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प्रदीप कुमार
टिहरी/श्रीनगर गढ़वाल। जिला अस्पताल बौराड़ी‌ नई टिहरी स्थित आयुर्वेदिक चिकित्सालय में उपचार प्राप्त करने वाली भारती चमोली ने आयुर्वेद चिकित्सा एवं पंचकर्म उपचार के माध्यम से आमवात (इन्फ्लेमेटरी अर्थराइटिस) जैसी गंभीर समस्या से उल्लेखनीय राहत प्राप्त की है। यह उपचार आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति की प्रभावशीलता का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया है। भारती चमोली पिछले कई वर्षों से दोनों घुटनों में तीव्र दर्द सूजन और अकड़न की समस्या से जूझ रही थीं। घुटनों को मोड़ने चलने-फिरने तथा दैनिक कार्य करने में उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। समय के साथ दर्द और सूजन बढ़ती जा रही थी जिससे उनके सामान्य जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। समस्या के समाधान के लिए उन्होंने जिला अस्पताल बौराड़ी स्थित आयुर्वेदिक चिकित्सालय में परामर्श लिया। चिकित्सकीय परीक्षण और विस्तृत जांच के बाद आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ.सिद्धि मिश्रा ने उन्हें आमवात से पीड़ित पाया। डॉ.सिद्धि मिश्रा ने बताया कि आमवात एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अपने ही जोड़ों के स्वस्थ ऊतकों को प्रभावित करने लगती है। इसके कारण जोड़ों में दर्द सूजन अकड़न और लालिमा जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। समय पर उपचार न मिलने पर यह समस्या जोड़ों को स्थायी क्षति भी पहुंचा सकती है। आयुर्वेदिक चिकित्सालय में भारती चमोली का समग्र और व्यवस्थित उपचार शुरू किया गया। उपचार में आयुर्वेदिक औषधियों के साथ पंचकर्म चिकित्सा की विशेष विधियों को भी शामिल किया गया। पंचकर्म सहायक द्वारा निर्धारित अवधि तक बालुका स्वेद और पत्र पोटली स्वेद उपचार प्रदान किया गया। उपचार के प्रथम चरण में सात दिनों तक बालुका स्वेद किया गया। इस प्रक्रिया में साफ और महीन रेत को सेंधा नमक के साथ गर्म कर सूती कपड़े की पोटली बनाई गई। इस सूखी सिकाई से जोड़ों में मौजूद सूजन भारीपन और जकड़न में कमी आई तथा दर्द में राहत मिलने लगी। इसके बाद 10 दिनों तक पत्र पोटली स्वेद उपचार दिया गया। इसमें निर्गुंडी अरंडी और सहजन जैसी औषधीय पत्तियों को विशेष औषधीय तेलों के साथ तैयार कर पोटली बनाई गई। प्रभावित जोड़ों पर इस पोटली से स्वेदन और मालिश करने से सूजन में उल्लेखनीय कमी आई दर्द नियंत्रित हुआ तथा घुटनों की गतिशीलता में सुधार होने लगा। उपचार की निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद भारती चमोली की स्थिति में स्पष्ट सुधार देखा गया। घुटनों की सूजन में कमी आई दर्द में काफी राहत मिली तथा घुटनों को मोड़ने और चलने-फिरने में पहले की अपेक्षा अधिक सहजता महसूस हुई। इससे उनकी दैनिक गतिविधियों में भी सकारात्मक परिवर्तन आया और जीवन की गुणवत्ता बेहतर हुई। भारती चमोली ने आयुर्वेदिक चिकित्सालय नई टिहरी की चिकित्सा सेवाओं पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि नियमित उपचार चिकित्सकीय मार्गदर्शन और पंचकर्म चिकित्सा के कारण उन्हें लंबे समय से चली आ रही समस्या से राहत मिली है। डॉ.सिद्धि मिश्रा के अनुसार उचित चिकित्सकीय परामर्श नियमित आयुर्वेदिक उपचार और पंचकर्म चिकित्सा के माध्यम से आमवात जैसे रोगों में प्रभावी लाभ प्राप्त किया जा सकता है तथा रोगियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने आमवात से संबंधित समस्याओं से जूझ रहे लोगों से आयुर्वेदिक चिकित्सालय में विशेषज्ञ परामर्श लेने की अपील की।

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