प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर में विश्वविद्यालय स्थापना आंदोलन के सूत्रधार प्रसिद्ध समाजसेवी स्वामी मन्मथन की आवक्ष प्रतिमा का अनावरण कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह द्वारा स्वामी मन्मथन प्रेक्षागृह के प्रांगण में किया गया। यह प्रतिमा प्रसिद्ध मूर्तिकार प्रो.अवतार सिंह पंवार द्वारा निर्मित की गई है जबकि इसे चन्द्रकुंवर बर्त्वाल शोध संस्थान के सचिव डॉ.योगम्बर सिंह बर्त्वाल द्वारा विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराया गया है। कार्यक्रम का आयोजन श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम के तत्वावधान में किया गया जो इस आश्रम की स्थापना करने वाले समाजसेवी डॉ.उदयमंगलम चन्द्रशेखरन मन्मथन मेनन (स्वामी मन्मथन) के जन्मदिवस के अवसर पर संपन्न हुआ। प्रतिमा अनावरण के बाद स्वामी मन्मथन प्रेक्षागृह में उनके जीवन एवं योगदान पर विचार गोष्ठी का आयोजन भी किया गया। इस अवसर पर कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि यह विश्वविद्यालय के लिए ऐतिहासिक क्षण है जब स्थापना आंदोलन के प्रमुख सूत्रधार स्वामी मन्मथन की प्रतिमा उसी परिसर में स्थापित की गई है जिसके लिए उन्होंने संघर्ष किया था। उन्होंने कहा कि इस तिथि को विश्वविद्यालय के कैलेंडर में सम्मिलित किया जाएगा और हर वर्ष इस दिन स्वामी मन्मथन पर आधारित विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कुलपति ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय उत्तराखंड की विभूतियों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बना रहा है जिसके तहत अगले सत्र से दो क्रेडिट का विशेष पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में देश के 21 राज्यों के विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। साथ ही गढ़वाली भाषा एवं संस्कृति संरक्षण केंद्र की स्थापना की गई है तथा लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के विस्तार की योजना पर कार्य चल रहा है। इसके लिए भारत सरकार से एक फैकल्टी की मांग भी की गई है। स्वामी मन्मथन के सहयोगी एवं श्रीनगर के पूर्व पालिकाध्यक्ष कृष्णानंद मैठाणी ने कहा कि देश में दो विश्वविद्यालय गढ़वाल विश्वविद्यालय और मराठवाड़ा विश्वविद्यालय जन आंदोलनों के परिणामस्वरूप स्थापित हुए जिसमें गढ़वाल विश्वविद्यालय आंदोलन का नेतृत्व स्वामी मन्मथन ने किया। उन्होंने इसे ऐतिहासिक जनांदोलन बताया। नंदा देवी राजजात समिति के सचिव भुवन नौटियाल ने कहा कि स्वामी मन्मथन का आंदोलन स्वतंत्रता पूर्व और पश्चात दोनों कालखंडों में अद्वितीय रहा। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन ने गढ़वाल की विभिन्न इकाइयों को एकजुट करने का कार्य किया और इसके परिणामस्वरूप पर्वतीय विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग पूरी हुई। भुवनेश्वरी महिला आश्रम के सचिव ज्ञान सिंह रावत ने कहा कि उन्हें बचपन से ही स्वामी मन्मथन का आशीर्वाद प्राप्त हुआ जिसके मार्गदर्शन में संस्था आज राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रही है। उन्होंने कहा कि आश्रम की मजबूत नींव स्वामी मन्मथन की ही देन है। कार्यक्रम में भारतीय वन सेवा के पूर्व अधिकारी प्रवीण थपलियाल सहित कई वक्ताओं ने भी विचार रखे। संचालन डॉ.जयप्रकाश पंवार ने किया। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो.वाई.पी.रैवानी अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो.ओ.पी.गुसांई विभिन्न विभागों के प्राध्यापक छात्रसंघ पदाधिकारी शोधार्थी सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के शिक्षक-कार्मिक उपस्थित रहे।
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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर में विश्वविद्यालय स्थापना आंदोलन के सूत्रधार प्रसिद्ध समाजसेवी स्वामी मन्मथन की आवक्ष प्रतिमा का अनावरण कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह द्वारा स्वामी मन्मथन प्रेक्षागृह के प्रांगण में किया गया। यह प्रतिमा प्रसिद्ध मूर्तिकार प्रो.अवतार सिंह पंवार द्वारा निर्मित की गई है जबकि इसे चन्द्रकुंवर बर्त्वाल शोध संस्थान के सचिव डॉ.योगम्बर सिंह बर्त्वाल द्वारा विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराया गया है। कार्यक्रम का आयोजन श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम के तत्वावधान में किया गया जो इस आश्रम की स्थापना करने वाले समाजसेवी डॉ.उदयमंगलम चन्द्रशेखरन मन्मथन मेनन (स्वामी मन्मथन) के जन्मदिवस के अवसर पर संपन्न हुआ। प्रतिमा अनावरण के बाद स्वामी मन्मथन प्रेक्षागृह में उनके जीवन एवं योगदान पर विचार गोष्ठी का आयोजन भी किया गया। इस अवसर पर कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि यह विश्वविद्यालय के लिए ऐतिहासिक क्षण है जब स्थापना आंदोलन के प्रमुख सूत्रधार स्वामी मन्मथन की प्रतिमा उसी परिसर में स्थापित की गई है जिसके लिए उन्होंने संघर्ष किया था। उन्होंने कहा कि इस तिथि को विश्वविद्यालय के कैलेंडर में सम्मिलित किया जाएगा और हर वर्ष इस दिन स्वामी मन्मथन पर आधारित विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कुलपति ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय उत्तराखंड की विभूतियों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बना रहा है जिसके तहत अगले सत्र से दो क्रेडिट का विशेष पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में देश के 21 राज्यों के विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। साथ ही गढ़वाली भाषा एवं संस्कृति संरक्षण केंद्र की स्थापना की गई है तथा लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के विस्तार की योजना पर कार्य चल रहा है। इसके लिए भारत सरकार से एक फैकल्टी की मांग भी की गई है। स्वामी मन्मथन के सहयोगी एवं श्रीनगर के पूर्व पालिकाध्यक्ष कृष्णानंद मैठाणी ने कहा कि देश में दो विश्वविद्यालय गढ़वाल विश्वविद्यालय और मराठवाड़ा विश्वविद्यालय जन आंदोलनों के परिणामस्वरूप स्थापित हुए जिसमें गढ़वाल विश्वविद्यालय आंदोलन का नेतृत्व स्वामी मन्मथन ने किया। उन्होंने इसे ऐतिहासिक जनांदोलन बताया। नंदा देवी राजजात समिति के सचिव भुवन नौटियाल ने कहा कि स्वामी मन्मथन का आंदोलन स्वतंत्रता पूर्व और पश्चात दोनों कालखंडों में अद्वितीय रहा। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन ने गढ़वाल की विभिन्न इकाइयों को एकजुट करने का कार्य किया और इसके परिणामस्वरूप पर्वतीय विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग पूरी हुई। भुवनेश्वरी महिला आश्रम के सचिव ज्ञान सिंह रावत ने कहा कि उन्हें बचपन से ही स्वामी मन्मथन का आशीर्वाद प्राप्त हुआ जिसके मार्गदर्शन में संस्था आज राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रही है। उन्होंने कहा कि आश्रम की मजबूत नींव स्वामी मन्मथन की ही देन है। कार्यक्रम में भारतीय वन सेवा के पूर्व अधिकारी प्रवीण थपलियाल सहित कई वक्ताओं ने भी विचार रखे। संचालन डॉ.जयप्रकाश पंवार ने किया। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो.वाई.पी.रैवानी अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो.ओ.पी.गुसांई विभिन्न विभागों के प्राध्यापक छात्रसंघ पदाधिकारी शोधार्थी सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के शिक्षक-कार्मिक उपस्थित रहे।