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प्रदीप कुमार
हरिद्वार। हरिद्वार पुलिस ने आईसीआईसीआई बैंक के एक खाते से करीब 50 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन के मामले का खुलासा करते हुए एक महिला समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 13 लाख रुपये नकद 12 लाख रुपये के प्लॉट की रजिस्ट्री एक स्कूटी कई मोबाइल फोन फर्जी आधार कार्ड तथा बैंक से संबंधित दस्तावेज बरामद किए हैं। मामले में जांच के दौरान सामने आया कि आरोपियों ने फर्जी आधार कार्ड और फोन बैंकिंग का सहारा लेकर खाताधारक के नाम पर नया डेबिट कार्ड हासिल किया और उसके जरिए लाखों रुपये की निकासी कर ज्वेलरी जमीन तथा अन्य सामान खरीदा। पुलिस अब इस पूरे गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। आईसीआईसीआई बैंक की पुराना रानीपुर मोड़ शाखा के प्रबंधक अपूर्व दुबे ने पुलिस को शिकायत देकर बताया था कि बैंक के एक खाते से लगभग एक माह के दौरान करीब 50 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन हुए हैं। बाद में खाताधारक ने बैंक की बेंगलुरु शाखा में जानकारी दी कि उसके खाते से हुई निकासी उसकी जानकारी के बिना की गई है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस को कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबर मिले। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम ने भगवानपुर क्षेत्र के सिसौना और रायपुर में दबिश दी लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद दोबारा की गई कार्रवाई में मंडावर क्षेत्र के खेड़ी शिकोहरपुर के पास हाईवे से अंदर एक खेत के समीप नीले रंग की स्कूटी खड़ी मिली जहां दो पुरुष और एक महिला मौजूद थे। पुलिस को देखकर तीनों भागने लगे लेकिन टीम ने पीछा कर उन्हें दबोच लिया। पूछताछ में महिला की पहचान संगीता देवी के रूप में हुई जबकि उसके साथ रीनू कुमार उर्फ सोनू और उपेंद्र कुमार सहगल भी मौजूद थे। तलाशी के दौरान संगीता देवी के पास से तीन लाख रुपये नकद दो आधार कार्ड आकाश सिन्हा के नाम का आईसीआईसीआई बैंक का डेबिट कार्ड दो मोबाइल फोन तथा डेबिट कार्ड आवेदन प्रपत्र बरामद हुआ। उपेंद्र कुमार सहगल के कब्जे से चार लाख रुपये नकद और एक मोबाइल फोन तथा रीनू कुमार उर्फ सोनू के पास से छह लाख रुपये नकद एक मोबाइल फोन और उसका आधार कार्ड बरामद किया गया। पूछताछ में संगीता देवी ने बताया कि सोनू के कहने पर उसने जुलाई और अगस्त 2025 के दौरान देहरादून रुड़की और दिल्ली से लगभग 35 लाख रुपये की ज्वेलरी खरीदी थी जिसे बाद में सोनू को सौंप दिया गया। उसने यह भी बताया कि भगवानपुर स्थित एटीएम से आकाश सिन्हा के नाम के डेबिट कार्ड के जरिए कई बार नकदी निकाली गई और उसे आपस में बांट लिया गया। पहले डेबिट कार्ड के बंद हो जाने पर सोनू ने फोन बैंकिंग के माध्यम से खाताधारक के नाम पर नया एटीएम कार्ड जारी करा लिया था। पूछताछ में उपेंद्र कुमार सहगल ने बताया कि उसने सोनू कुमार को एक निजी कंपनी के खाते की जानकारी उपलब्ध कराई थी। इसके बाद सोनू ने फोन बैंकिंग के माध्यम से खाताधारक की ई-मेल आईडी बदलवाकर बैंक से नया डेबिट कार्ड जारी करा लिया। इसी डेबिट कार्ड का उपयोग कर खाते से लाखों रुपये निकाले गए। पुलिस ने मौके पर खड़ी स्कूटी की तलाशी ली तो उसकी डिग्गी से एक प्लॉट की रजिस्ट्री बरामद हुई। पूछताछ में सोनू ने बताया कि ज्वेलरी बेचकर मिले करीब 12 लाख रुपये से यह जमीन संगीता देवी के नाम खरीदी गई थी। जांच में सामने आया कि आरोपी बड़ी कंपनियों के बैंक खातों की जानकारी जुटाते थे। इसके बाद बैंक की सुरक्षा प्रणाली और फोन बैंकिंग प्रक्रिया का दुरुपयोग कर खाताधारकों के नाम पर नया डेबिट कार्ड जारी कराते थे। फर्जी आधार कार्ड के जरिए बैंक से डेबिट कार्ड प्राप्त करने के बाद खाते से नकदी निकालते और ज्वेलरी खरीदने सहित अन्य खर्च करते थे। जांच में यह भी पता चला है कि आरोपियों की नजर कई अन्य बड़ी कंपनियों के खातों पर भी थी। पुलिस के अनुसार उपेंद्र कुमार और रीनू कुमार उर्फ सोनू वर्ष 2022 में एटीएम धोखाधड़ी के एक मामले में जेल जा चुके हैं जबकि सोनू वर्ष 2013 में सहसपुर के चर्चित हत्याकांड में भी जेल जा चुका है। मामले में बरामदगी और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर मुकदमे में अन्य धाराएं भी बढ़ाई गई हैं। तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश करने की तैयारी की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस पूरे गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आई है जिनकी तलाश और जांच जारी है। पुलिस टीम में प्रभारी निरीक्षक कुंदन राणा उपनिरीक्षक ऋषिकांत पटवाल उपनिरीक्षक प्रदीप कुमार हेड कांस्टेबल संजीव राणा कांस्टेबल आनंद तोमर महिला कांस्टेबल शोभा तथा कांस्टेबल वसीम (सीआईयू) शामिल रहे।

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