प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय शिक्षा समागम–2026 के अंतर्गत "राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 : विकसित भारत @2047 की आधारशिला" विषय पर अतिथि व्याख्यान एवं परिचर्चा का आयोजन हाइब्रिड मोड में किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक शोधार्थी विद्यार्थी तथा देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से प्रतिभागियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से सहभागिता की। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 केवल एक शैक्षिक दस्तावेज नहीं बल्कि भारत को ज्ञान-आधारित आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने का व्यापक दृष्टिकोण है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों को व्यवहारिक जीवन गुणवत्तापूर्ण शिक्षण नवाचार कौशल विकास तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ जोड़कर ही विकसित भारत 2047 की संकल्पना को साकार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के प्रभावी क्रियान्वयन और उसके उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयासरत है तथा विद्यार्थियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने के लिए विभिन्न नवाचारों को बढ़ावा दे रहा है। मुख्य अतिथि विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग के कुलपति प्रो.सी.बी.शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 भारत की शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य तभी प्राप्त होगा जब विश्वविद्यालय केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित न रहकर नवाचार अनुसंधान कौशल उद्यमिता नैतिक मूल्यों और भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा का अभिन्न अंग बनाएंगे। नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ती है जिससे वे जिम्मेदार नागरिक और राष्ट्रनिर्माता बन सकें। उन्होंने विश्वविद्यालयों से शिक्षा अनुसंधान और समाज के बीच सशक्त समन्वय स्थापित करने का आह्वान करते हुए कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों की भूमिका विकसित भारत के निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप देश में दो करोड़ से अधिक विद्यार्थी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कौशल विकास डिजिटल शिक्षण और बहुविषयक अध्ययन की सुविधाओं से लाभान्वित हो रहे हैं। आने वाले वर्षों में भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा सामग्री का विस्तार शिक्षा को और अधिक समावेशी तथा सुलभ बनाएगा। कार्यक्रम संयोजक डॉ.अमरजीत सिंह परिहार ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि अखिल भारतीय शिक्षा समागम–2026 का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 की भावना के अनुरूप भारतीय ज्ञान परंपरा भारतीय भाषाओं तथा भारतीय जीवन मूल्यों को विद्यार्थियों शिक्षकों और समाज तक व्यवहारिक रूप में पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा मातृभाषा आधारित शिक्षा नवाचार और मूल्यपरक शिक्षण को बढ़ावा देने के लिए लगातार विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे आयोजन शिक्षकों और विद्यार्थियों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के उद्देश्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ विकसित भारत 2047 के निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेंगे। कार्यक्रम का संचालन हिन्दी विभाग के डॉ.विश्वेश वाग्मी ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ.पुनीत वालिया ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर डॉ. प्रशांत कंडारी डॉ.राकेश नेगी डॉ.नागेंद्र रावत डॉ.अनूप सेमवाल डॉ.कपिल डॉ.सुभाष डॉ.चंद्रशेखर जोशी सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय शिक्षा समागम–2026 के अंतर्गत “राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 : विकसित भारत @2047 की आधारशिला” विषय पर अतिथि व्याख्यान एवं परिचर्चा का आयोजन हाइब्रिड मोड में किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक शोधार्थी विद्यार्थी तथा देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से प्रतिभागियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से सहभागिता की। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 केवल एक शैक्षिक दस्तावेज नहीं बल्कि भारत को ज्ञान-आधारित आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने का व्यापक दृष्टिकोण है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों को व्यवहारिक जीवन गुणवत्तापूर्ण शिक्षण नवाचार कौशल विकास तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ जोड़कर ही विकसित भारत 2047 की संकल्पना को साकार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के प्रभावी क्रियान्वयन और उसके उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयासरत है तथा विद्यार्थियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने के लिए विभिन्न नवाचारों को बढ़ावा दे रहा है। मुख्य अतिथि विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग के कुलपति प्रो.सी.बी.शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 भारत की शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य तभी प्राप्त होगा जब विश्वविद्यालय केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित न रहकर नवाचार अनुसंधान कौशल उद्यमिता नैतिक मूल्यों और भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा का अभिन्न अंग बनाएंगे। नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ती है जिससे वे जिम्मेदार नागरिक और राष्ट्रनिर्माता बन सकें। उन्होंने विश्वविद्यालयों से शिक्षा अनुसंधान और समाज के बीच सशक्त समन्वय स्थापित करने का आह्वान करते हुए कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों की भूमिका विकसित भारत के निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप देश में दो करोड़ से अधिक विद्यार्थी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कौशल विकास डिजिटल शिक्षण और बहुविषयक अध्ययन की सुविधाओं से लाभान्वित हो रहे हैं। आने वाले वर्षों में भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा सामग्री का विस्तार शिक्षा को और अधिक समावेशी तथा सुलभ बनाएगा। कार्यक्रम संयोजक डॉ.अमरजीत सिंह परिहार ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि अखिल भारतीय शिक्षा समागम–2026 का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 की भावना के अनुरूप भारतीय ज्ञान परंपरा भारतीय भाषाओं तथा भारतीय जीवन मूल्यों को विद्यार्थियों शिक्षकों और समाज तक व्यवहारिक रूप में पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा मातृभाषा आधारित शिक्षा नवाचार और मूल्यपरक शिक्षण को बढ़ावा देने के लिए लगातार विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे आयोजन शिक्षकों और विद्यार्थियों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के उद्देश्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ विकसित भारत 2047 के निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेंगे। कार्यक्रम का संचालन हिन्दी विभाग के डॉ.विश्वेश वाग्मी ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ.पुनीत वालिया ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर डॉ. प्रशांत कंडारी डॉ.राकेश नेगी डॉ.नागेंद्र रावत डॉ.अनूप सेमवाल डॉ.कपिल डॉ.सुभाष डॉ.चंद्रशेखर जोशी सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।