प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। नई दिल्ली राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान उत्तराखण्ड और श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के बीच भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक के समन्वय को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 20 फरवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते पर संस्कृत विश्वविद्यालय की ओर से कुलसचिव प्रो.पवन कुमार शर्मा तथा राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान उत्तराखण्ड की ओर से अधिष्ठाता अनुसंधान एवं परामर्श डॉ.धर्मेन्द्र त्रिपाठी ने हस्ताक्षर किए। यह समझौता दोनों संस्थानों के बीच शैक्षणिक अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में दीर्घकालीन सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में अहम पहल है। समझौते का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित वैज्ञानिक सिद्धांतों और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीकी उपकरणों और विधियों के साथ एकीकृत करना है। इस सहयोग के अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता संगणकीय प्रतिरूपण सतत अभियांत्रिकी डिजिटल तकनीक तथा अन्य उभरती तकनीकों के माध्यम से संस्कृत साहित्य वास्तुशास्त्र पारंपरिक स्थापत्य पर्यावरणीय ज्ञान और अन्य भारतीय पारंपरिक विज्ञानों के अध्ययन विश्लेषण तथा तकनीकी उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा।समझौते के तहत संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं संचालित की जाएंगी। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगोष्ठियां सम्मेलन कार्यशालाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। संकाय सदस्यों शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक तथा अनुसंधान आदान-प्रदान कार्यक्रम चलाए जाएंगे। साथ ही अंतःविषयक पाठ्यक्रम प्रशिक्षण मॉड्यूल और शैक्षणिक कार्यक्रम विकसित किए जाएंगे। संयुक्त शोध प्रकाशन नवाचार परियोजनाएं और तकनीकी समाधान भी तैयार किए जाएंगे। यह पहल भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक वैज्ञानिक और तकनीकी दृष्टिकोण से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है। इससे पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण संवर्धन और वैज्ञानिक पुनर्सत्यापन को बल मिलेगा।साथ ही तकनीकी नवाचार सतत विकास और समाजोपयोगी अनुसंधान को नई दिशा प्राप्त होगी। यह समझौता दोनों प्रतिष्ठित संस्थानों के बीच शैक्षणिक और अनुसंधान सहयोग को और अधिक मजबूत करेगा तथा भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक के प्रभावी समन्वय के माध्यम से ज्ञान नवाचार और राष्ट्रीय विकास को गति प्रदान करेगा।
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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। नई दिल्ली राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान उत्तराखण्ड और श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के बीच भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक के समन्वय को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 20 फरवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते पर संस्कृत विश्वविद्यालय की ओर से कुलसचिव प्रो.पवन कुमार शर्मा तथा राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान उत्तराखण्ड की ओर से अधिष्ठाता अनुसंधान एवं परामर्श डॉ.धर्मेन्द्र त्रिपाठी ने हस्ताक्षर किए। यह समझौता दोनों संस्थानों के बीच शैक्षणिक अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में दीर्घकालीन सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में अहम पहल है। समझौते का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित वैज्ञानिक सिद्धांतों और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीकी उपकरणों और विधियों के साथ एकीकृत करना है। इस सहयोग के अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता संगणकीय प्रतिरूपण सतत अभियांत्रिकी डिजिटल तकनीक तथा अन्य उभरती तकनीकों के माध्यम से संस्कृत साहित्य वास्तुशास्त्र पारंपरिक स्थापत्य पर्यावरणीय ज्ञान और अन्य भारतीय पारंपरिक विज्ञानों के अध्ययन विश्लेषण तथा तकनीकी उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा।समझौते के तहत संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं संचालित की जाएंगी। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगोष्ठियां सम्मेलन कार्यशालाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। संकाय सदस्यों शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक तथा अनुसंधान आदान-प्रदान कार्यक्रम चलाए जाएंगे। साथ ही अंतःविषयक पाठ्यक्रम प्रशिक्षण मॉड्यूल और शैक्षणिक कार्यक्रम विकसित किए जाएंगे। संयुक्त शोध प्रकाशन नवाचार परियोजनाएं और तकनीकी समाधान भी तैयार किए जाएंगे। यह पहल भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक वैज्ञानिक और तकनीकी दृष्टिकोण से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है। इससे पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण संवर्धन और वैज्ञानिक पुनर्सत्यापन को बल मिलेगा।साथ ही तकनीकी नवाचार सतत विकास और समाजोपयोगी अनुसंधान को नई दिशा प्राप्त होगी। यह समझौता दोनों प्रतिष्ठित संस्थानों के बीच शैक्षणिक और अनुसंधान सहयोग को और अधिक मजबूत करेगा तथा भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक के प्रभावी समन्वय के माध्यम से ज्ञान नवाचार और राष्ट्रीय विकास को गति प्रदान करेगा।