प्रदीप कुमार
जखोली/श्रीनगर गढ़वाल। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी और वानिकी विश्वविद्यालय (भरसार) के अंतर्गत रुद्रप्रयाग जनपद में स्वीकृत चिरबिटिया हिल एग्रीकल्चर कॉलेज की समस्याओं के समाधान और इसे एक मजबूत व स्वतंत्र परिसर के रूप में स्थापित करने की मांग अब तेज हो गई है। इसी सिलसिले में जखोली ब्लॉक के पूर्व प्रमुख एवं वर्तमान में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर में डीन (अर्थ साइंस) के पद पर कार्यरत वरिष्ठ प्रोफेसर महाबीर सिंह नेगी ने भरसार विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कुलपति प्रोफेसर बी.पी.भट्ट से शिष्टाचार भेंट कर प्रो.नेगी ने कुलपति प्रो.भट्ट का शॉल ओढ़ाकर और पुष्पगुच्छ भेंट कर भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया है। बुधवार को मुलाकात के दौरान प्रो.महाबीर सिंह नेगी ने चिरबिटिया कॉलेज की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कुलपति को चिरबिटिया में स्वीकृत कृषि महाविद्यालय की समस्याओं से अवगत कराया है। उन्होंने कहा कि कृषि महाविद्यालय में भूमि उपलब्ध होने के बावजूद बुनियादी ढांचे की कमी के कारण वर्तमान में इसकी कक्षाएं टिहरी के रानीचौरी कैंपस से संचालित हो रही हैं। कहा कि इससे रुद्रप्रयाग और जखोली क्षेत्र के स्थानीय युवाओं व स्थानीय लोगों को पर्वतीय कृषि महाविद्यालय का व्यावहारिक लाभ नहीं मिल पा रहा है। प्रो.नेगी ने वार्ता के दौरान मुख्य रूप से अधूरे निर्माण कार्यों में तेजी लाने चिरबिटिया में कॉलेज भवन प्रशासनिक ब्लॉक और छात्रावासों के अधूरे पड़े कार्यों को विशेष बजट आवंटित कराकर समय सीमा के भीतर पूरा करने का सुझाव कुलपति के सम्मुख रखा है। उन्होंने कहा कि रानीचौरी में चल रही कक्षाओं को चरणबद्ध तरीके से चिरबिटिया में संचालित की जाय। उन्होंने स्थायी फैकल्टी कि नियुक्ति व इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने आईसीएआर के मानकों के अनुरूप कॉलेज में आधुनिक प्रयोगशालाएं रिसर्च फार्म और स्थायी शिक्षकों व तकनीकी स्टाफ की नियुक्ति करने का सुझाव कुलपति को दिया है। इस सम्बन्ध में कुलपति ने सकारात्मक आश्वासन दिया है। भरसार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.बी.पी.भट्ट ने सभी बिंदुओं को बेहद गंभीरता से सुना और कहा कि बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त कर जल्द ही कक्षाओं को मूल स्थान पर संचालित करने के प्रयास तेज किए जाएंगे ताकि छात्र-छात्राओं को यंही पर उच्च स्तरीय कृषि शिक्षा मिल सके। इस अवसर पर दोनों शिक्षाविदों ने उत्तराखंड में उच्च शिक्षा और कृषि अनुसंधान को पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल और अधिक रोजगारपरक बनाने की आवश्यकता पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया।
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प्रदीप कुमार
जखोली/श्रीनगर गढ़वाल। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी और वानिकी विश्वविद्यालय (भरसार) के अंतर्गत रुद्रप्रयाग जनपद में स्वीकृत चिरबिटिया हिल एग्रीकल्चर कॉलेज की समस्याओं के समाधान और इसे एक मजबूत व स्वतंत्र परिसर के रूप में स्थापित करने की मांग अब तेज हो गई है। इसी सिलसिले में जखोली ब्लॉक के पूर्व प्रमुख एवं वर्तमान में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर में डीन (अर्थ साइंस) के पद पर कार्यरत वरिष्ठ प्रोफेसर महाबीर सिंह नेगी ने भरसार विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कुलपति प्रोफेसर बी.पी.भट्ट से शिष्टाचार भेंट कर प्रो.नेगी ने कुलपति प्रो.भट्ट का शॉल ओढ़ाकर और पुष्पगुच्छ भेंट कर भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया है। बुधवार को मुलाकात के दौरान प्रो.महाबीर सिंह नेगी ने चिरबिटिया कॉलेज की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कुलपति को चिरबिटिया में स्वीकृत कृषि महाविद्यालय की समस्याओं से अवगत कराया है। उन्होंने कहा कि कृषि महाविद्यालय में भूमि उपलब्ध होने के बावजूद बुनियादी ढांचे की कमी के कारण वर्तमान में इसकी कक्षाएं टिहरी के रानीचौरी कैंपस से संचालित हो रही हैं। कहा कि इससे रुद्रप्रयाग और जखोली क्षेत्र के स्थानीय युवाओं व स्थानीय लोगों को पर्वतीय कृषि महाविद्यालय का व्यावहारिक लाभ नहीं मिल पा रहा है। प्रो.नेगी ने वार्ता के दौरान मुख्य रूप से अधूरे निर्माण कार्यों में तेजी लाने चिरबिटिया में कॉलेज भवन प्रशासनिक ब्लॉक और छात्रावासों के अधूरे पड़े कार्यों को विशेष बजट आवंटित कराकर समय सीमा के भीतर पूरा करने का सुझाव कुलपति के सम्मुख रखा है। उन्होंने कहा कि रानीचौरी में चल रही कक्षाओं को चरणबद्ध तरीके से चिरबिटिया में संचालित की जाय। उन्होंने स्थायी फैकल्टी कि नियुक्ति व इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने आईसीएआर के मानकों के अनुरूप कॉलेज में आधुनिक प्रयोगशालाएं रिसर्च फार्म और स्थायी शिक्षकों व तकनीकी स्टाफ की नियुक्ति करने का सुझाव कुलपति को दिया है। इस सम्बन्ध में कुलपति ने सकारात्मक आश्वासन दिया है। भरसार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.बी.पी.भट्ट ने सभी बिंदुओं को बेहद गंभीरता से सुना और कहा कि बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त कर जल्द ही कक्षाओं को मूल स्थान पर संचालित करने के प्रयास तेज किए जाएंगे ताकि छात्र-छात्राओं को यंही पर उच्च स्तरीय कृषि शिक्षा मिल सके। इस अवसर पर दोनों शिक्षाविदों ने उत्तराखंड में उच्च शिक्षा और कृषि अनुसंधान को पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल और अधिक रोजगारपरक बनाने की आवश्यकता पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया।