प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए गर्व की बात है कि विश्वविद्यालय के लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के सहनिदेशक महेंद्र सिंह पवार को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) नई दिल्ली से प्रस्तुति-परक नाट्य कार्यशाला का प्रतिष्ठित प्रोजेक्ट प्राप्त हुआ है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय देश का सर्वोच्च तथा एशिया के सबसे बड़े सरकारी रंगमंचीय प्रशिक्षण संस्थानों में से एक माना जाता है। ऐसे प्रतिष्ठित संस्थान से यह परियोजना मिलना विश्वविद्यालय और लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस परियोजना के अंतर्गत लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र में लगभग 30 से 40 दिनों की प्रस्तुति-परक नाट्य कार्यशाला आयोजित की जा रही है। कार्यशाला के दौरान प्रख्यात मराठी साहित्यकार महेश एलकुंचवार के चर्चित नाटक "विरासत" का मंचन तैयार किया जाएगा। यह नाटक भारतीय पारिवारिक रिश्तों सामाजिक ताने-बाने पीढ़ियों के बीच वैचारिक संघर्ष और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित एक प्रभावशाली रंगकृति है। कार्यशाला का निर्देशन लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के सहनिदेशक महेंद्र सिंह पवार कर रहे हैं जो स्वयं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के स्नातक हैं और पिछले 19 वर्षों से रंगमंच के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वहीं कार्यशाला में नाटक के सह-निर्देशक के रूप में केंद्र के पूर्व छात्र अंकित भट्ट अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वे प्रतिभागियों के साथ नाटक की प्रस्तुति को अंतिम रूप देने में सहयोग कर रहे हैं। कार्यशाला का शुभारंभ हो चुका है। इसमें लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के एम.ए.रंगमंच के विद्यार्थियों के साथ-साथ विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों एवं विभागों के छात्र-छात्राएं भी उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को अभिनय वाचन चरित्र-निर्माण मंच-सज्जा शारीरिक अभिव्यक्ति तथा प्रस्तुति की विभिन्न रंगमंचीय विधाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कार्यशाला के समापन पर 24,25 अथवा 26 अगस्त को लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र में नाटक "विरासत" का मंचन किया जाएगा। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा स्वीकृत इस परियोजना की यह प्रस्तुति मुख्य आकर्षण होगी जो दर्शकों को एक उत्कृष्ट रंगमंचीय अनुभव प्रदान करेगी। सहनिदेशक एवं कार्यशाला निर्देशक महेंद्र सिंह पवार ने कहा कि राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से प्राप्त यह प्रोजेक्ट विश्वविद्यालय के लिए सम्मान और उपलब्धि का विषय है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से विद्यार्थियों को पेशेवर रंगमंच की कार्यप्रणाली को निकट से समझने और सीखने का अवसर मिलेगा। साथ ही विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक एवं रंगमंचीय गतिविधियों को नई पहचान और नई दिशा भी प्राप्त होगी।
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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए गर्व की बात है कि विश्वविद्यालय के लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के सहनिदेशक महेंद्र सिंह पवार को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) नई दिल्ली से प्रस्तुति-परक नाट्य कार्यशाला का प्रतिष्ठित प्रोजेक्ट प्राप्त हुआ है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय देश का सर्वोच्च तथा एशिया के सबसे बड़े सरकारी रंगमंचीय प्रशिक्षण संस्थानों में से एक माना जाता है। ऐसे प्रतिष्ठित संस्थान से यह परियोजना मिलना विश्वविद्यालय और लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस परियोजना के अंतर्गत लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र में लगभग 30 से 40 दिनों की प्रस्तुति-परक नाट्य कार्यशाला आयोजित की जा रही है। कार्यशाला के दौरान प्रख्यात मराठी साहित्यकार महेश एलकुंचवार के चर्चित नाटक “विरासत” का मंचन तैयार किया जाएगा। यह नाटक भारतीय पारिवारिक रिश्तों सामाजिक ताने-बाने पीढ़ियों के बीच वैचारिक संघर्ष और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित एक प्रभावशाली रंगकृति है। कार्यशाला का निर्देशन लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के सहनिदेशक महेंद्र सिंह पवार कर रहे हैं जो स्वयं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के स्नातक हैं और पिछले 19 वर्षों से रंगमंच के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वहीं कार्यशाला में नाटक के सह-निर्देशक के रूप में केंद्र के पूर्व छात्र अंकित भट्ट अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वे प्रतिभागियों के साथ नाटक की प्रस्तुति को अंतिम रूप देने में सहयोग कर रहे हैं। कार्यशाला का शुभारंभ हो चुका है। इसमें लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के एम.ए.रंगमंच के विद्यार्थियों के साथ-साथ विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों एवं विभागों के छात्र-छात्राएं भी उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को अभिनय वाचन चरित्र-निर्माण मंच-सज्जा शारीरिक अभिव्यक्ति तथा प्रस्तुति की विभिन्न रंगमंचीय विधाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कार्यशाला के समापन पर 24,25 अथवा 26 अगस्त को लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र में नाटक “विरासत” का मंचन किया जाएगा। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा स्वीकृत इस परियोजना की यह प्रस्तुति मुख्य आकर्षण होगी जो दर्शकों को एक उत्कृष्ट रंगमंचीय अनुभव प्रदान करेगी। सहनिदेशक एवं कार्यशाला निर्देशक महेंद्र सिंह पवार ने कहा कि राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से प्राप्त यह प्रोजेक्ट विश्वविद्यालय के लिए सम्मान और उपलब्धि का विषय है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से विद्यार्थियों को पेशेवर रंगमंच की कार्यप्रणाली को निकट से समझने और सीखने का अवसर मिलेगा। साथ ही विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक एवं रंगमंचीय गतिविधियों को नई पहचान और नई दिशा भी प्राप्त होगी।