प्रदीप कुमार
रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर जनपद की 47 चिकित्सा इकाइयों में विशेष स्वास्थ्य जांच एवं जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों में 356 गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व स्वास्थ्य जांच की गई तथा 39 उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उन्हें विशेष परामर्श और आवश्यक चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई गई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.राम प्रकाश के निर्देशन में जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अगस्त्यमुनि जखोली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ऊखीमठ तथा 43 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों सहित कुल 47 चिकित्सा इकाइयों में विशेष सत्र आयोजित किए गए। जांच के दौरान अगस्त्यमुनि विकासखंड में 150, जखोली में 110 तथा ऊखीमठ में 67 गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच की गई। इसके अलावा 34 गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड भी किए गए। स्वास्थ्य जांच के दौरान 39 उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान की गई। इनमें अगस्त्यमुनि विकासखंड की 21 जखोली की 12 तथा ऊखीमठ विकासखंड की 6 महिलाएं शामिल हैं। सभी को आवश्यक परामर्श देने के साथ बेहतर उपचार और निगरानी के लिए रेफर किया गया। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.सीमा टेकचंदानी ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान चिकित्सकों एएनएम और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। उन्हें नियमित स्वास्थ्य जांच कराने समय-समय पर अल्ट्रासाउंड कराने तथा उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था से जुड़े संभावित खतरों की जानकारी भी दी गई। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया तथा किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में तत्काल आशा कार्यकर्ता एएनएम अथवा निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने की सलाह दी गई। स्वास्थ्य विभाग ने सुरक्षित मातृत्व और स्वस्थ नवजात के लिए समय पर जांच और चिकित्सकीय परामर्श को अत्यंत आवश्यक बताया है।
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प्रदीप कुमार
रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर जनपद की 47 चिकित्सा इकाइयों में विशेष स्वास्थ्य जांच एवं जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों में 356 गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व स्वास्थ्य जांच की गई तथा 39 उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उन्हें विशेष परामर्श और आवश्यक चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई गई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.राम प्रकाश के निर्देशन में जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अगस्त्यमुनि जखोली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ऊखीमठ तथा 43 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों सहित कुल 47 चिकित्सा इकाइयों में विशेष सत्र आयोजित किए गए। जांच के दौरान अगस्त्यमुनि विकासखंड में 150, जखोली में 110 तथा ऊखीमठ में 67 गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच की गई। इसके अलावा 34 गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड भी किए गए। स्वास्थ्य जांच के दौरान 39 उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान की गई। इनमें अगस्त्यमुनि विकासखंड की 21 जखोली की 12 तथा ऊखीमठ विकासखंड की 6 महिलाएं शामिल हैं। सभी को आवश्यक परामर्श देने के साथ बेहतर उपचार और निगरानी के लिए रेफर किया गया। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.सीमा टेकचंदानी ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान चिकित्सकों एएनएम और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। उन्हें नियमित स्वास्थ्य जांच कराने समय-समय पर अल्ट्रासाउंड कराने तथा उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था से जुड़े संभावित खतरों की जानकारी भी दी गई। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया तथा किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में तत्काल आशा कार्यकर्ता एएनएम अथवा निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने की सलाह दी गई। स्वास्थ्य विभाग ने सुरक्षित मातृत्व और स्वस्थ नवजात के लिए समय पर जांच और चिकित्सकीय परामर्श को अत्यंत आवश्यक बताया है।