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प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल।चमोली जनपद के गोविंदघाट रेंज क्षेत्र में लक्ष्मण गंगा और अलकनंदा नदी के मध्य स्थित वन क्षेत्र में 9 जनवरी से सक्रिय वनाग्नि पर काबू पाने के लिए वन विभाग,जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं।चट्टानी और दुर्गम क्षेत्र होने के कारण आग पर नियंत्रण में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है,हालांकि फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब को किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ है। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वनाग्नि प्रभावित क्षेत्र के दोनों ओर लक्ष्मण गंगा और पुष्पावती नदियां बह रही हैं,जिससे आग के आगे बढ़ने की संभावना नहीं है। इन नदियों का तेज जल प्रवाह और चौड़ाई प्राकृतिक फायर लाइन का कार्य कर रही है। इसी कारण फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान और हेमकुंड साहिब क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित हैं।वनाग्नि की जानकारी मिलते ही नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान प्रशासन की ओर से टीमों का गठन किया गया। एक टीम को अलकनंदा नदी पार कर ऐरा प्रथम बीट स्थित आग वाले क्षेत्र में भेजा गया,जबकि दूसरी टीम को ड्रोन के माध्यम से आग के फैलाव का आकलन करने की जिम्मेदारी दी गई। क्षेत्र की खड़ी ढलान, चट्टानी बनावट और ऊपर से पत्थर गिरने की आशंका के चलते सुरक्षा कारणों से टीमों को वापस लौटना पड़ा। इसके बाद 10 जनवरी को लक्ष्मण गंगा नदी पर अस्थायी पुल का निर्माण कर टीम भ्यूंडार द्वितीय बीट तक पहुंची,लेकिन रात्रि होने और विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण आगे नहीं बढ़ सकी। 11 और 12 जनवरी को दोबारा टीमों को भेजा गया,जिन्होंने भ्यूंडार द्वितीय बीट और सिमरतोली तक पहुंचकर स्थिति का आकलन किया। 13 जनवरी को महिला मंगल दल,ग्राम प्रधान पुलना,ग्रामीणों और रेंज स्टाफ के सहयोग से पुनःअस्थायी पुल बनाकर क्षेत्र में प्रवेश किया गया,लेकिन अत्यधिक कठिन परिस्थितियों के कारण टीम को सीमित दूरी से वापस लौटना पड़ा। इस बीच आग की तीव्रता में धीरे-धीरे कमी दर्ज की गई है। डीएफओ सर्वेश दूबे ने बताया कि वनाग्नि स्थल से फूलों की घाटी की हवाई दूरी लगभग 7 किलोमीटर और जमीनी दूरी 22 से 25 किलोमीटर है। दोनों सुरक्षित क्षेत्रों और आग के बीच बहने वाली नदियां मजबूत प्राकृतिक अवरोध का कार्य कर रही हैं,जिससे आग के वहां तक पहुंचने की संभावना नहीं है।उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन और शासन के सहयोग से वनाग्नि क्षेत्र का हेली सर्वेक्षण किया जा रहा है,ताकि स्थिति पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके।

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