श्री श्याम पोर्टल-प्रदीप कुमार
प्रदीप कुमार
हरिद्वार/श्रीनगर गढ़वाल। हरिद्वार मनसा देवी हिल क्षेत्र में हो रहे भूस्खलन के प्रभावी प्रबंधन और जोखिम न्यूनीकरण के उद्देश्य से उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र की टीम द्वारा स्थलीय निरीक्षण किया गया। यह निरीक्षण भूस्खलन जोखिम प्रबंधन पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत किया गया,जिसमें भारत,नेपाल और भूटान से आए प्रतिभागियों ने भाग लिया। यह अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र,विश्व बैंक और नॉर्वेजियन जियोटेक्निकल इंस्टीट्यूट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भूस्खलन जोखिम आकलन,न्यूनीकरण योजना निर्माण और आपदा प्रतिरोधकता के लिए प्रभावी हस्तक्षेपों के माध्यम से क्षेत्रीय और संस्थागत क्षमताओं को सुदृढ़ करना है। एक सप्ताह का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम दो फरवरी को देहरादून में प्रारंभ हुआ,जिसमें सैद्धांतिक तकनीकी सत्रों के साथ-साथ व्यावहारिक फील्ड प्रशिक्षण को भी शामिल किया गया। प्रशिक्षण संरचना इस प्रकार तैयार की गई थी कि प्रतिभागियों को भूस्खलन की प्रक्रियाओं,जोखिम कारकों,मूल्यांकन पद्धतियों और प्रबंधन रणनीतियों की व्यवहारिक समझ विकसित हो सके। इसी क्रम में चार फरवरी को हरिद्वार स्थित मनसा देवी पहाड़ियों के भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में प्रशिक्षण भ्रमण आयोजित किया गया। यह भ्रमण उस स्थल पर किया गया जहां भूस्खलन न्यूनीकरण केंद्र द्वारा भू-डिजाइन,भू-अन्वेषण,ड्रिलिंग और भू-भौतिकीय जांच जैसे तकनीकी कार्य किए जा रहे हैं। भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों को केंद्र के निदेशक शांतनु सरकार के नेतृत्व में स्थल की वास्तविक परिस्थितियों और चल रही जांच प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई। क्षेत्र भ्रमण के दौरान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को भूस्खलन क्षेत्र की भू-आकृतिक संरचना,ढाल की स्थिरता,भूमि उपयोग पैटर्न, जल निकासी व्यवस्था,प्राकृतिक और मानवीय कारणों तथा वर्तमान सुरक्षा उपायों का विस्तृत अवलोकन कराया। विशेषज्ञों ने बताया कि इस प्रकार के फील्ड अध्ययन स्थल-विशिष्ट और प्रभावी भूस्खलन न्यूनीकरण उपायों की योजना बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस प्रशिक्षण भ्रमण का आयोजन उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र,राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण,यू-प्रिपेयर,सिंचाई विभाग,लोक निर्माण विभाग,वन विभाग,जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय हरिद्वार और अन्य संबंधित विभागों के समन्वय से किया गया। नेपाल और भूटान से आए प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी ने भूस्खलन जोखिम प्रबंधन में अंतरराष्ट्रीय और बहु-विभागीय सहयोग के महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ भूवैज्ञानिक,आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारी,तकनीकी विशेषज्ञ और विभिन्न देशों से आए भूवैज्ञानिक उपस्थित रहे।यह प्रशिक्षण और स्थलीय निरीक्षण भविष्य में भूस्खलन जोखिम को कम करने,पर्यावरण संरक्षण और पर्वतीय क्षेत्रों में जनजीवन की सुरक्षा के लिए प्रभावी रणनीतियों के विकास में सहायक सिद्ध होगा।
