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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के उच्च शिखरीय पादप कार्यिकी शोध केंद्र (हैप्रेक) द्वारा तैयार की गई उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाने वाली दुर्लभ औषधीय एवं सगंध पादपों के कृषिकरण पर आधारित कृषक मार्गदर्शिका का विमोचन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने किया। यह मार्गदर्शिका हिमालयी क्षेत्रों के किसानों शोधार्थियों एवं औषधीय पादपों से जुड़े उद्यमियों के लिए उपयोगी मानी जा रही है। कृषक मार्गदर्शिका का लेखन हैप्रेक के निदेशक डॉ.विजयकांत पुरोहित के नेतृत्व में डॉ.प्रदीप डोभाल डॉ.जयदेव चौहान डॉ.बबीता पाटनी डॉ.विजय लक्ष्मी एवं डॉ.सुदीप चंद्र द्वारा किया गया है। पुस्तक के लेखन एवं प्रूफ रीडिंग में डॉ. राजीव वशिष्ठ और कमलेश पंत ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मार्गदर्शिका में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाने वाली संकटग्रस्त औषधीय एवं सगंध पादप प्रजातियों की वैज्ञानिक खेती संरक्षण संवर्धन तथा उनके बाजारीकरण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों को समाहित किया गया है। पुस्तक का उद्देश्य किसानों को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से औषधीय पौधों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना तथा उनकी आय में वृद्धि के नए अवसर उपलब्ध कराना है। इस अवसर पर कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि हैप्रेक पिछले चार दशकों से हिमालयी औषधीय एवं सगंध पादपों के संरक्षण संवर्धन और कृषिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों एवं फील्ड स्टाफ के निरंतर प्रयासों से कई संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण के साथ-साथ उनकी व्यावसायिक खेती को भी बढ़ावा मिला है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह मार्गदर्शिका किसानों शोधार्थियों और औषधीय पादपों से जुड़े उद्यमियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी। हैप्रेक के निदेशक डॉ.विजयकांत पुरोहित ने बताया कि कृषक मार्गदर्शिका का प्रकाशन जैव प्रौद्योगिकी विभाग राष्ट्रीय हिमालयन अध्ययन मिशन तथा राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के वित्तीय सहयोग से किया गया है। उन्होंने कहा कि औषधीय एवं सगंध पादप हिमालयी क्षेत्रों की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के साथ-साथ स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डॉ.पुरोहित ने उम्मीद जताई कि यह मार्गदर्शिका हिमालयी क्षेत्रों में औषधीय पौधों की वैज्ञानिक खेती को नई दिशा प्रदान करेगी तथा किसानों को स्वरोजगार एवं आयवृद्धि के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में सहायक बनेगी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक खेती और संरक्षण के माध्यम से इन बहुमूल्य पादपों को संरक्षित रखते हुए स्थानीय लोगों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत किया जा सकता है।

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