प्रदीप कुमार
हरिद्वार/श्रीनगर गढ़वाल।परिवहन विभाग हरिद्वार की पहल पर पतंजलि यूनिवर्सिटी औरंगाबाद में सड़क सुरक्षा कार्यक्रम एवं फर्स्ट रिस्पॉन्डर प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सड़क सुरक्षा के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना और दुर्घटनाओं व आपात स्थितियों में त्वरित व प्रभावी सहायता सुनिश्चित करना रहा। आयोजन एनसीसी और एनडीआरएफ के संयुक्त सहयोग से संपन्न हुआ।कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों,दुर्घटना के तुरंत बाद अपनाए जाने वाले सुरक्षित व्यवहार,गोल्डन आवर की अहमियत,घायलों को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने, प्राथमिक उपचार,सीपीआर, रक्तस्राव रोकने तथा स्ट्रेचर के उपयोग का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया। एनडीआरएफ के प्रशिक्षकों ने आपदा और सड़क दुर्घटना की स्थिति में प्रथम प्रतिक्रिया से जुड़े मानक प्रोटोकॉल का डेमो भी प्रस्तुत किया। एनसीसी कैडेट्स और विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने प्रशिक्षण में सक्रिय भागीदारी की और सड़क सुरक्षा को लेकर समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने बताया कि प्रशिक्षित प्रथम रिस्पॉन्डर बनने से सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु और गंभीर चोटों की संख्या में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों को यातायात नियमों के पालन,हेलमेट और सीट बेल्ट के नियमित उपयोग,ओवरस्पीडिंग से बचने तथा नशे की हालत में वाहन न चलाने की शपथ दिलाई गई। आयोजन को सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा गया कि इससे युवा जिम्मेदार नागरिक बनने के साथ-साथ आपात स्थितियों में प्रभावी सहायता देने में सक्षम बनेंगे।
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प्रदीप कुमार
हरिद्वार/श्रीनगर गढ़वाल।परिवहन विभाग हरिद्वार की पहल पर पतंजलि यूनिवर्सिटी औरंगाबाद में सड़क सुरक्षा कार्यक्रम एवं फर्स्ट रिस्पॉन्डर प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सड़क सुरक्षा के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना और दुर्घटनाओं व आपात स्थितियों में त्वरित व प्रभावी सहायता सुनिश्चित करना रहा। आयोजन एनसीसी और एनडीआरएफ के संयुक्त सहयोग से संपन्न हुआ।कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों,दुर्घटना के तुरंत बाद अपनाए जाने वाले सुरक्षित व्यवहार,गोल्डन आवर की अहमियत,घायलों को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने, प्राथमिक उपचार,सीपीआर, रक्तस्राव रोकने तथा स्ट्रेचर के उपयोग का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया। एनडीआरएफ के प्रशिक्षकों ने आपदा और सड़क दुर्घटना की स्थिति में प्रथम प्रतिक्रिया से जुड़े मानक प्रोटोकॉल का डेमो भी प्रस्तुत किया। एनसीसी कैडेट्स और विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने प्रशिक्षण में सक्रिय भागीदारी की और सड़क सुरक्षा को लेकर समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने बताया कि प्रशिक्षित प्रथम रिस्पॉन्डर बनने से सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु और गंभीर चोटों की संख्या में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों को यातायात नियमों के पालन,हेलमेट और सीट बेल्ट के नियमित उपयोग,ओवरस्पीडिंग से बचने तथा नशे की हालत में वाहन न चलाने की शपथ दिलाई गई। आयोजन को सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा गया कि इससे युवा जिम्मेदार नागरिक बनने के साथ-साथ आपात स्थितियों में प्रभावी सहायता देने में सक्षम बनेंगे।