प्रदीप कुमार
चमोली/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद में गंगा एवं उसकी सहायक नदियों के संरक्षण स्वच्छता सीवरेज एवं सेप्टेज प्रबंधन ठोस अपशिष्ट प्रबंधन तथा नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित विभिन्न कार्यों की समीक्षा को लेकर सोमवार को जिला सभागार गोपेश्वर में जिलाधिकारी गौरव कुमार की अध्यक्षता में जिला गंगा संरक्षण समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में गंगा संरक्षण से जुड़े सभी विभागों के कार्यों की विस्तृत समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि गंगा की मुख्य धारा तक पहुंचने से पहले ही उसकी सहायक नदियों और ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक एवं अन्य ठोस अपशिष्ट को रोका जाना आवश्यक है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ कार्य करते हुए गंगा संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए। बैठक में जनपद में संचालित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने विभिन्न क्षेत्रों में मौजूदा क्षमता और आवश्यकता के बीच के अंतर को समाप्त करने के लिए नए एसटीपी स्थापित करने संबंधी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट शीघ्र तैयार कर आवश्यक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि सभी एसटीपी नियमित रूप से सुचारु रूप से संचालित हों तथा उनकी कार्यक्षमता की लगातार निगरानी की जाए। उन्होंने ऑनलाइन कंटीन्यूअस एफ्लुएंट मॉनिटरिंग सिस्टम (ओसीईएमएस) के प्रभावी संचालन और एसटीपी की स्वयं निगरानी के लिए सभी आवश्यक स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे शीघ्र स्थापित करने के निर्देश दिए। साथ ही जनपद के गंगा तट पर बसे प्रमुख नगरों और बाजारों को चरणबद्ध तरीके से सीवरेज नेटवर्क तथा एसटीपी से जोड़ने के लिए प्रस्ताव तैयार करने को कहा ताकि बिना शोधन का कोई भी सीवेज गंगा अथवा उसकी सहायक नदियों में प्रवाहित न हो। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ गंगा संरक्षण से जुड़े कार्यों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी अधिशासी अधिकारियों को सेप्टिक टैंक प्रबंधन प्रोटोकॉल के तहत अधिकृत वेंडरों का पंजीकरण कराने तथा सेप्टिक टैंकों से निकलने वाले अपशिष्ट का वैज्ञानिक एवं निर्धारित स्थानों पर निस्तारण सुनिश्चित करने और इसकी नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए। उन्होंने नगर पालिकाओं नगर पंचायतों एवं जिला पंचायत के अधिकारियों को नदी संरक्षण से जुड़े निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन कराने तथा नदी तटीय क्षेत्रों घाटों और निकाय क्षेत्रों में नियमित स्वच्छता अभियान संचालित करने के निर्देश दिए। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर देते हुए जिलाधिकारी ने सभी अधिशासी अधिकारियों तथा अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत को स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण संग्रहण और वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य विभाग को सभी स्वास्थ्य संस्थानों से निकलने वाले बायोमेडिकल अपशिष्ट का वैज्ञानिक एवं सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए कहा। उन्होंने जिला पंचायत द्वारा विकासखंडों में संचालित कॉम्पेक्टर मशीनों की स्थिति की समीक्षा करते हुए उनके नियमित संचालन और रखरखाव के भी निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने सभी शहरी निकायों के अधिशासी अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में अधिक मात्रा में ठोस अपशिष्ट उत्पन्न करने वाले संस्थानों की पहचान कर उनके लिए प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था लागू करने को कहा। ग्रामीण क्षेत्रों में गंगा की सहायक नदियों को स्वच्छ बनाए रखने पर विशेष बल देते हुए उन्होंने अधिशासी अभियंता सिंचाई को निर्देश दिए कि गंगा में मिलने वाली सभी सहायक नदियों और नालों का सर्वे कराया जाए तथा मुख्य धारा में प्लास्टिक एवं अन्य ठोस अपशिष्ट के प्रवाह को रोकने के लिए आवश्यक स्थानों पर चेकडैम जाल और अन्य प्रभावी संरचनाएं विकसित की जाएं जिससे प्रदूषण को स्रोत स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सके। बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी सर्वेश कुमार परियोजना निदेशक आनंद सिंह मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.अभिषेक गुप्ता अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत तेज सिंह सहित संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
