प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में रीप के अंतर्गत संचालित सामुदायिक उद्यम नई सफलता की कहानियां गढ़ रहे हैं। विकासखंड पोखरी के अंतर्गत माँ चंडीका सीएलएफ से संबद्ध नानक डेरा स्वयं सहायता समूह गिरसा द्वारा संचालित सीबीओ लेवल एंटरप्राइज (मुर्गी पालन इकाई) महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है। समूह की महिला सदस्य संगठित रूप से मुर्गी पालन का व्यवसाय संचालित कर रही हैं और स्थानीय बाजारों के साथ-साथ संस्थागत खरीदारों को भी गुणवत्तापूर्ण चिकन उपलब्ध करा रही हैं। महिलाओं की मेहनत और सामूहिक प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगा है। समूह ने हाल ही में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) को 520 किलोग्राम चिकन की आपूर्ति की। इस आपूर्ति से समूह को लगभग 68 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई जिससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। मुर्गी पालन इकाई के माध्यम से समूह की महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं। यह पहल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। रीप के अंतर्गत संचालित यह सामुदायिक उद्यम ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन रहा है और समूह आधारित आजीविका गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय सृजन का प्रभावी मॉडल प्रस्तुत कर रहा है।
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प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में रीप के अंतर्गत संचालित सामुदायिक उद्यम नई सफलता की कहानियां गढ़ रहे हैं। विकासखंड पोखरी के अंतर्गत माँ चंडीका सीएलएफ से संबद्ध नानक डेरा स्वयं सहायता समूह गिरसा द्वारा संचालित सीबीओ लेवल एंटरप्राइज (मुर्गी पालन इकाई) महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है। समूह की महिला सदस्य संगठित रूप से मुर्गी पालन का व्यवसाय संचालित कर रही हैं और स्थानीय बाजारों के साथ-साथ संस्थागत खरीदारों को भी गुणवत्तापूर्ण चिकन उपलब्ध करा रही हैं। महिलाओं की मेहनत और सामूहिक प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगा है। समूह ने हाल ही में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) को 520 किलोग्राम चिकन की आपूर्ति की। इस आपूर्ति से समूह को लगभग 68 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई जिससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। मुर्गी पालन इकाई के माध्यम से समूह की महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं। यह पहल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। रीप के अंतर्गत संचालित यह सामुदायिक उद्यम ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन रहा है और समूह आधारित आजीविका गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय सृजन का प्रभावी मॉडल प्रस्तुत कर रहा है।