प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। चमोली जनपद के सलूड-डूंगरा गांव में विश्व प्रसिद्ध सांस्कृतिक धरोहर रम्माण मेले का भव्य आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचे। रामायण की कथा और पारंपरिक मुखौटा शैली पर आधारित इस अनूठे लोकनाट्य ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में जिलाधिकारी गौरव कुमार और पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार मुख्य रूप से उपस्थित रहे। आयोजन समिति के संरक्षक कुशल सिंह भंडारी और सचिव भरत सिंह कुंवर ने अतिथियों का स्वागत किया। अधिकारियों ने व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए स्थानीय संस्कृति के संरक्षण की सराहना की। रम्माण मेला अपनी विशिष्ट प्रस्तुति के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। इसमें भोजपत्र से बने 18 प्रकार के मुखौटों का उपयोग किया जाता है जो पारंपरिक शिल्प का प्रतीक हैं। पूरा आयोजन 12 ढोल 12 दमाऊ 18 ताल और 8 भंकोरों की थाप पर आधारित रहा जिससे वातावरण भक्तिमय बना रहा। मेले के दौरान राम जन्म वनगमन स्वर्ण मृग वध सीता हरण और लंका दहन जैसे प्रसंगों का जीवंत मंचन किया गया जिसने दर्शकों को आकर्षित किया। वर्ष 2009 में रम्माण को यूनेस्को द्वारा विश्व सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा दिया गया था। यह आयोजन स्थानीय आराध्य भूम्याल देवता को समर्पित है और लोक संस्कृति के संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम है। मेले के दौरान चमोली पुलिस द्वारा सुरक्षा और यातायात के व्यापक इंतजाम किए गए जिससे आयोजन शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ। इस अवसर पर आईटीबीपी के महानिरीक्षक अखिलेख रावत विधायक बद्रीनाथ लखपत बुटोला राज्यमंत्री हरक सिंह नेगी नगर पालिका अध्यक्ष ज्योतिर्मठ देवेश्वरी शाह ब्लॉक प्रमुख ज्योतिर्मठ अनूप नेगी आईटीबीपी कमांडेंट रतन सिंह सोनाल पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
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प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। चमोली जनपद के सलूड-डूंगरा गांव में विश्व प्रसिद्ध सांस्कृतिक धरोहर रम्माण मेले का भव्य आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचे। रामायण की कथा और पारंपरिक मुखौटा शैली पर आधारित इस अनूठे लोकनाट्य ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में जिलाधिकारी गौरव कुमार और पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार मुख्य रूप से उपस्थित रहे। आयोजन समिति के संरक्षक कुशल सिंह भंडारी और सचिव भरत सिंह कुंवर ने अतिथियों का स्वागत किया। अधिकारियों ने व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए स्थानीय संस्कृति के संरक्षण की सराहना की। रम्माण मेला अपनी विशिष्ट प्रस्तुति के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। इसमें भोजपत्र से बने 18 प्रकार के मुखौटों का उपयोग किया जाता है जो पारंपरिक शिल्प का प्रतीक हैं। पूरा आयोजन 12 ढोल 12 दमाऊ 18 ताल और 8 भंकोरों की थाप पर आधारित रहा जिससे वातावरण भक्तिमय बना रहा। मेले के दौरान राम जन्म वनगमन स्वर्ण मृग वध सीता हरण और लंका दहन जैसे प्रसंगों का जीवंत मंचन किया गया जिसने दर्शकों को आकर्षित किया। वर्ष 2009 में रम्माण को यूनेस्को द्वारा विश्व सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा दिया गया था। यह आयोजन स्थानीय आराध्य भूम्याल देवता को समर्पित है और लोक संस्कृति के संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम है। मेले के दौरान चमोली पुलिस द्वारा सुरक्षा और यातायात के व्यापक इंतजाम किए गए जिससे आयोजन शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ। इस अवसर पर आईटीबीपी के महानिरीक्षक अखिलेख रावत विधायक बद्रीनाथ लखपत बुटोला राज्यमंत्री हरक सिंह नेगी नगर पालिका अध्यक्ष ज्योतिर्मठ देवेश्वरी शाह ब्लॉक प्रमुख ज्योतिर्मठ अनूप नेगी आईटीबीपी कमांडेंट रतन सिंह सोनाल पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग उपस्थित रहे।