रशासन सक्रिय जिलाधिकारी ने संज्ञान लेकर दिए कड़े निर्देश

प्रदीप कुमार
पौड़ी गढ़वाल/श्रीनगर। पौड़ी गढ़वाल जनपद में महिला जनप्रतिनिधियों के अधिकारों पर बढ़ते हस्तक्षेप और उनके दायित्वों के निर्वहन में परिजनों द्वारा की जा रही अनुचित दखलअंदाजी पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। इसी संदर्भ में क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा जिलाधिकारी पौड़ी स्वाति एस.भदौरिया को एक विस्तृत पत्र प्रेषित किया गया,जिसमें इस मुद्दे पर तत्काल प्रशासनिक स्तर पर संज्ञान लेकर रोकथाम हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई। पत्र प्राप्त होते ही जिलाधिकारी पौड़ी ने मामले की गंभीरता को समझते हुए संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि महिला जनप्रतिनिधियों को उनके संवैधानिक अधिकारों और दायित्वों का पूरा सम्मान दिया जाए। किसी भी परिस्थिति में उनके पति,परिजन या अन्य व्यक्ति को सरकारी बैठकों व कार्यों में हस्तक्षेप या प्रतिनिधित्व की अनुमति न दी जाए। पत्र पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) खिर्सू अमित विजल्वाण से भी विस्तृत और सकारात्मक वार्ता हुई। बातचीत में न्याय पंचायत देवलगढ़ से दुर्गेश कुमार फौजी भी उपस्थित रहे। इन्होंने भी इस मुद्दे पर गंभीर चिंता व्यक्त की। बीडीओ ने बताया कि खंड क्षेत्र में किसी भी प्रकार की प्रॉक्सी प्रथा को रोका जाएगा। सभी सचिवों,ग्राम पंचायत अधिकारियों और कर्मियों को निर्देशित किया जाएगा कि बैठक में केवल निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि ही भाग लें और हस्ताक्षर करें।परिजनों की उपस्थिति या हस्तक्षेप बिल्कुल स्वीकार्य नहीं होगा। शिकायत पत्र में स्पष्ट किया गया कि जनपद के कई ब्लॉकों में महिला ग्राम प्रधान,क्षेत्र पंचायत सदस्य और वार्ड सदस्य की ओर से बैठकों में उनके पति या अन्य पारिवारिक सदस्य उपस्थित होकर योजनाओं में हस्तक्षेप करते हैं। कई मामलों में देखा गया कि वास्तविक निर्वाचित प्रतिनिधि की भूमिका नगण्य रहती है,जबकि निर्णय परिजन लेते हैं। यह न केवल लोकतांत्रिक व्यवस्था,बल्कि महिला सशक्तिकरण की भावना के भी विपरीत है। कई अधिकारी भी अनजाने में इन्हें मान्यता दे देते हैं, जिससे प्रणाली प्रभावित हो रही है।
पत्र में रखी गई चार प्रमुख मांगे
1.महिला जनप्रतिनिधि स्वयं अपने अधिकारों और दायित्वों का निर्वहन करें।
2.उनके पति या परिजन किसी भी सरकारी कार्य,पंचायत बैठकों या योजनाओं में हस्तक्षेप न करें।
3.जहां प्रॉक्सी प्रथा चलती पाई जाए,वहां संबंधित अधिकारियों द्वारा तत्काल कार्रवाई की जाए।
4.सभी विभागीय अधिकारी/कर्मचारी,विशेषतः बीडीओ,एडीओ और ब्लॉक स्तर के जिम्मेदार कार्मिक,निर्वाचित प्रतिनिधियों के स्थान पर किसी परिजन को स्वीकार न करें
ग्राम पंचायतों में प्रॉक्सी प्रथा समाप्त कर वास्तविक महिला नेतृत्व को स्थापित करना ही इस प्रयास का मुख्य उद्देश्य है। पत्र में कहा गया है कि महिलाओं को केवल पद देकर नहीं,बल्कि अधिकारों के वास्तविक उपयोग का अवसर देकर ही सशक्त बनाया जा सकता है। प्रशासनिक स्तर से यह पहल जनपद के लिए निर्णायक साबित होगी। इस मुद्दे पर कई सामाजिक संगठनों और महिला समूहों ने भी समर्थन जताया है। उनका कहना है कि यह पहल जनपद में स्वतंत्र महिला नेतृत्व की मजबूत नींव डालेगी और पंचायत स्तर पर पारदर्शिता स्थापित करेगी।

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