प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाल के भौतिकी विभाग स्थित हिमालयी वातावरणीय एवं अंतरिक्ष भौतिकी शोध प्रयोगशाला द्वारा जारी तीसरे वायु गुणवत्ता बुलेटिन में श्रीनगर गढ़वाल की वायु गुणवत्ता में हाल के दिनों में हुए महत्वपूर्ण बदलावों का वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। शोध में सामने आया है कि हाल में हुई वर्षा तापमान में गिरावट और वातावरण में बढ़ी नमी के कारण क्षेत्र की वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। यह अध्ययन डॉ.आलोक सागर गौतम और उनकी शोध टीम अमनदीप विश्वकर्मा अंकित कुमार और सरस्वती रावत द्वारा किया गया। शोध टीम ने वर्तमान मौसमीय परिवर्तन जंगलों में लगी आग बायोमास बर्निंग और ब्लैक कार्बन के प्रभावों का विस्तृत अध्ययन किया। भौतिकी विभाग के चौरास परिसर में 07 मई 2026 को दोपहर 12:45 बजे वर्तमान मौसमीय परिवर्तन एवं वायु गुणवत्ता का तीसरा बुलेटिन जारी किया गया। बुलेटिन में बताया गया कि 30 अप्रैल 2026 को श्रीनगर गढ़वाल का वायु गुणवत्ता सूचकांक लगभग 239.52 दर्ज किया गया था जो खराब श्रेणी में आता है। इसके बाद मौसम में बदलाव होने लगा और प्रदूषण स्तर में लगातार कमी देखी गई। 01 मई को एक्यूआई 145, 02 मई को 124.41 और 03 मई को घटकर 80 तक पहुंच गया जिससे वायु गुणवत्ता संतोषजनक श्रेणी में आ गई। 04 से 07 मई के बीच एक्यूआई 90 से 104 के बीच दर्ज किया गया जो संतोषजनक से मध्यम श्रेणी को दर्शाता है। शोध के अनुसार 01 और 02 मई को अधिकतम तापमान लगभग 32 डिग्री सेल्सियस था लेकिन 03 मई के बाद इसमें गिरावट आई और तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया। इसी दौरान वातावरण में नमी बढ़ी और 03 मई को औसत आर्द्रता लगभग 83 प्रतिशत दर्ज की गई। कई दिनों में आर्द्रता 90 प्रतिशत से अधिक रही। अध्ययन में यह भी सामने आया कि 02 मई को लगभग 9.9 मिलीमीटर वर्षा हुई जबकि 03 04 और 05 मई को भी हल्की बारिश दर्ज की गई। वैज्ञानिकों के अनुसार वर्षा और बढ़ी हुई नमी ने वातावरण में मौजूद सूक्ष्म प्रदूषक कणों को नीचे बैठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार हुआ। शोध के दौरान बायोमास बर्निंग और ब्लैक कार्बन के आंकड़ों का भी अध्ययन किया गया। 30 अप्रैल को बायोमास बर्निंग का औसत लगभग 47.84 प्रतिशत और ब्लैक कार्बन की औसत सांद्रता 640.74 नैनोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई। 02 मई को ब्लैक कार्बन का स्तर बढ़कर 778.36 नैनोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया जो स्थानीय दहन गतिविधियों के प्रभाव को दर्शाता है। हालांकि 03 मई के बाद ब्लैक कार्बन में कमी दर्ज की गई। शोधकर्ताओं के अनुसार जंगलों की आग सूखी वनस्पतियों के दहन और स्थानीय बायोमास बर्निंग गतिविधियों ने पिछले दिनों वायु गुणवत्ता को प्रभावित किया था लेकिन मई के पहले सप्ताह में बदले मौसम ने प्रदूषण को कम करने में सहायता की। शोध टीम ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में वनाग्नि स्थानीय प्रदूषण और बढ़ते तापमान पर लगातार निगरानी बनाए रखना जरूरी है क्योंकि भविष्य में ये कारक फिर से वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। अध्ययन में यह भी चेतावनी दी गई कि जलवायु परिवर्तन वनाग्नि और स्थानीय प्रदूषण के संयुक्त प्रभाव आने वाले समय में पर्वतीय क्षेत्रों की वायु गुणवत्ता और मानव स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। इसलिए वैज्ञानिक निगरानी जनजागरूकता वनाग्नि नियंत्रण और सतत पर्यावरणीय प्रबंधन की दिशा में समन्वित प्रयास बेहद आवश्यक हैं।
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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाल के भौतिकी विभाग स्थित हिमालयी वातावरणीय एवं अंतरिक्ष भौतिकी शोध प्रयोगशाला द्वारा जारी तीसरे वायु गुणवत्ता बुलेटिन में श्रीनगर गढ़वाल की वायु गुणवत्ता में हाल के दिनों में हुए महत्वपूर्ण बदलावों का वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। शोध में सामने आया है कि हाल में हुई वर्षा तापमान में गिरावट और वातावरण में बढ़ी नमी के कारण क्षेत्र की वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। यह अध्ययन डॉ.आलोक सागर गौतम और उनकी शोध टीम अमनदीप विश्वकर्मा अंकित कुमार और सरस्वती रावत द्वारा किया गया। शोध टीम ने वर्तमान मौसमीय परिवर्तन जंगलों में लगी आग बायोमास बर्निंग और ब्लैक कार्बन के प्रभावों का विस्तृत अध्ययन किया। भौतिकी विभाग के चौरास परिसर में 07 मई 2026 को दोपहर 12:45 बजे वर्तमान मौसमीय परिवर्तन एवं वायु गुणवत्ता का तीसरा बुलेटिन जारी किया गया। बुलेटिन में बताया गया कि 30 अप्रैल 2026 को श्रीनगर गढ़वाल का वायु गुणवत्ता सूचकांक लगभग 239.52 दर्ज किया गया था जो खराब श्रेणी में आता है। इसके बाद मौसम में बदलाव होने लगा और प्रदूषण स्तर में लगातार कमी देखी गई। 01 मई को एक्यूआई 145, 02 मई को 124.41 और 03 मई को घटकर 80 तक पहुंच गया जिससे वायु गुणवत्ता संतोषजनक श्रेणी में आ गई। 04 से 07 मई के बीच एक्यूआई 90 से 104 के बीच दर्ज किया गया जो संतोषजनक से मध्यम श्रेणी को दर्शाता है। शोध के अनुसार 01 और 02 मई को अधिकतम तापमान लगभग 32 डिग्री सेल्सियस था लेकिन 03 मई के बाद इसमें गिरावट आई और तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया। इसी दौरान वातावरण में नमी बढ़ी और 03 मई को औसत आर्द्रता लगभग 83 प्रतिशत दर्ज की गई। कई दिनों में आर्द्रता 90 प्रतिशत से अधिक रही। अध्ययन में यह भी सामने आया कि 02 मई को लगभग 9.9 मिलीमीटर वर्षा हुई जबकि 03 04 और 05 मई को भी हल्की बारिश दर्ज की गई। वैज्ञानिकों के अनुसार वर्षा और बढ़ी हुई नमी ने वातावरण में मौजूद सूक्ष्म प्रदूषक कणों को नीचे बैठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार हुआ। शोध के दौरान बायोमास बर्निंग और ब्लैक कार्बन के आंकड़ों का भी अध्ययन किया गया। 30 अप्रैल को बायोमास बर्निंग का औसत लगभग 47.84 प्रतिशत और ब्लैक कार्बन की औसत सांद्रता 640.74 नैनोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई। 02 मई को ब्लैक कार्बन का स्तर बढ़कर 778.36 नैनोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया जो स्थानीय दहन गतिविधियों के प्रभाव को दर्शाता है। हालांकि 03 मई के बाद ब्लैक कार्बन में कमी दर्ज की गई। शोधकर्ताओं के अनुसार जंगलों की आग सूखी वनस्पतियों के दहन और स्थानीय बायोमास बर्निंग गतिविधियों ने पिछले दिनों वायु गुणवत्ता को प्रभावित किया था लेकिन मई के पहले सप्ताह में बदले मौसम ने प्रदूषण को कम करने में सहायता की। शोध टीम ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में वनाग्नि स्थानीय प्रदूषण और बढ़ते तापमान पर लगातार निगरानी बनाए रखना जरूरी है क्योंकि भविष्य में ये कारक फिर से वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। अध्ययन में यह भी चेतावनी दी गई कि जलवायु परिवर्तन वनाग्नि और स्थानीय प्रदूषण के संयुक्त प्रभाव आने वाले समय में पर्वतीय क्षेत्रों की वायु गुणवत्ता और मानव स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। इसलिए वैज्ञानिक निगरानी जनजागरूकता वनाग्नि नियंत्रण और सतत पर्यावरणीय प्रबंधन की दिशा में समन्वित प्रयास बेहद आवश्यक हैं।