प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रदेश में स्थानीय उत्पादों महिला स्वरोजगार और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री की वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की सोच अब पहाड़ के गांवों में नई सफलता की कहानियां गढ़ रही है। जनपद पौड़ी गढ़वाल में ग्रामोत्थान परियोजना के अंतर्गत शुरू हुई एक अभिनव पहल ने माल्टा के बेकार समझे जाने वाले छिलकों को ग्रामीण महिलाओं की आय और रोजगार का नया माध्यम बना दिया है। उत्तराखंड के पहाड़ों में उगने वाला माल्टा लंबे समय से यहां की संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का हिस्सा रहा है। पहले इसका उपयोग केवल फल और जूस तक सीमित था जबकि प्रसंस्करण के बाद बचने वाले छिलकों को फेंक दिया जाता था। लेकिन अब यही छिलके वेस्ट टू वेल्थ मॉडल के तहत मूल्यवान हर्बल कॉस्मेटिक उत्पादों में बदले जा रहे हैं। जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया के निर्देशन में पौड़ी गढ़वाल में उमंग स्वायत्त सहकारिता द्वारा संचालित बेडू एवं फल प्रसंस्करण इकाई में ग्रामीण महिलाएं माल्टा पील फेस पैक फेस स्क्रब और हर्बल उबटन जैसे उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों के निर्माण में माल्टा के छिलकों के साथ मुल्तानी मिट्टी चंदन गुलाब पाउडर हल्दी बेसन और नीम जैसे प्राकृतिक अवयवों का उपयोग किया जा रहा है। यह उत्पाद पूरी तरह हर्बल और केमिकल-फ्री हैं जिनकी बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है। ग्रामोत्थान परियोजना के तकनीकी मार्गदर्शन में विकसित इन उत्पादों ने महिलाओं को गांव में ही स्वरोजगार का अवसर दिया है। पहले जो महिलाएं केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं आज वे उत्पाद निर्माण पैकेजिंग और विपणन से जुड़कर ग्रामीण उद्यमी के रूप में नई पहचान बना रही हैं। इससे महिलाओं की आय बढ़ने के साथ-साथ पलायन रोकने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी मदद मिल रही है। विशेषज्ञों के अनुसार माल्टा के छिलकों में विटामिन-सी एंटीऑक्सीडेंट और त्वचा के लिए लाभकारी कई प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं। यही कारण है कि सिट्रस आधारित स्किन केयर उत्पादों की मांग देश और विदेश में तेजी से बढ़ रही है। हिलांस जैसे स्थानीय ब्रांड के माध्यम से इन उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है जिससे उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पादों को नयी पहचान मिल रही है। ग्रामोत्थान परियोजना के जिला परियोजना प्रबंधक कुलदीप बिष्ट ने बताया कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप स्थानीय संसाधनों को आजीविका से जोड़ने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि माल्टा के छिलकों से तैयार हो रहे हर्बल कॉस्मेटिक उत्पाद महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार का मजबूत माध्यम बन रहे हैं तथा यह पहल भविष्य में उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। आज यह पहल केवल उत्पाद निर्माण तक सीमित नहीं है बल्कि महिला सशक्तिकरण स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में एक प्रेरणादायी सफलता की कहानी बन चुकी है।
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प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रदेश में स्थानीय उत्पादों महिला स्वरोजगार और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री की वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की सोच अब पहाड़ के गांवों में नई सफलता की कहानियां गढ़ रही है। जनपद पौड़ी गढ़वाल में ग्रामोत्थान परियोजना के अंतर्गत शुरू हुई एक अभिनव पहल ने माल्टा के बेकार समझे जाने वाले छिलकों को ग्रामीण महिलाओं की आय और रोजगार का नया माध्यम बना दिया है। उत्तराखंड के पहाड़ों में उगने वाला माल्टा लंबे समय से यहां की संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का हिस्सा रहा है। पहले इसका उपयोग केवल फल और जूस तक सीमित था जबकि प्रसंस्करण के बाद बचने वाले छिलकों को फेंक दिया जाता था। लेकिन अब यही छिलके वेस्ट टू वेल्थ मॉडल के तहत मूल्यवान हर्बल कॉस्मेटिक उत्पादों में बदले जा रहे हैं। जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया के निर्देशन में पौड़ी गढ़वाल में उमंग स्वायत्त सहकारिता द्वारा संचालित बेडू एवं फल प्रसंस्करण इकाई में ग्रामीण महिलाएं माल्टा पील फेस पैक फेस स्क्रब और हर्बल उबटन जैसे उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों के निर्माण में माल्टा के छिलकों के साथ मुल्तानी मिट्टी चंदन गुलाब पाउडर हल्दी बेसन और नीम जैसे प्राकृतिक अवयवों का उपयोग किया जा रहा है। यह उत्पाद पूरी तरह हर्बल और केमिकल-फ्री हैं जिनकी बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है। ग्रामोत्थान परियोजना के तकनीकी मार्गदर्शन में विकसित इन उत्पादों ने महिलाओं को गांव में ही स्वरोजगार का अवसर दिया है। पहले जो महिलाएं केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं आज वे उत्पाद निर्माण पैकेजिंग और विपणन से जुड़कर ग्रामीण उद्यमी के रूप में नई पहचान बना रही हैं। इससे महिलाओं की आय बढ़ने के साथ-साथ पलायन रोकने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी मदद मिल रही है। विशेषज्ञों के अनुसार माल्टा के छिलकों में विटामिन-सी एंटीऑक्सीडेंट और त्वचा के लिए लाभकारी कई प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं। यही कारण है कि सिट्रस आधारित स्किन केयर उत्पादों की मांग देश और विदेश में तेजी से बढ़ रही है। हिलांस जैसे स्थानीय ब्रांड के माध्यम से इन उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है जिससे उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पादों को नयी पहचान मिल रही है। ग्रामोत्थान परियोजना के जिला परियोजना प्रबंधक कुलदीप बिष्ट ने बताया कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप स्थानीय संसाधनों को आजीविका से जोड़ने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि माल्टा के छिलकों से तैयार हो रहे हर्बल कॉस्मेटिक उत्पाद महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार का मजबूत माध्यम बन रहे हैं तथा यह पहल भविष्य में उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। आज यह पहल केवल उत्पाद निर्माण तक सीमित नहीं है बल्कि महिला सशक्तिकरण स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में एक प्रेरणादायी सफलता की कहानी बन चुकी है।