प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हिमालय पुत्र स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा की 107वीं जयंती के अवसर पर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाल के बिड़ला परिसर स्थित एसीएल सभागार में स्मृति व्याख्यान का सफल आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम से पूर्व विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में स्थापित बहुगुणा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि एवं माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया गया। इसके बाद सभागार में दीप प्रज्वलन और प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के संयोजक एवं अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो.ओम प्रकाश गुसाईं ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की भूमिका प्रस्तुत की। इस अवसर पर डॉ.कपिल पंवार ने बहुगुणा के जीवन एवं उनके राजनीतिक और सामाजिक योगदान का विस्तृत परिचय देते हुए उनके व्यक्तित्व की बहुआयामी विशेषताओं को रेखांकित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कार्यवाहक कुलपति प्रो.एनएस पंवार ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता सोमवारी लाल उनियाल ने अपने संस्मरण साझा करते हुए बताया कि उनका पहला परिचय बहुगुणा से श्रीनगर में हुआ था। उन्होंने कहा कि बहुगुणा का व्यक्तित्व अत्यंत स्वाभिमानी था और वे अक्सर कहते थे कि पहाड़ गरीब नहीं है। उन्होंने एक सभा का उल्लेख करते हुए बताया कि बहुगुणा ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि हिमालय ने देश को पर्यावरण दिया है अब देश को भी हिमालय के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने बताया कि लगभग 17 वर्षों तक उनका बहुगुणा के साथ निकट जुड़ाव रहा। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने देखा कि उत्तराखंड के लिए अलग राज्य की अवधारणा बहुगुणा के चिंतन में प्रारंभ से ही मौजूद थी। उनके प्रयासों से एक ही राज्य में दो बजट की व्यवस्था कर पर्वतीय क्षेत्रों के विकास हेतु पृथक बजट की परिकल्पना साकार हुई। उन्होंने बहुगुणा को समाजवादी विचारधारा का सशक्त प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि उनके संघर्षों ने उनके व्यक्तित्व को उज्ज्वल बनाया और उन्हें जननायक के रूप में स्थापित किया। अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रो.एनएस पंवार ने कहा कि बहुगुणा केवल राजनेता नहीं बल्कि दूरदर्शी चिंतक और जननायक थे। उन्होंने शिक्षा सामाजिक न्याय एवं क्षेत्रीय संतुलन के लिए जो नीतिगत हस्तक्षेप किए वे आज भी प्रासंगिक हैं। संकाय अध्यक्ष नियुक्ति एवं प्रोन्नति प्रो.मोहन पंवार ने अपने वक्तव्य में बहुगुणा के पहाड़ से गहरे जुड़ाव को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने पर्वतीय समाज की समस्याओं को न केवल समझा बल्कि उन्हें नीतिगत प्राथमिकता दिलाने का ऐतिहासिक कार्य किया। उनके प्रयासों से पहाड़ की अस्मिता संसाधनों और विकास के प्रश्न राष्ट्रीय विमर्श में प्रमुखता से उभरे। कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन मुख्य छात्र सलाहकार प्रो.एमएम सेमवाल ने किया। उन्होंने कहा कि बहुगुणा केवल राजनेता नहीं बल्कि एक गहन विचारक थे। 1970 के दशक में उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए तथा उत्तराखंड में उच्च शिक्षा के विस्तार हेतु गढ़वाल और कुमाऊं विश्वविद्यालयों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ.राहुल बहुगुणा ने किया। इस अवसर पर साहित्यकार एवं पत्रकार प्रदीप डबराल प्रो.मंजुला राणा प्रो.मंजू गुसाईं प्रो.एमसी सती प्रो.बीपी नैथानी डॉ.अनुरागी डॉ.नितिन सती डॉ.अरुण शेखर बहुगुणा जनसम्पर्क अधिकारी आशुतोष बहुगुणा सहित विश्वविद्यालय के अनेक प्राध्यापक कर्मचारी शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हिमालय पुत्र स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा की 107वीं जयंती के अवसर पर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाल के बिड़ला परिसर स्थित एसीएल सभागार में स्मृति व्याख्यान का सफल आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम से पूर्व विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में स्थापित बहुगुणा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि एवं माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया गया। इसके बाद सभागार में दीप प्रज्वलन और प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के संयोजक एवं अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो.ओम प्रकाश गुसाईं ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की भूमिका प्रस्तुत की। इस अवसर पर डॉ.कपिल पंवार ने बहुगुणा के जीवन एवं उनके राजनीतिक और सामाजिक योगदान का विस्तृत परिचय देते हुए उनके व्यक्तित्व की बहुआयामी विशेषताओं को रेखांकित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कार्यवाहक कुलपति प्रो.एनएस पंवार ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता सोमवारी लाल उनियाल ने अपने संस्मरण साझा करते हुए बताया कि उनका पहला परिचय बहुगुणा से श्रीनगर में हुआ था। उन्होंने कहा कि बहुगुणा का व्यक्तित्व अत्यंत स्वाभिमानी था और वे अक्सर कहते थे कि पहाड़ गरीब नहीं है। उन्होंने एक सभा का उल्लेख करते हुए बताया कि बहुगुणा ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि हिमालय ने देश को पर्यावरण दिया है अब देश को भी हिमालय के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने बताया कि लगभग 17 वर्षों तक उनका बहुगुणा के साथ निकट जुड़ाव रहा। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने देखा कि उत्तराखंड के लिए अलग राज्य की अवधारणा बहुगुणा के चिंतन में प्रारंभ से ही मौजूद थी। उनके प्रयासों से एक ही राज्य में दो बजट की व्यवस्था कर पर्वतीय क्षेत्रों के विकास हेतु पृथक बजट की परिकल्पना साकार हुई। उन्होंने बहुगुणा को समाजवादी विचारधारा का सशक्त प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि उनके संघर्षों ने उनके व्यक्तित्व को उज्ज्वल बनाया और उन्हें जननायक के रूप में स्थापित किया। अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रो.एनएस पंवार ने कहा कि बहुगुणा केवल राजनेता नहीं बल्कि दूरदर्शी चिंतक और जननायक थे। उन्होंने शिक्षा सामाजिक न्याय एवं क्षेत्रीय संतुलन के लिए जो नीतिगत हस्तक्षेप किए वे आज भी प्रासंगिक हैं। संकाय अध्यक्ष नियुक्ति एवं प्रोन्नति प्रो.मोहन पंवार ने अपने वक्तव्य में बहुगुणा के पहाड़ से गहरे जुड़ाव को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने पर्वतीय समाज की समस्याओं को न केवल समझा बल्कि उन्हें नीतिगत प्राथमिकता दिलाने का ऐतिहासिक कार्य किया। उनके प्रयासों से पहाड़ की अस्मिता संसाधनों और विकास के प्रश्न राष्ट्रीय विमर्श में प्रमुखता से उभरे। कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन मुख्य छात्र सलाहकार प्रो.एमएम सेमवाल ने किया। उन्होंने कहा कि बहुगुणा केवल राजनेता नहीं बल्कि एक गहन विचारक थे। 1970 के दशक में उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए तथा उत्तराखंड में उच्च शिक्षा के विस्तार हेतु गढ़वाल और कुमाऊं विश्वविद्यालयों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ.राहुल बहुगुणा ने किया। इस अवसर पर साहित्यकार एवं पत्रकार प्रदीप डबराल प्रो.मंजुला राणा प्रो.मंजू गुसाईं प्रो.एमसी सती प्रो.बीपी नैथानी डॉ.अनुरागी डॉ.नितिन सती डॉ.अरुण शेखर बहुगुणा जनसम्पर्क अधिकारी आशुतोष बहुगुणा सहित विश्वविद्यालय के अनेक प्राध्यापक कर्मचारी शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।