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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ऐतिहासिक साबित हो रही हेमवती नंदन बहुगुणा बेस अस्पताल श्रीनगर की अत्याधुनिक कैथ लैब ने शुक्रवार देर रात एक और मरीज को नया जीवन दिया। दिनभर चार गंभीर हृदय रोगियों का सफल उपचार करने के बाद देर रात पहुंची एक महिला की भी सफल एंजियोप्लास्टी कर चिकित्सकों ने उसकी जान बचाई। रुद्रप्रयाग जिले के चन्द्रापुरी क्षेत्र की 45 वर्षीय महिला चोपता-फलासी क्षेत्र में एक देवकार्य में शामिल होने गई थी। इसी दौरान अचानक उसके सीने में तेज दर्द उठा और हालत बिगड़ने लगी। परिजन तुरंत महिला को चोपता अस्पताल ले गए जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग रेफर किया गया। वहां जांच के दौरान हार्ट अटैक के संकेत मिलने पर चिकित्सकों ने बिना देर किए महिला को श्रीनगर बेस अस्पताल भेज दिया। शाम करीब सात बजे महिला बेस अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंची। यहां मौजूद चिकित्सकों ने गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल उसे कैथ लैब में शिफ्ट किया। जांचों के बाद वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ.अमर उपाध्याय और उनकी विशेषज्ञ टीम ने देर रात महिला की सफल एंजियोप्लास्टी कर उसकी जान बचा ली। महिला के परिजनों ने भावुक होकर बताया कि यदि श्रीनगर में यह सुविधा उपलब्ध नहीं होती तो उन्हें इलाज के लिए देहरादून जाना पड़ता जिससे कीमती समय बर्बाद होता और खतरा बढ़ सकता था। उन्होंने कहा कि बेस अस्पताल में ही समय पर बेहतर उपचार मिलने से परिवार को बड़ी राहत मिली है। खास बात यह रही कि पूरा इलाज आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क हुआ। डॉ.अमर उपाध्याय ने बताया कि पहले दिन चार मरीजों की सफल एंजियोप्लास्टी और एक मरीज को पेसमेकर लगाया गया था। देर रात महिला के पहुंचने पर तुरंत उपचार कर उसकी जान बचाई गई। शनिवार को भी अस्पताल की ओपीडी में 25 से अधिक हृदय रोगियों ने स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इस दौरान चिकित्सकीय टीम में मेडिसिन विभाग के डॉ.विनोद तिवारी डॉ.गीतांशु कपूर टेक्नीशियन शिव चरण दिनेश सूरज तथा नर्सिंग अधिकारी ज्ञानेंद्र अमित आकाश गीता मनोज और सनी मरीज सहायता एवं जनसंपर्क केंद्र के पीआरओ पंकज नौटियाल शामिल रहे। पहाड़ों में गंभीर मरीजों के लिए गोल्डन ऑवर बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे मामलों में समय पर उपचार मिलना ही मरीज की जिंदगी बचाने का सबसे बड़ा आधार बनता है। कैथ लैब ने शुरुआत के पहले ही दिन यह साबित कर दिया है कि अब गढ़वाल क्षेत्र में भी आपात हृदय उपचार तेजी और दक्षता के साथ उपलब्ध कराया जा सकता है। मेडिकल कॉलेज का प्रयास रहेगा कि भविष्य में यहां और अधिक विशेषज्ञ सेवाएं शुरू हों ताकि दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों के मरीजों को अपने ही क्षेत्र में बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। डॉ.आशुतोष सयाना प्राचार्य मेडिकल कॉलेज श्रीनगर पहाड़ में बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा महिलाएं भी तेजी से हो रहीं प्रभावित श्रीनगर अस्पताल श्रीनगर की कैथ लैब में जिन पांच गंभीर हार्ट मरीजों का सफल उपचार हुआ उनमें दो पुरुष और तीन महिलाएं शामिल रहीं। यह आंकड़ा पहाड़ों में बदलती जीवनशैली और बढ़ते हृदय रोगों की चिंता को भी सामने ला रहा है। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ.अमर उपाध्याय ने कहा कि पहले हृदय रोगों को पुरुषों से जोड़कर देखा जाता था लेकिन अब महिलाएं भी तेजी से हार्ट अटैक की चपेट में आ रही हैं। तनाव अनियमित दिनचर्या उच्च रक्तचाप मधुमेह और समय पर जांच न होना इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। रुद्रप्रयाग की महिला हो या चमोली की मरीज समय पर इलाज मिलने से सभी को नया जीवन मिला। बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने और शुरुआती जांच बेहद जरूरी है।

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