प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। जिलाधिकारी एवं जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष गौरव कुमार ने आवासीय भवनों की सीलिंग एवं ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि उत्तराखण्ड नगर एवं ग्राम नियोजन तथा विकास अधिनियम, 1973 की संबंधित धाराओं के अंतर्गत किसी भी आवासीय भवन के विरुद्ध सीलिंग अथवा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जिलाधिकारी एवं प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की पूर्व अनुमति के बिना नहीं की जाएगी। जारी आदेश के अनुसार विकास प्राधिकरण द्वारा जनपद में पूर्व अनुमति के बिना जिन आवासीय भवनों को सील किया गया है उन्हें तत्काल प्रभाव से डी-सील किया जाएगा तथा ऐसी कार्रवाई तत्काल समाप्त की जाएगी। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि भविष्य में किसी भी आवासीय भवन को बिना स्पष्ट वैधानिक आधार विधिक परीक्षण तथा सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के सील नहीं किया जाएगा। यदि किसी भवन के विरुद्ध गंभीर नियम उल्लंघन के कारण कार्रवाई आवश्यक हो तो उत्तराखण्ड नगर एवं ग्राम नियोजन तथा विकास अधिनियम की निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जाए। इसके तहत संबंधित पक्ष को कारण बताओ नोटिस जारी करना निर्धारित समयावधि में अपना पक्ष रखने का अवसर देना तथा सुनवाई की प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान आम नागरिकों को अनावश्यक असुविधा उत्पीड़न अथवा मानसिक एवं व्यावसायिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। सभी कार्रवाइयां पूरी तरह पारदर्शी न्यायसंगत और विधिसम्मत ढंग से की जाएं। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में यदि किसी भी प्रकार की प्रक्रियात्मक त्रुटि विधिक शिथिलता या मनमानी पाई गई तो संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करते हुए उनके विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
