Spread the love

प्रदीप कुमार
गोपेश्वर/चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। पहाड़ के गांवों की खूबसूरती जहां मन को सुकून देती है वहीं वहां पसरी खामोशी कई बार बहुत कुछ कह जाती है। ग्राम पटूड़ी, पांडुकेश्वर में इन दिनों ऐसी ही खामोशी है। करीब 70 परिवारों वाले इस गांव के अधिकांश लोग कपाट बंद होने तक के लिए लामबगड़ चले गए हैं। गांव में अब न बच्चों की आवाजें सुनाई देती हैं और न ही घरों में पहले जैसी चहल-पहल है। इसी सूने गांव में 78 वर्षीय हिम्मत सिंह चौहान और उनकी 65 वर्षीय बहन कुमारी पुष्पा अलग-अलग रहकर अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं। उम्र का तकाजा है आजीविका का कोई साधन नहीं है और सहारा भी गांव के लोगों का ही था। लेकिन जब पूरा गांव ही खाली हो गया तो सहारा देने वाला भी कोई नहीं रहा। इसी बीच पुलिस को दोनों बुजुर्गों के बारे में जानकारी मिली। थाना गोविन्दघाट से उपनिरीक्षक नवनीत भंडारी और उपनिरीक्षक रुकम सिंह पुलिस टीम के साथ दोनों बुजुर्गों का हाल जानने गांव पहुंचे। घर पहुंचकर पुलिस टीम ने जब हालात देखे तो पता चला कि घर का राशन पूरी तरह खत्म हो चुका था। पुलिस को यह भी पता चला कि कुमारी पुष्पा पिछले करीब 10 दिनों से बिना नमक के खाना खाकर किसी तरह अपना गुजारा कर रही थीं। यह जानकारी मिलने के बाद पुलिस कर्मियों ने देर नहीं की और तत्काल दोनों भाई-बहन के लिए सम्पूर्ण राशन और आवश्यक खाद्य सामग्री की व्यवस्था करवाई। पुलिस की ओर से की गई यह मदद दोनों बुजुर्गों के लिए महज राशन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रही बल्कि उन्हें यह भरोसा भी मिला कि इस सुनसान गांव में उनकी सुध लेने वाला कोई है। गांव में इस समय जंगली जानवरों का खतरा भी बना हुआ है। पुलिस टीम ने दोनों बुजुर्गों को विशेष रूप से सतर्क रहने अनावश्यक रूप से अकेले बाहर न निकलने और किसी भी परेशानी की स्थिति में तत्काल पुलिस को सूचना देने की हिदायत दी। कपाट बंद होने के बाद जब गांव की राहें सूनी हो जाती हैं तब भी पुलिस की नजर उन घरों तक पहुंचती है जहां मदद की जरूरत होती है। चमोली पुलिस की यह पहल बताती है कि पुलिस की वर्दी सिर्फ कानून का पहरा देने के लिए नहीं होती बल्कि जरूरत के समय किसी बुजुर्ग के लिए परिवार का सहारा भी बन सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Whatsapp