प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। वार्ड संख्या-40 के पार्षद संदीप रावत और नगर निगम श्रीनगर के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बीच विवाद गहरा गया है। पार्षद द्वारा निगम कर्मचारियों पर लगाए गए आरोपों के विरोध में शनिवार को निगम के अधिकारी और कर्मचारी एकजुट होकर धरने पर बैठ गए तथा पार्षद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। कर्मचारियों ने महापौर आरती भंडारी और नगर आयुक्त नुपुर वर्मा को दिए ज्ञापन में आरोप लगाया कि पार्षद संदीप रावत ने 25 मई को जिलाधिकारी के जनता दरबार में निगम कार्मिकों के खिलाफ बेबुनियाद और निराधार शिकायतें कर उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया है। कर्मचारियों का कहना है कि वे जनहित में कई बार कार्यालय समय के बाद भी कार्य करते हैं लेकिन उनकी कार्यशैली पर अनर्गल आरोप लगाए गए। विवाद बढ़ने के बाद महापौर आरती भंडारी ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित कर दी है। समिति में वरिष्ठ पार्षद शंकर मणि मिश्रा दिनेश पटवाल और प्रवेश चमोली के साथ सहायक नगर आयुक्त रविराज बंगारी तथा गायत्री बिष्ट को शामिल किया गया है। समिति को जल्द जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट महापौर और नगर आयुक्त को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। महापौर आरती भंडारी और नगर आयुक्त नुपुर वर्मा ने कर्मचारियों और अधिकारियों को समझाने का प्रयास किया। कई घंटों बाद कर्मचारियों ने अपना धरना स्थगित कर दिया लेकिन कर्मचारी अपनी मांग पर अड़े रहे। कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा कि जब तक पार्षद संदीप रावत सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते तब तक उनके वार्ड में किसी भी प्रकार के कार्य में अधिकारी और कर्मचारी सहयोग नहीं करेंगे। कर्मचारियों का आरोप है कि पार्षद लगातार आरटीआई के माध्यम से कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बनाते हैं जबकि निगम कर्मचारी अवकाश के दिनों में भी कार्यालय पहुंचकर कार्यों का निस्तारण करते हैं। इसके बावजूद उन पर लगाए गए आरोपों ने पूरे कर्मचारी वर्ग को आहत किया है। धरने में सहायक नगर आयुक्त रविराज बंगारी गायत्री बिष्ट मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक शशि पंवार अधिशासी अभियंता पवन कोठियाल कनिष्ठ अभियंता सूरज सफाई कर्मचारियों के हेड दाताराम श्यामलाल राजेश कुमार संजीव कुमार लिपिक भूपेन्द्र अमरजीत बी.एल.शाह सुनीता जोशी वंदना शिवानी सहित निगम के अधिकारी और बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई और पार्षद द्वारा सार्वजनिक माफी नहीं मांगी गई तो भविष्य में आंदोलन को और उग्र किया जा सकता है।
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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। वार्ड संख्या-40 के पार्षद संदीप रावत और नगर निगम श्रीनगर के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बीच विवाद गहरा गया है। पार्षद द्वारा निगम कर्मचारियों पर लगाए गए आरोपों के विरोध में शनिवार को निगम के अधिकारी और कर्मचारी एकजुट होकर धरने पर बैठ गए तथा पार्षद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। कर्मचारियों ने महापौर आरती भंडारी और नगर आयुक्त नुपुर वर्मा को दिए ज्ञापन में आरोप लगाया कि पार्षद संदीप रावत ने 25 मई को जिलाधिकारी के जनता दरबार में निगम कार्मिकों के खिलाफ बेबुनियाद और निराधार शिकायतें कर उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया है। कर्मचारियों का कहना है कि वे जनहित में कई बार कार्यालय समय के बाद भी कार्य करते हैं लेकिन उनकी कार्यशैली पर अनर्गल आरोप लगाए गए। विवाद बढ़ने के बाद महापौर आरती भंडारी ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित कर दी है। समिति में वरिष्ठ पार्षद शंकर मणि मिश्रा दिनेश पटवाल और प्रवेश चमोली के साथ सहायक नगर आयुक्त रविराज बंगारी तथा गायत्री बिष्ट को शामिल किया गया है। समिति को जल्द जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट महापौर और नगर आयुक्त को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। महापौर आरती भंडारी और नगर आयुक्त नुपुर वर्मा ने कर्मचारियों और अधिकारियों को समझाने का प्रयास किया। कई घंटों बाद कर्मचारियों ने अपना धरना स्थगित कर दिया लेकिन कर्मचारी अपनी मांग पर अड़े रहे। कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा कि जब तक पार्षद संदीप रावत सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते तब तक उनके वार्ड में किसी भी प्रकार के कार्य में अधिकारी और कर्मचारी सहयोग नहीं करेंगे। कर्मचारियों का आरोप है कि पार्षद लगातार आरटीआई के माध्यम से कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बनाते हैं जबकि निगम कर्मचारी अवकाश के दिनों में भी कार्यालय पहुंचकर कार्यों का निस्तारण करते हैं। इसके बावजूद उन पर लगाए गए आरोपों ने पूरे कर्मचारी वर्ग को आहत किया है। धरने में सहायक नगर आयुक्त रविराज बंगारी गायत्री बिष्ट मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक शशि पंवार अधिशासी अभियंता पवन कोठियाल कनिष्ठ अभियंता सूरज सफाई कर्मचारियों के हेड दाताराम श्यामलाल राजेश कुमार संजीव कुमार लिपिक भूपेन्द्र अमरजीत बी.एल.शाह सुनीता जोशी वंदना शिवानी सहित निगम के अधिकारी और बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई और पार्षद द्वारा सार्वजनिक माफी नहीं मांगी गई तो भविष्य में आंदोलन को और उग्र किया जा सकता है।