खाकी ने निभाया मानवता का फर्ज: अज्ञात शव को विधि-विधान से दी अंतिम विदाई
प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल।चौकी लंगासू कोतवाली कर्णप्रयाग को सिवाई ग्राम के किल मुंगरी आम गदेरे में एक शव पड़े होने की सूचना मिली।सूचना पर तत्काल चौकी लंगासू से पुलिस बल घटनास्थल पर पहुँचा। जहाँ एक पुरूष का शव काफी दिन पुराना व अत्यंत सड़ी-गली अवस्था में था,जिससे उसकी पहचान करना संभव नहीं था। पुलिस द्वारा मौके पर व आसपास के क्षेत्रों में स्थानीय लोगों से पूछताछ की गयी। किन्तु शव की कोई पहचान नहीं हो पायी। तत्पश्चात अग्रिम कार्यवाही पंचायतनामा और फॉरेसिक टीम द्वारा अंगुष्ठ छाप (फिंगरप्रिंट) आदि हेतु शव को उप जिला चिकित्सालय कर्णप्रयाग लाया गया। जहाँ नियमानुसार 72 घंटे तक शव को अस्पताल में पहचान हेतु रखा गया व कर्णप्रयाग पुलिस द्वारा शव की पहचान हेतु विभिन्न माध्यमों से प्रचार-प्रसार किया गया। किन्तु हर संभव के प्रयासों के बावजूद भी मृतक की पहचान संबंधी कोई भी जानकारी सामने नहीं आई। जिसके पश्चात कांस्टेबल सतीश और पीआरडी प्रेम सिंह ने मानवता का धर्म निभाते हुए।कर्णप्रयाग स्थित घाट पर पूरी श्रद्धा और हिंदू रीति-रिवाज व विधि-विधान के साथ शव का दाह संस्कार किया गया।
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खाकी ने निभाया मानवता का फर्ज: अज्ञात शव को विधि-विधान से दी अंतिम विदाई
प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल।चौकी लंगासू कोतवाली कर्णप्रयाग को सिवाई ग्राम के किल मुंगरी आम गदेरे में एक शव पड़े होने की सूचना मिली।सूचना पर तत्काल चौकी लंगासू से पुलिस बल घटनास्थल पर पहुँचा। जहाँ एक पुरूष का शव काफी दिन पुराना व अत्यंत सड़ी-गली अवस्था में था,जिससे उसकी पहचान करना संभव नहीं था। पुलिस द्वारा मौके पर व आसपास के क्षेत्रों में स्थानीय लोगों से पूछताछ की गयी। किन्तु शव की कोई पहचान नहीं हो पायी। तत्पश्चात अग्रिम कार्यवाही पंचायतनामा और फॉरेसिक टीम द्वारा अंगुष्ठ छाप (फिंगरप्रिंट) आदि हेतु शव को उप जिला चिकित्सालय कर्णप्रयाग लाया गया। जहाँ नियमानुसार 72 घंटे तक शव को अस्पताल में पहचान हेतु रखा गया व कर्णप्रयाग पुलिस द्वारा शव की पहचान हेतु विभिन्न माध्यमों से प्रचार-प्रसार किया गया। किन्तु हर संभव के प्रयासों के बावजूद भी मृतक की पहचान संबंधी कोई भी जानकारी सामने नहीं आई। जिसके पश्चात कांस्टेबल सतीश और पीआरडी प्रेम सिंह ने मानवता का धर्म निभाते हुए।कर्णप्रयाग स्थित घाट पर पूरी श्रद्धा और हिंदू रीति-रिवाज व विधि-विधान के साथ शव का दाह संस्कार किया गया।