प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। श्रीनगर 21 फरवरी हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित स्वामी मनमथन प्रेक्षागृह में देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ सीडीएस जनरल अनिल चौहान का भव्य स्वागत किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जनरल चौहान ने सामरिक सोच एवं राष्ट्रीय सुरक्षा विषय पर ऐतिहासिक एवं प्रेरक संबोधन दिया। कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार के स्वास्थ्य एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.धन सिंह रावत विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और वंदे मातरम् के साथ हुआ। कुलपति ने अपने स्वागत वक्तव्य में कहा कि वीरभूमि उत्तराखंड के लिए यह गौरव का क्षण है। उन्होंने जानकारी दी कि जनरल अनिल चौहान द्वारा विश्वविद्यालय पुस्तकालय को शोधपरक महत्वपूर्ण पुस्तकें प्रदान की गई हैं जिससे विद्यार्थियों और शोधार्थियों को लाभ मिलेगा। उन्होंने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि सेना के साथ अग्निवीर प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए समझौता ज्ञापन एम.ओ.यू.पर हस्ताक्षर किए गए हैं तथा विश्वविद्यालय विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। अपने संबोधन में जनरल अनिल चौहान ने विश्वविद्यालय की स्थापना के 50 वर्षों में अर्जित उपलब्धियों की सराहना करते हुए शिक्षक समुदाय को बधाई दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सेना का दायित्व नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है जिसकी शुरुआत विद्यालयों और विश्वविद्यालयों से होनी चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय चेतना और सामूहिक संकल्प पर बल देते हुए कहा कि भारत की सामरिक सोच वैदिक साहित्य चाणक्य नीति और धनुर्वेद जैसी परंपराओं से प्रेरित रही है।आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय सुरक्षा का केंद्रीय तत्व बताते हुए उन्होंने आंतरिक एवं बाहरी चुनौतियों वर्ष 1971 के युद्ध के उदाहरण बदलती युद्ध अवधारणाओं तथा तकनीक आधारित संघर्षों का उल्लेख किया। उन्होंने देश की सीमाओं और परमाणु शक्ति संपन्न पड़ोसी देशों को प्रमुख चुनौतियाँ बताते हुए सुदृढ़ सरकार मजबूत सेना और रणनीतिक तैयारी की आवश्यकता पर बल दिया।समापन सत्र में विद्यार्थियों के साथ संवाद आयोजित हुआ।पल्लवी उनियाल ने सेना में महिलाओं की भूमिका को लेकर प्रश्न किया। इस पर जनरल चौहान ने कहा कि भारतीय सेना में महिलाओं को समान अवसर और जिम्मेदारियाँ दी जा रही हैं तथा चयन का आधार योग्यता और प्रतिबद्धता है। अन्य छात्र-छात्राओं ने भी राष्ट्रीय सुरक्षा सैन्य सेवा और करियर से जुड़े प्रश्न पूछे जिनका उन्होंने विस्तार से उत्तर दिया। विशिष्ट अतिथि डॉ.धन सिंह रावत ने जनरल अनिल चौहान और अन्य अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि पुस्तक दान की पहल अनुपमा चौहान के प्रयासों से संभव हुई। उन्होंने उन्हें उनके पैतृक गांव गवाणा आने का आमंत्रण दिया। कार्यक्रम के दौरान जनरल अनिल चौहान ने विश्वविद्यालय पुस्तकालय को 227 महत्वपूर्ण पुस्तकें भेंट कीं जो सामरिक ऐतिहासिक और शोध विषयों से संबंधित हैं। इस अवसर पर अनुपमा चौहान भी उपस्थित रहीं। बताया गया कि वे सैन्य परिवार कल्याण संगठन के माध्यम से नीति गांव को गोद लेकर वहां सामाजिक और शैक्षिक विकास से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।इसी क्रम में प्रो.एम.पी.एस.बिष्ट द्वारा संपादित पुस्तक रणभूमि दर्शन का विमोचन जनरल अनिल चौहान डॉ.धन सिंह रावत और कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह सहित अन्य अतिथियों ने किया।पुस्तक में सीमांत गांवों के भ्रमण और लैंसडाउन सैन्य छावनी से जुड़े संस्मरणों का संकलन प्रकाशित किया गया है। इस अवसर पर देवप्रयाग विधानसभा के विधायक विनोद कंडारी प्रो.महेंद्र प्रताप सिंह बिष्ट प्रो.मोहन पंवार प्रो.मंजुला राणा प्रो.एचबीएस चौहान ब्रिगेडियर विनोद नेगी कर्नल गौरव बत्रा मुख्य नियंता प्रो.दीपक कुमार प्रो.एन.एस.पंवार अनीष उज्जमान प्रो.राकेश डोढ़ी चौरास परिसर के निदेशक प्रो.राजेंद्र सिंह नेगी जनसंपर्क अधिकारी आशुतोष बहुगुणा सहित बड़ी संख्या में शिक्षक शोधार्थी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
गढ़वाल विश्वविद्यालय में सीडीएस जनरल अनिल चौहान का प्रेरक संबोधन राष्ट्रीय सुरक्षा पर ऐतिहासिक संवाद
