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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय का 12वां दीक्षांत समारोह मंगलवार को धूमधाम से सम्पन्न हुआ। कुलाधिपति डॉ.योगेंद्र नारायण की अध्यक्षता में उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का उद्घाटन किया। बारहवें दीक्षांत समारोह में 105 छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए जिनमें 50 विद्यार्थी सत्र

2022-24 तथा 55 छात्र-छात्राएं सत्र 2023-25 के शामिल रहे। इसके अतिरिक्त 177 पंजीकृत शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई, जबकि दोनों सत्रों में कुल 319 शोधार्थियों ने पीएचडी उपाधि प्राप्त की। वहीं इन दोनों सत्रों में कुल 6806 विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर उपाधियां प्रदान की गईं। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि विश्वविद्यालय वर्तमान कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह के नेतृत्व में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है जिसका प्रमाण इसकी नैक ग्रेडिंग है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को

राष्ट्रीयस्तर पर और अधिक पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास करने होंगे जिसमें राज्य सरकार हर आवश्यक सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह में सांस्कृतिक वेशभूषा को अपनाना एक सराहनीय पहल है जिससे छात्र-छात्राओं में संस्कृति और परंपरा के प्रति रुचि बढ़ती है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय में सुविधाओं के विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और अप्रैल माह में देश के उच्च शिक्षा मंत्री के साथ एनआईटी और गढ़वाल विश्वविद्यालय में कार्यक्रम प्रस्तावित किए जाएंगे। कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की

गतिविधियोंउपलब्धियों और आगामी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दीक्षांत शिक्षा का अंत नहीं बल्कि नए जीवन की शुरुआत है। डिग्री केवल कागज का टुकड़ा नहीं बल्कि विद्यार्थी की ताकत होती है। उन्होंने सभी दीक्षार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में ऐसे कार्य करें जिससे उनके माता-पिता गुरु विश्वविद्यालय और देश को उन पर गर्व हो तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें। इस अवसर पर देश के शिक्षा मंत्री का संदेश डॉ.विश्वेश वाग्मी द्वारा पढ़कर सुनाया गया जिसमें दीक्षार्थियों से भारत की विकास यात्रा में

सहभागीबनने का आह्वान किया गया। उन्होंने कहा कि छात्र अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग केवल निजी हितों तक सीमित न रखें बल्कि समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए भी करें। कुलाधिपति डॉ.योगेंद्र नारायण ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि छात्र-छात्राओं को अतीत के ज्ञान का अध्ययन करते हुए वर्तमान के आधुनिक और पारंपरिक ज्ञान के आधार पर नवाचार एवं विकास के लिए कार्य करना चाहिए तथा भविष्य की चुनौतियों के लिए स्वयं को तैयार करना।

चाहिए इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों द्वारा ग्रामीण एवं अभियांत्रिकी विभाग की शोध पत्रिका माउंटेन रिसर्च के विशेषांक का विमोचन किया गया। कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव अनीश उज्जमां ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया तथा समारोह के सफल आयोजन के लिए समन्वयक प्रो.हरभजन सिंह चौहान एवं

समस्तसमितियों को बधाई दी।इस अवसर पर श्रीनगर की महापौर आरती भंडारी सशस्त्र सीमा बल के डीआईजी सुभाष चंद्र नेगी प्रो.रामशंकर दुबे प्रो.मंजुला राणा प्रो.मोहन पंवार प्रो.एन.एस.पंवार अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो.ओ.पी.गुसाईं मुख्य नियंता प्रो.दीपक कुमार प्रो.अजीत नेगी प्रो.वाई.पी. रैवानी प्रो.डी.एस.नेगी प्रो.एम.एम.सेमवाल चौरास परिसर निदेशक प्रो.राजेंद्र सिंह नेगी छात्रावास अधीक्षक डॉ.एस.एस बिष्ट सहित कार्यकारी परिषद एवं अकादमिक परिषद के सदस्य संकायाध्यक्ष विभागाध्यक्ष शिक्षक छात्रसंघ पदाधिकारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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