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प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड में वनाग्नि की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए वन विभाग द्वारा लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में वन संरक्षक एवं नोडल फायर डॉ.विनय भार्गव ने मंगलवार को चमोली पहुंचकर वनाग्नि प्रबंधन की तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न वन प्रभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर वनाग्नि रोकथाम को लेकर की गई तैयारियों की समीक्षा की तथा जनपद में बनाए गए फायर क्रू स्टेशनों और वनाग्नि प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण भी किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने दिवंगत फायर वॉचर राजेन्द्र सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। चमोली के धनपुर स्थित वन विश्राम भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में डॉ.विनय भार्गव ने कहा कि वनाग्नि नियंत्रण में लगे फील्ड कार्मिकों की सुरक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कठिन एवं संवेदनशील क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए आवश्यक सुरक्षा उपकरण संचार साधन और समुचित समन्वय व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही वनाग्नि नियंत्रण कार्यों में लगे फायर वॉचर्स और फील्ड स्टाफ के मनोबल और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने पर भी जोर दिया। बैठक में फायर सीजन के दौरान विभिन्न वन प्रभागों में वनाग्नि की स्थिति विभागीय तैयारियों उपलब्ध संसाधनों नियंत्रण व्यवस्थाओं और फायर रिस्पॉन्स सिस्टम की प्रभावशीलता की समीक्षा की गई। बैठक में बद्रीनाथ वन प्रभाग केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग और अलकनंदा भूमि संरक्षण वन प्रभाग में बीते वर्षों में हुई वनाग्नि घटनाओं का भी विश्लेषण किया गया। इस दौरान बीते तीन वर्षों में हुई वनाग्नि घटनाओं का वर्षवार विवरण फायर प्लान के तहत प्रस्तावित और प्राप्त बजट की स्थिति, बीते 15 दिनों में प्राप्त वनाग्नि घटनाओं का विश्लेषण तथा पिछले पांच वर्षों में 15 मई से 31 मई के बीच हुई वनाग्नि घटनाओं का ब्यौरा प्रस्तुत किया गया। बैठक में वर्ष 2026 में प्राप्त कुल फायर अलर्ट वास्तविक और फॉल्स अलर्ट की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही वर्किंग प्लान वर्किंग स्कीम और मैनेजमेंट प्लान में वनाग्नि न्यूनीकरण के लिए किए गए प्रावधानों की समीक्षा की गई। वर्ष 2026 में वनाग्नि से संबंधित पंजीकृत वन अपराध मामलों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए गए कि वनाग्नि नियंत्रण एवं रोकथाम संबंधी गतिविधियों में विभागीय उपस्थिति फील्ड स्तर पर प्रभावी रूप से दिखाई देनी चाहिए। संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त सतत निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही फायर अलर्ट मिलने पर तत्काल प्रतिक्रिया और समयबद्ध नियंत्रण कार्रवाई सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक के बाद वन संरक्षक एवं नोडल फायर डॉ.विनय भार्गव ने चमोली के विभिन्न फायर क्रू स्टेशनों और वनाग्नि प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उपलब्ध संसाधनों संचार व्यवस्था अग्निशमन उपकरणों अभिलेखों और फायर रिस्पॉन्स प्रणाली का परीक्षण किया गया। इस अवसर पर फायर वॉचर्स और फील्ड स्टाफ से संवाद कर वनाग्नि नियंत्रण कार्यों की वर्तमान स्थिति फील्ड स्तर पर आने वाली चुनौतियों और आवश्यकताओं की जानकारी प्राप्त की गई। साथ ही 20 मई को चमोली में हुई वनाग्नि की घटना के घटनास्थल का भी निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान दिवंगत फायर वॉचर राजेन्द्र सिंह द्वारा वनाग्नि नियंत्रण कार्यों में प्रदर्शित कर्तव्यनिष्ठा साहस और समर्पण को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर प्रभागीय वनाधिकारी प्रियंका सुंडली उप प्रभागीय वनाधिकारी विकास दरमोडा उप प्रभागीय वनाधिकारी जुगल किशोर वन क्षेत्राधिकारी नवल किशोर सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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