प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल (केंद्रीय) विश्वविद्यालय में शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार के निर्देशानुसार ‘वंदे मातरम् : राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष का स्मरणोत्सव’ के अंतर्गत पोस्टर प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय के बीए बीएससी इंजीनियरिंग सहित विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग करते हुए राष्ट्रभक्ति भारतीय संस्कृति तथा वंदे मातरम् की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को अपने पोस्टरों के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के दौरान अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. ओ.पी.गुसाईं ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि वंदे मातरम् केवल एक राष्ट्रीय गीत नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम सृजनात्मकता और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता विकसित करने का सशक्त माध्यम हैं। ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझने की प्रेरणा भी देते हैं। इस अवसर पर वंदे मातरम् समिति के समन्वयक डॉ.विश्वेश वाग्मी ने स्मरणोत्सव के अंतर्गत आयोजित होने वाले आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों से अधिकाधिक सहभागिता का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह के संरक्षण में ‘वंदे मातरम् राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष का स्मरणोत्सव’ को भव्य रूप दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत 15 अगस्त तक निबंध भाषण तथा अन्य विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा जिनमें विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्मरणोत्सव का उद्देश्य विद्यार्थियों को राष्ट्रीय चेतना भारतीय संस्कृति और स्वतंत्रता आंदोलन के गौरवशाली इतिहास से जोड़ना है ताकि युवा पीढ़ी राष्ट्रनिर्माण में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित हो। कार्यक्रम में समिति के सदस्य डॉ.नरेश कुमार डॉ.नेहा मर्तोलिया डॉ. कपिल पंवार डॉ.नीतीश बौंठियाल डॉ.प्रीति सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रभक्ति और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति अपनी भावनाओं को आकर्षक पोस्टरों के माध्यम से अभिव्यक्त किया।
