प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल।36वें राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 के अंतर्गत बच्चों को सड़क सुरक्षा की आदतें सिखाने के उद्देश्य से यातायात पुलिस चमोली द्वारा केन्द्रीय विद्यालय गोपेश्वर में एक व्यापक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम यातायात निदेशालय उत्तराखंड के आदेशों के अनुपालन में दिनांक 16 जनवरी से 14 फरवरी 2026 तक चलाए जा रहे सड़क सुरक्षा माह के क्रम में आयोजित किया गया। पुलिस अधीक्षक चमोली सुरजीत सिंह पँवार के निर्देशानुसार 19 जनवरी 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में यातायात निरीक्षक दिगंबर उनियाल ने विद्यालय के छात्र-छात्राओं को पर्वतीय क्षेत्रों की परिस्थितियों के अनुरूप सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों की जानकारी दी। उन्होंने सरल और व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कें संकरी,ढलानयुक्त और मोड़दार होती हैं,जहां थोड़ी-सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है,इसलिए सतर्कता और नियमों का पालन जीवन की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि पहाड़ी सड़कों पर पैदल चलते समय सड़क के किनारे सुरक्षित दूरी बनाकर चलना चाहिए तथा मोड़ों पर रुककर देखने के बाद ही आगे बढ़ना चाहिए। ढलान वाली सड़कों पर दौड़ने,फिसलने या खेलकूद से बचने और विद्यालय आते-जाते समय अनुशासित ढंग से चलने की सीख दी गई। साथ ही वर्षा,कोहरा और बर्फबारी के दौरान सड़कों पर फिसलन और दृश्यता कम होने की स्थिति में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।छात्र-छात्राओं को नाबालिग अवस्था में वाहन न चलाने,अपने अभिभावकों को भी धीमी,सुरक्षित और नियमबद्ध ड्राइविंग के लिए प्रेरित करने की अपील की गई। दोपहिया वाहन पर हेलमेट पहनने और चारपहिया वाहन में सीट बेल्ट लगाने के महत्व की जानकारी दी गई।इसके अलावा वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का प्रयोग न करने,तेज गति,ओवरटेकिंग और लापरवाही से वाहन न चलाने के प्रति भी जागरूक किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को गुड सेमेरिटन की अवधारणा के बारे में भी जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की सहायता करने वाला नागरिक कानूनन सुरक्षित होता है और उसकी पहचान गोपनीय रखी जाती है। बच्चों को यह संदेश दिया गया कि पहाड़ी क्षेत्रों में दुर्घटना की स्थिति में सहायता देर से पहुंच सकती है,इसलिए घायल की तत्काल मदद करना मानवता का बड़ा कार्य है।इसके साथ ही गोल्डन आवर के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।बताया गया कि दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा घायल के जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है और इस दौरान त्वरित चिकित्सा सहायता मिलने से किसी की जान बचाई जा सकती है। जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत छात्र-छात्राओं को यातायात जागरूकता पम्पलेट वितरित किए गए,ताकि वे स्वयं जागरूक बनें और अपने परिवार तथा गांव-समुदाय तक सड़क सुरक्षा का संदेश पहुंचा सकें। इस कार्यक्रम में 80 से अधिक छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया।कार्यक्रम के दौरान अपर उपनिरीक्षक मुकेश कुमार,कांस्टेबल जोगेन्द्र और कांस्टेबल नीरज भंडारी मौजूद रहे।
