प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल।उत्तराखंड के चारधाम यात्रा मार्गों तथा राज्य के अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर विगत कुछ वर्षों से बार-बार उत्पन्न हो रहे भूस्खलन,सड़क अवरोध,पहाड़ी ढलानों के धंसने और इससे जुड़ी जन-सुरक्षा की समस्याएँ किसी एक मौसम या एक स्थान तक सीमित नहीं रह गई हैं। यह विषय आज उत्तराखंड ही नहीं,बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। मानसून के दौरान तथा उसके बाद लगातार सामने आ रही घटनाएँ यह स्पष्ट करती हैं कि पहाड़ी भू-भाग में सड़क निर्माण,यातायात दबाव,जलवायु परिवर्तन और भू-वैज्ञानिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती है। चारधाम परियोजना या ऑल वेदर रोड प्रोजेक्ट और उससे जुड़े राष्ट्रीय राजमार्गों का उद्देश्य उत्तराखंड के दूरस्थ क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी देना, तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को सुरक्षित आवागमन उपलब्ध कराना तथा स्थानीय नागरिकों के लिए आवागमन और आजीविका के अवसर सुदृढ़ करना है। इस उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा किए गए प्रयास निश्चित रूप से महत्वपूर्ण हैं,किंतु साथ-साथ यह भी सत्य है कि इन मार्गों पर बार-बार हो रहे भूस्खलन ने स्थानीय निवासियों,यात्रियों और वाहन चालकों के समक्ष गंभीर जोखिम उत्पन्न किए हैं। हाल के वर्षों में कई स्थानों पर जान-माल की हानि,लंबा यातायात अवरोध और आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति बाधित होने जैसी परिस्थितियाँ सामने आई हैं,जो समय-समय पर समाचार माध्यमों में भी उजागर होती रही हैं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए प्रो एम एम सेमवाल,विभागाध्यक्ष राजनीति विज्ञान विभाग,हेनब गढ़वाल विश्वविद्यालय की सक्रिय पहल पर उत्तराखंड के नागरिक समाज,विभिन्न शैक्षणिक,सामाजिक एवं पेशेवर वर्गों से जुड़े लोगों ने संगठित रूप से अपनी चिंता और सुझाव सरकार एवं प्रशासन के समक्ष रखे। अगस्त 2023 में चारधाम यात्रा मार्गों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगातार हो रहे भूस्खलन को लेकर एक सामूहिक ज्ञापन प्रस्तुत किया गया,जिस पर 146 नागरिकों ने हस्ताक्षर किए। इस ज्ञापन के माध्यम से समस्या की गंभीरता के साथ-साथ उसके व्यावहारिक और वैज्ञानिक समाधान भी सुझाए गए,जिनमें भूस्खलन-संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान,स्टील वायर मेश एवं सुरक्षा गार्ड का प्रयोग,ढीले पत्थरों और बोल्डरों को हटाना,रिटेनिंग वॉल का निर्माण,सुरंगों पर विचार, वृक्षारोपण,आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएँ तथा त्वरित राहत-बचाव तंत्र को सुदृढ़ करना जैसे बिंदु शामिल थे। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा मंत्री नितिन गडकरी द्वारा इस विषय पर दिखाई गई संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई भी सराहनीय है। मंत्रालय के माध्यम से चारधाम मार्ग और अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर कई स्थानों पर स्टील मेश,सुरक्षा संरचनाएँ,ढीले पत्थरों को हटाने,सड़क चौड़ीकरण के साथ-साथ सुरक्षा उपायों को मजबूत करने जैसे कार्य किए गए हैं। यह कार्य न केवल स्थानीय नागरिकों के लिए राहत लेकर आए हैं,बल्कि लाखों तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की सुरक्षा की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसके साथ-साथ यह भी संतोषजनक है कि इन बिंदुओं पर कार्य अभी भी जारी है और संबंधित एजेंसियाँ निरंतर निगरानी और सुधार की प्रक्रिया में लगी हुई हैं। यह उल्लेख करना आवश्यक है कि इस पूरे पत्राचार और नागरिक पहल को सकारात्मक दृष्टि से लिया गया। गढ़वाल सांसद,लोक सभा सदस्य अनिल बलूनी ने इस विषय को गंभीरता से संज्ञान में लिया और इसे संबंधित मंत्रालयों के समक्ष उठाया। हालिया समाचार रिपोर्टों से यह भी स्पष्ट होता है कि भारी वर्षा और बदलते मौसम पैटर्न के कारण कुछ नए भूस्खलन-संवेदनशील क्षेत्र सामने आ रहे हैं। कई बार चारधाम यात्रा को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा,कहीं मार्ग अवरुद्ध हुए और कहीं वैकल्पिक व्यवस्थाएँ करनी पड़ीं। यह स्थिति इस बात का संकेत है कि समस्या का समाधान एक बार की कार्रवाई से संभव नहीं है,बल्कि इसके लिए दीर्घकालिक,वैज्ञानिक और सतत दृष्टिकोण अपनाना होगा। सड़क सुरक्षा,पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखना भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसके साथ ही नए सुझावों में इस बात को भी शामिल करना आवश्यक है कि ऑल वेदर रोड प्रोजेक्ट के डंपिंग ग्राउंड को व्यवस्थित कर उन्हें बगीचों,पार्कों तथा दूसरे उपयोगी संसाधनों के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। इस पूरी सड़क परियोजना बिशेष रूप में ऋषिकेश से देवप्रयाग के मध्य तथा गंगोत्री,यमुनोत्री राजमार्ग पर यदि मेडिकल सुविधायें स्थापित की जाएं तो सड़क सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है ताकि किसी अनहोनी की दशा में त्वरित उपचार की व्यवस्था की जा सके। इस पूरे घटनाक्रम से एक महत्वपूर्ण संदेश स्पष्ट रूप से सामने आता है। यदि नागरिक समाज जागरूक होकर,तथ्यों और व्यावहारिक सुझावों के साथ सरकार और प्रशासन का ध्यान सही मुद्दों की ओर आकृष्ट करता है,तो उस पर न केवल विचार किया जाता है,बल्कि उस पर अमल भी होता है। यह प्रक्रिया समय ले सकती है,किंतु संगठित,शांतिपूर्ण और उद्देश्यपूर्ण प्रयास परिणाम देते हैं। उत्तराखंड के संदर्भ में यह पहल इस बात का उदाहरण है कि नागरिक सहभागिता केवल विरोध तक सीमित न रहकर समाधान का मार्ग भी प्रशस्त कर सकती है। यह पूरी कवायद किसी एक व्यक्ति या संस्था की नहीं,बल्कि उत्तराखंड में चारधाम परियोजना और अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों को अधिक सुरक्षित,टिकाऊ और नागरिक-अनुकूल बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयास है। इसका उद्देश्य केवल सड़क निर्माण नहीं,बल्कि जीवन की सुरक्षा,पर्यावरण की रक्षा और भविष्य की पीढ़ियों के लिए संतुलित विकास सुनिश्चित करना है। आगे भी यह आवश्यक है कि सरकार,प्रशासन,विशेषज्ञ और नागरिक समाज मिलकर इन मुद्दों पर निरंतर संवाद और सहयोग बनाए रखें। अंत में,एक बार फिर नितिन गडकरी गढ़वाल सांसद,हेमवती नंदन गढ़वाल विश्वविद्यालय के पूर्व चांसलर डॉ.योगेंद्र नारायण तथा सभी संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया जाता है,जिन्होंने उत्तराखंड की भौगोलिक संवेदनशीलता को समझते हुए नागरिकों की चिंताओं पर सकारात्मक कार्रवाई की। हमें विश्वास है कि यदि इसी प्रकार जागरूकता,सहभागिता और जिम्मेदारी के साथ कार्य होता रहा,तो चारधाम मार्ग और राज्य के अन्य राष्ट्रीय राजमार्ग भविष्य में और अधिक सुरक्षित तथा सुविधाजनक बन सकेंगे।
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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल।उत्तराखंड के चारधाम यात्रा मार्गों तथा राज्य के अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर विगत कुछ वर्षों से बार-बार उत्पन्न हो रहे भूस्खलन,सड़क अवरोध,पहाड़ी ढलानों के धंसने और इससे जुड़ी जन-सुरक्षा की समस्याएँ किसी एक मौसम या एक स्थान तक सीमित नहीं रह गई हैं। यह विषय आज उत्तराखंड ही नहीं,बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। मानसून के दौरान तथा उसके बाद लगातार सामने आ रही घटनाएँ यह स्पष्ट करती हैं कि पहाड़ी भू-भाग में सड़क निर्माण,यातायात दबाव,जलवायु परिवर्तन और भू-वैज्ञानिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती है। चारधाम परियोजना या ऑल वेदर रोड प्रोजेक्ट और उससे जुड़े राष्ट्रीय राजमार्गों का उद्देश्य उत्तराखंड के दूरस्थ क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी देना, तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को सुरक्षित आवागमन उपलब्ध कराना तथा स्थानीय नागरिकों के लिए आवागमन और आजीविका के अवसर सुदृढ़ करना है। इस उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा किए गए प्रयास निश्चित रूप से महत्वपूर्ण हैं,किंतु साथ-साथ यह भी सत्य है कि इन मार्गों पर बार-बार हो रहे भूस्खलन ने स्थानीय निवासियों,यात्रियों और वाहन चालकों के समक्ष गंभीर जोखिम उत्पन्न किए हैं। हाल के वर्षों में कई स्थानों पर जान-माल की हानि,लंबा यातायात अवरोध और आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति बाधित होने जैसी परिस्थितियाँ सामने आई हैं,जो समय-समय पर समाचार माध्यमों में भी उजागर होती रही हैं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए प्रो एम एम सेमवाल,विभागाध्यक्ष राजनीति विज्ञान विभाग,हेनब गढ़वाल विश्वविद्यालय की सक्रिय पहल पर उत्तराखंड के नागरिक समाज,विभिन्न शैक्षणिक,सामाजिक एवं पेशेवर वर्गों से जुड़े लोगों ने संगठित रूप से अपनी चिंता और सुझाव सरकार एवं प्रशासन के समक्ष रखे। अगस्त 2023 में चारधाम यात्रा मार्गों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगातार हो रहे भूस्खलन को लेकर एक सामूहिक ज्ञापन प्रस्तुत किया गया,जिस पर 146 नागरिकों ने हस्ताक्षर किए। इस ज्ञापन के माध्यम से समस्या की गंभीरता के साथ-साथ उसके व्यावहारिक और वैज्ञानिक समाधान भी सुझाए गए,जिनमें भूस्खलन-संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान,स्टील वायर मेश एवं सुरक्षा गार्ड का प्रयोग,ढीले पत्थरों और बोल्डरों को हटाना,रिटेनिंग वॉल का निर्माण,सुरंगों पर विचार, वृक्षारोपण,आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएँ तथा त्वरित राहत-बचाव तंत्र को सुदृढ़ करना जैसे बिंदु शामिल थे। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा मंत्री नितिन गडकरी द्वारा इस विषय पर दिखाई गई संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई भी सराहनीय है। मंत्रालय के माध्यम से चारधाम मार्ग और अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर कई स्थानों पर स्टील मेश,सुरक्षा संरचनाएँ,ढीले पत्थरों को हटाने,सड़क चौड़ीकरण के साथ-साथ सुरक्षा उपायों को मजबूत करने जैसे कार्य किए गए हैं। यह कार्य न केवल स्थानीय नागरिकों के लिए राहत लेकर आए हैं,बल्कि लाखों तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की सुरक्षा की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसके साथ-साथ यह भी संतोषजनक है कि इन बिंदुओं पर कार्य अभी भी जारी है और संबंधित एजेंसियाँ निरंतर निगरानी और सुधार की प्रक्रिया में लगी हुई हैं। यह उल्लेख करना आवश्यक है कि इस पूरे पत्राचार और नागरिक पहल को सकारात्मक दृष्टि से लिया गया। गढ़वाल सांसद,लोक सभा सदस्य अनिल बलूनी ने इस विषय को गंभीरता से संज्ञान में लिया और इसे संबंधित मंत्रालयों के समक्ष उठाया। हालिया समाचार रिपोर्टों से यह भी स्पष्ट होता है कि भारी वर्षा और बदलते मौसम पैटर्न के कारण कुछ नए भूस्खलन-संवेदनशील क्षेत्र सामने आ रहे हैं। कई बार चारधाम यात्रा को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा,कहीं मार्ग अवरुद्ध हुए और कहीं वैकल्पिक व्यवस्थाएँ करनी पड़ीं। यह स्थिति इस बात का संकेत है कि समस्या का समाधान एक बार की कार्रवाई से संभव नहीं है,बल्कि इसके लिए दीर्घकालिक,वैज्ञानिक और सतत दृष्टिकोण अपनाना होगा। सड़क सुरक्षा,पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखना भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसके साथ ही नए सुझावों में इस बात को भी शामिल करना आवश्यक है कि ऑल वेदर रोड प्रोजेक्ट के डंपिंग ग्राउंड को व्यवस्थित कर उन्हें बगीचों,पार्कों तथा दूसरे उपयोगी संसाधनों के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। इस पूरी सड़क परियोजना बिशेष रूप में ऋषिकेश से देवप्रयाग के मध्य तथा गंगोत्री,यमुनोत्री राजमार्ग पर यदि मेडिकल सुविधायें स्थापित की जाएं तो सड़क सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है ताकि किसी अनहोनी की दशा में त्वरित उपचार की व्यवस्था की जा सके। इस पूरे घटनाक्रम से एक महत्वपूर्ण संदेश स्पष्ट रूप से सामने आता है। यदि नागरिक समाज जागरूक होकर,तथ्यों और व्यावहारिक सुझावों के साथ सरकार और प्रशासन का ध्यान सही मुद्दों की ओर आकृष्ट करता है,तो उस पर न केवल विचार किया जाता है,बल्कि उस पर अमल भी होता है। यह प्रक्रिया समय ले सकती है,किंतु संगठित,शांतिपूर्ण और उद्देश्यपूर्ण प्रयास परिणाम देते हैं। उत्तराखंड के संदर्भ में यह पहल इस बात का उदाहरण है कि नागरिक सहभागिता केवल विरोध तक सीमित न रहकर समाधान का मार्ग भी प्रशस्त कर सकती है। यह पूरी कवायद किसी एक व्यक्ति या संस्था की नहीं,बल्कि उत्तराखंड में चारधाम परियोजना और अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों को अधिक सुरक्षित,टिकाऊ और नागरिक-अनुकूल बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयास है। इसका उद्देश्य केवल सड़क निर्माण नहीं,बल्कि जीवन की सुरक्षा,पर्यावरण की रक्षा और भविष्य की पीढ़ियों के लिए संतुलित विकास सुनिश्चित करना है। आगे भी यह आवश्यक है कि सरकार,प्रशासन,विशेषज्ञ और नागरिक समाज मिलकर इन मुद्दों पर निरंतर संवाद और सहयोग बनाए रखें। अंत में,एक बार फिर नितिन गडकरी गढ़वाल सांसद,हेमवती नंदन गढ़वाल विश्वविद्यालय के पूर्व चांसलर डॉ.योगेंद्र नारायण तथा सभी संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया जाता है,जिन्होंने उत्तराखंड की भौगोलिक संवेदनशीलता को समझते हुए नागरिकों की चिंताओं पर सकारात्मक कार्रवाई की। हमें विश्वास है कि यदि इसी प्रकार जागरूकता,सहभागिता और जिम्मेदारी के साथ कार्य होता रहा,तो चारधाम मार्ग और राज्य के अन्य राष्ट्रीय राजमार्ग भविष्य में और अधिक सुरक्षित तथा सुविधाजनक बन सकेंगे।