प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जनपद में कीर्तिखाल गांव की पहाड़ियों में लैंसडाउन के निकट स्थित भैरवगढ़ी मंदिर एक प्रसिद्ध धार्मिक और प्राकृतिक स्थल है। यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 2400 मीटर की ऊँचाई पर पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए कीर्तिखाल से करीब 2 से 2.5 किलोमीटर का ट्रैक करना पड़ता है जो घने जंगलों और सुंदर पहाड़ी दृश्यों से होकर गुजरता है। इस मार्ग में 360 डिग्री में पर्वत श्रृंखलाओं और घाटियों का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है जो इसे खास बनाता है। यह मंदिर भगवान शिव के 14वें अवतार काल भैरव को समर्पित है जिन्हें गढ़वाल क्षेत्र का रक्षक और द्वारपाल माना जाता है। यहां काल नाथ भैरव देवता की नियमित पूजा-अर्चना की जाती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार देवता को काले रंग की वस्तुएं प्रिय होती हैं इसलिए प्रसाद के रूप में मंडुवा का विशेष महत्व है। ऐतिहासिक रूप से भी यह स्थान महत्वपूर्ण माना जाता है। भैरवगढ़ को गढ़वाल के प्राचीन 52 गढ़ों में शामिल किया जाता है और इसे पहले लंगूर गढ़ के नाम से जाना जाता था। आस्था और रोमांच का संगम प्रस्तुत करने वाला यह स्थल मानसून के दौरान और भी आकर्षक हो जाता है जब यहां से हिमालय की चोटियों और हरियाली से भरे दृश्य अत्यंत मनमोहक नजर आते हैं।
Spread the love
प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जनपद में कीर्तिखाल गांव की पहाड़ियों में लैंसडाउन के निकट स्थित भैरवगढ़ी मंदिर एक प्रसिद्ध धार्मिक और प्राकृतिक स्थल है। यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 2400 मीटर की ऊँचाई पर पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए कीर्तिखाल से करीब 2 से 2.5 किलोमीटर का ट्रैक करना पड़ता है जो घने जंगलों और सुंदर पहाड़ी दृश्यों से होकर गुजरता है। इस मार्ग में 360 डिग्री में पर्वत श्रृंखलाओं और घाटियों का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है जो इसे खास बनाता है। यह मंदिर भगवान शिव के 14वें अवतार काल भैरव को समर्पित है जिन्हें गढ़वाल क्षेत्र का रक्षक और द्वारपाल माना जाता है। यहां काल नाथ भैरव देवता की नियमित पूजा-अर्चना की जाती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार देवता को काले रंग की वस्तुएं प्रिय होती हैं इसलिए प्रसाद के रूप में मंडुवा का विशेष महत्व है। ऐतिहासिक रूप से भी यह स्थान महत्वपूर्ण माना जाता है। भैरवगढ़ को गढ़वाल के प्राचीन 52 गढ़ों में शामिल किया जाता है और इसे पहले लंगूर गढ़ के नाम से जाना जाता था। आस्था और रोमांच का संगम प्रस्तुत करने वाला यह स्थल मानसून के दौरान और भी आकर्षक हो जाता है जब यहां से हिमालय की चोटियों और हरियाली से भरे दृश्य अत्यंत मनमोहक नजर आते हैं।