प्रदीप कुमार
हरिद्वार/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड के लोक पर्व हरेला के अवसर पर जनपद हरिद्वार में गुरुवार को हर्षोल्लास एवं उत्साह के साथ व्यापक स्तर पर पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने जिला कार्यालय परिसर में पौधरोपण कर अभियान का शुभारंभ किया और पर्यावरण संरक्षण तथा प्रकृति संवर्धन का संदेश दिया। जिलाधिकारी के निर्देशन में जनपदभर में 30 हजार पौधों के रोपण का लक्ष्य पूरा करने के लिए सभी विभागों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। जिलाधिकारी के निर्देशन में जनपद के सभी विभागों नगर निकायों विकासखंडों ग्राम पंचायतों शिक्षण संस्थानों तथा अन्य सरकारी कार्यालयों ने अपने-अपने कार्यालय परिसरों एवं विभागीय परिसंपत्तियों पर वृक्षारोपण किया। अभियान के अंतर्गत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में छायादार फलदार तथा औषधीय प्रजातियों के पौधे लगाए गए जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ हरित हरिद्वार के संकल्प को भी मजबूती मिली। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने कहा कि हरेला केवल एक पर्व नहीं बल्कि प्रकृति पर्यावरण और जीवन के संरक्षण का संदेश देने वाला उत्तराखंड का महत्वपूर्ण लोक पर्व है। उन्होंने कहा कि पौधरोपण तभी सार्थक होगा जब लगाए गए पौधों का संरक्षण और नियमित देखभाल भी सुनिश्चित की जाए। इसी उद्देश्य से सभी विभागों को रोपे गए पौधों की सुरक्षा और देखरेख की जिम्मेदारी निभाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जनपद में संचालित 'हरित हरिद्वार' अभियान को हरेला पर्व के इस व्यापक वृक्षारोपण अभियान से नई गति मिलेगी। जनभागीदारी के माध्यम से हरिद्वार को अधिक हरित स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में यह अभियान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जिला प्रोबेशन अधिकारी अविनाश भदौरिया ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देशन में सभी जिलास्तरीय अधिकारियों को 30 हजार पौधों के रोपण का लक्ष्य दिया गया था जिसके अनुरूप सभी विभागों ने अपने-अपने कार्यालय परिसरों एवं विभागीय परिसंपत्तियों पर पौधरोपण किया। उन्होंने बताया कि 'हरित हरिद्वार' ऐप पर अब तक 15 हजार नागरिक पौधरोपण कर उनके संरक्षण की जिम्मेदारी ले चुके हैं जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनसहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण है। जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों सामाजिक संगठनों स्वयंसेवी संस्थाओं युवाओं और विद्यार्थियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हरित और स्वस्थ पर्यावरण उपलब्ध कराया जा सके।
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प्रदीप कुमार
हरिद्वार/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड के लोक पर्व हरेला के अवसर पर जनपद हरिद्वार में गुरुवार को हर्षोल्लास एवं उत्साह के साथ व्यापक स्तर पर पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने जिला कार्यालय परिसर में पौधरोपण कर अभियान का शुभारंभ किया और पर्यावरण संरक्षण तथा प्रकृति संवर्धन का संदेश दिया। जिलाधिकारी के निर्देशन में जनपदभर में 30 हजार पौधों के रोपण का लक्ष्य पूरा करने के लिए सभी विभागों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। जिलाधिकारी के निर्देशन में जनपद के सभी विभागों नगर निकायों विकासखंडों ग्राम पंचायतों शिक्षण संस्थानों तथा अन्य सरकारी कार्यालयों ने अपने-अपने कार्यालय परिसरों एवं विभागीय परिसंपत्तियों पर वृक्षारोपण किया। अभियान के अंतर्गत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में छायादार फलदार तथा औषधीय प्रजातियों के पौधे लगाए गए जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ हरित हरिद्वार के संकल्प को भी मजबूती मिली। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने कहा कि हरेला केवल एक पर्व नहीं बल्कि प्रकृति पर्यावरण और जीवन के संरक्षण का संदेश देने वाला उत्तराखंड का महत्वपूर्ण लोक पर्व है। उन्होंने कहा कि पौधरोपण तभी सार्थक होगा जब लगाए गए पौधों का संरक्षण और नियमित देखभाल भी सुनिश्चित की जाए। इसी उद्देश्य से सभी विभागों को रोपे गए पौधों की सुरक्षा और देखरेख की जिम्मेदारी निभाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जनपद में संचालित ‘हरित हरिद्वार’ अभियान को हरेला पर्व के इस व्यापक वृक्षारोपण अभियान से नई गति मिलेगी। जनभागीदारी के माध्यम से हरिद्वार को अधिक हरित स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में यह अभियान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जिला प्रोबेशन अधिकारी अविनाश भदौरिया ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देशन में सभी जिलास्तरीय अधिकारियों को 30 हजार पौधों के रोपण का लक्ष्य दिया गया था जिसके अनुरूप सभी विभागों ने अपने-अपने कार्यालय परिसरों एवं विभागीय परिसंपत्तियों पर पौधरोपण किया। उन्होंने बताया कि ‘हरित हरिद्वार’ ऐप पर अब तक 15 हजार नागरिक पौधरोपण कर उनके संरक्षण की जिम्मेदारी ले चुके हैं जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनसहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण है। जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों सामाजिक संगठनों स्वयंसेवी संस्थाओं युवाओं और विद्यार्थियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हरित और स्वस्थ पर्यावरण उपलब्ध कराया जा सके।