प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। नयार वैली एडवेंचर फेस्टिवल के दूसरे दिन की सांस्कृतिक संध्या लोकगायन की अनुपम छटा से सराबोर रही। जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण ने जैसे ही रुमा झूमा जागर से कार्यक्रम का शुभारंभ किया पांडाल में बैठे दर्शक अपनी कुर्सियों पर ही झूम उठे। ढोल-दमाऊ की थाप और लोकधुनों की गूंज से पूरी घाटी भाव-विभोर हो उठी। इसके बाद उन्होंने मेरु हिमवंती देश सरुली मेरु जिया लगी गे सभी कठ्ठा ह्वे गैनी और बिंदुली राति रै गे जरासी जैसे लोकप्रिय गीतों की शानदार प्रस्तुतियां दीं। हर प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट और उत्साह के साथ उनका स्वागत किया। खचाखच भरे पांडाल में लोकसंगीत की सुरलहरियां देर रात तक गूंजती रहीं। यह संध्या न केवल सांस्कृतिक विरासत का उत्सव बनी बल्कि नयार घाटी की पहचान और समृद्ध लोकसंस्कृति के गौरव को भी नई ऊंचाई दे गई।
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प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। नयार वैली एडवेंचर फेस्टिवल के दूसरे दिन की सांस्कृतिक संध्या लोकगायन की अनुपम छटा से सराबोर रही। जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण ने जैसे ही रुमा झूमा जागर से कार्यक्रम का शुभारंभ किया पांडाल में बैठे दर्शक अपनी कुर्सियों पर ही झूम उठे। ढोल-दमाऊ की थाप और लोकधुनों की गूंज से पूरी घाटी भाव-विभोर हो उठी। इसके बाद उन्होंने मेरु हिमवंती देश सरुली मेरु जिया लगी गे सभी कठ्ठा ह्वे गैनी और बिंदुली राति रै गे जरासी जैसे लोकप्रिय गीतों की शानदार प्रस्तुतियां दीं। हर प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट और उत्साह के साथ उनका स्वागत किया। खचाखच भरे पांडाल में लोकसंगीत की सुरलहरियां देर रात तक गूंजती रहीं। यह संध्या न केवल सांस्कृतिक विरासत का उत्सव बनी बल्कि नयार घाटी की पहचान और समृद्ध लोकसंस्कृति के गौरव को भी नई ऊंचाई दे गई।