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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के डॉ.भीमराव अंबेडकर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस एवं निःशुल्क सिविल सेवा कोचिंग योजना के संयुक्त तत्वावधान में सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) तथा उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (यूकेपीएससी) की परीक्षाओं की समग्र जानकारी उपलब्ध कराना तथा प्रभावी तैयारी के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो.एम.एम.सेमवाल के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने मुख्य अतिथि एवं उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए विद्यार्थियों को सिविल सेवा जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं के लिए स्पष्ट लक्ष्य अनुशासित अध्ययन समय प्रबंधन और निरंतर अभ्यास के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि सफलता केवल कठिन परिश्रम से नहीं बल्कि सही रणनीति सकारात्मक सोच और नियमित आत्ममूल्यांकन से भी प्राप्त होती है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा संचालित निःशुल्क सिविल सेवा कोचिंग योजना का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता उत्तराखंड सरकार के 2024 बैच के डीएसपी मनीष रमोला रहे। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए यूकेपीएससी यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा तथा यूपीएससी सीएपीएफ (CAPF) परीक्षा की चयन प्रक्रिया प्रारंभिक परीक्षा मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के विभिन्न चरणों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने पाठ्यक्रम प्रश्नों की प्रकृति तथा तैयारी की रणनीति को व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों के सामने रखा। डीएसपी मनीष रमोला ने स्मार्ट स्टडी की अवधारणा पर विशेष बल देते हुए कहा कि केवल अधिक समय तक पढ़ाई करना पर्याप्त नहीं है बल्कि सही अध्ययन सामग्री का चयन नियमित पुनरावृत्ति समसामयिक घटनाओं का विश्लेषण तथा उत्तर लेखन का निरंतर अभ्यास सफलता की कुंजी है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रतिदिन निश्चित अध्ययन योजना बनाने छोटे-छोटे लक्ष्य तय करने और नियमित आत्ममूल्यांकन करने की सलाह दी। उन्होंने वास्तविक परीक्षा जैसी परिस्थितियों में मॉक टेस्ट और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र हल करने के महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उनके अनुसार समयबद्ध अभ्यास से आत्मविश्वास बढ़ता है और समय प्रबंधन तथा प्रश्नों के सही चयन की क्षमता विकसित होती है। उन्होंने परीक्षा के दौरान मानसिक संतुलन बनाए रखने और कठिन प्रश्नों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का भी संदेश दिया। अपने व्याख्यान में उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की बढ़ती भूमिका पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि एआई आधारित डिजिटल उपकरण अध्ययन सामग्री को व्यवस्थित करने कठिन विषयों को सरल बनाने नोट्स तैयार करने उत्तर लेखन का अभ्यास कराने तथा पुनरावृत्ति को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक हो सकते हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई केवल एक सहायक माध्यम है और सफलता का वास्तविक आधार स्वयं का अध्ययन विश्लेषणात्मक सोच तथा निरंतर अभ्यास ही है। कार्यक्रम का संचालन डॉ.अरविंद सिंह रावत ने किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने सिविल सेवा सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी अध्ययन सामग्री समय प्रबंधन उत्तर लेखन साक्षात्कार और करियर से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे जिनका डीएसपी मनीष रमोला ने अपने अनुभवों के आधार पर विस्तृत और प्रेरणादायक उत्तर दिया। कार्यक्रम में डॉ.आशीष बहुगुणा डॉ.प्रकाश सिंह डॉ.वीर सिंह डॉ.शैलेन्द्र चमोला तथा डॉ.मुकेश सहाय सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। समापन अवसर पर प्रो.एम.एम.सेमवाल ने अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए मुख्य वक्ता सभी अतिथियों शिक्षकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रेरणादायी व्याख्यान विद्यार्थियों को सही दिशा प्रदान करने के साथ उनका आत्मविश्वास भी बढ़ाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन समर्पण और सकारात्मक सोच के साथ सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी करने का आह्वान किया तथा सभी प्रतिभागियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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