प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में एक और महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि जुड़ गई। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्री प्रकाश सिंह ने सोमवार को "Inclusive Growth Livelihoods and Social Development in Uttarakhand" पुस्तक का औपचारिक लोकार्पण किया। यह पुस्तक उत्तराखंड के सामाजिक आर्थिक एवं भौगोलिक परिप्रेक्ष्य में समावेशी विकास आजीविका और सामाजिक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर आधारित है। इस अवसर पर कुलपति प्रो.श्री प्रकाश सिंह ने पुस्तक के सभी संपादकों एवं योगदानकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार के सामूहिक शैक्षणिक प्रयास विश्वविद्यालय की शोध संस्कृति को सुदृढ़ करने के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को नई दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में शोध एवं अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए इस प्रकार के प्रयास लगातार जारी रहने चाहिए। लोकार्पण के अवसर पर पुस्तक की एक प्रति विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय को भी भेंट की गई। यह पुस्तक उत्तराखंड के विशिष्ट सामाजिक आर्थिक और भौगोलिक संदर्भ में समावेशी विकास आजीविका और सामाजिक विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करती है। यह शोधार्थियों शिक्षकों नीति-निर्माताओं विकास कार्यकर्ताओं तथा स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ साबित होगी। पुस्तक का संयुक्त संपादन डॉ.रुक्मणी अर्थशास्त्र विभाग एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय डॉ.ओमीन पंत अर्थशास्त्र विभाग एपीबी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रुद्रप्रयाग डॉ.हिमशिखा गुसाईं वानिकी एवं प्राकृतिक संसाधन विभाग एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय तथा डॉ.ठाकुर देव पांडेय अर्थशास्त्र विभाग एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय ने किया है। पुस्तक के निर्माण में डॉ.प्रेरणा त्रिवेदी प्रो.राज बहादुर डॉ.नेहा राज अनुज सिंह एवं डॉ.महेश कुमार सहित शोधार्थियों श्यामलेंदु दास लक्ष्मी डोभाल आश्मिता यादव विशाल सिंह वैशाली जोशी श्रुति जड़ली गरिमा आर्या हेमलता नेगी विवेक नैथानी अंतिम त्यागी रेखा राणा तथा आकांक्षा सिंह का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। पुस्तक के संपादकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन एवं संबंधित विभागाध्यक्षों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि इस प्रकार की पहल विश्वविद्यालय में शोध गतिविधियों को और अधिक सशक्त बनाएगी तथा युवा शोधार्थियों को गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान के लिए प्रेरित करेगी।
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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में एक और महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि जुड़ गई। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्री प्रकाश सिंह ने सोमवार को “Inclusive Growth Livelihoods and Social Development in Uttarakhand” पुस्तक का औपचारिक लोकार्पण किया। यह पुस्तक उत्तराखंड के सामाजिक आर्थिक एवं भौगोलिक परिप्रेक्ष्य में समावेशी विकास आजीविका और सामाजिक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर आधारित है। इस अवसर पर कुलपति प्रो.श्री प्रकाश सिंह ने पुस्तक के सभी संपादकों एवं योगदानकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार के सामूहिक शैक्षणिक प्रयास विश्वविद्यालय की शोध संस्कृति को सुदृढ़ करने के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को नई दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में शोध एवं अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए इस प्रकार के प्रयास लगातार जारी रहने चाहिए। लोकार्पण के अवसर पर पुस्तक की एक प्रति विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय को भी भेंट की गई। यह पुस्तक उत्तराखंड के विशिष्ट सामाजिक आर्थिक और भौगोलिक संदर्भ में समावेशी विकास आजीविका और सामाजिक विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करती है। यह शोधार्थियों शिक्षकों नीति-निर्माताओं विकास कार्यकर्ताओं तथा स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ साबित होगी। पुस्तक का संयुक्त संपादन डॉ.रुक्मणी अर्थशास्त्र विभाग एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय डॉ.ओमीन पंत अर्थशास्त्र विभाग एपीबी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रुद्रप्रयाग डॉ.हिमशिखा गुसाईं वानिकी एवं प्राकृतिक संसाधन विभाग एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय तथा डॉ.ठाकुर देव पांडेय अर्थशास्त्र विभाग एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय ने किया है। पुस्तक के निर्माण में डॉ.प्रेरणा त्रिवेदी प्रो.राज बहादुर डॉ.नेहा राज अनुज सिंह एवं डॉ.महेश कुमार सहित शोधार्थियों श्यामलेंदु दास लक्ष्मी डोभाल आश्मिता यादव विशाल सिंह वैशाली जोशी श्रुति जड़ली गरिमा आर्या हेमलता नेगी विवेक नैथानी अंतिम त्यागी रेखा राणा तथा आकांक्षा सिंह का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। पुस्तक के संपादकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन एवं संबंधित विभागाध्यक्षों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि इस प्रकार की पहल विश्वविद्यालय में शोध गतिविधियों को और अधिक सशक्त बनाएगी तथा युवा शोधार्थियों को गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान के लिए प्रेरित करेगी।