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प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद में लम्पी स्किन डिजीज के संक्रमण की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं। शासन की अधिसूचना के अनुसार संक्रमण की रोकथाम के लिए गोवंशीय एवं महिषवंशीय पशुओं के अंतरराज्यीय एवं अंतरजनपदीय परिवहन पर 25 अगस्त से 25 सितंबर 2026 तक रोक लगाई गई है। जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया ने संबंधित विभागों को आदेशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी ने जनपद के प्रमुख प्रवेश द्वारों और पुलिस चेक पोस्टों पर सघन निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत श्रीकोट श्रीनगर कोड़िया पुलिस चौकी कोटद्वार सिद्धबली चौकी कोटद्वार तथा शंकरपुर-धुमाकोट यानी नैनीडांडा-अल्मोड़ा बॉर्डर सहित अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस और पशुपालन विभाग की संयुक्त चेकिंग की जाएगी। आवश्यकता के अनुसार चेक पोस्टों पर पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाएगा जिससे संक्रमण के संभावित प्रसार को रोका जा सके। जिलाधिकारी ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को जनपद में गोवंशीय एवं महिषवंशीय पशुओं का शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी विकासखंडों में विशेष निगरानी रखने और पशुपालकों को लम्पी स्किन डिजीज के लक्षणों एवं बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करने को कहा है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.विशाल शर्मा ने बताया कि दुगड्डा कल्जीखाल और पौड़ी क्षेत्र से संदिग्ध पशुओं के नमूने लेकर जांच के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान भेजे गए हैं। उन्होंने बताया कि शासन की अधिसूचना के तहत पशुओं के अंतरराज्यीय एवं अंतरजनपदीय परिवहन के साथ ही पशु प्रदर्शनियों मेलों तथा गोवंशीय एवं महिषवंशीय पशुओं के एकत्रीकरण से संबंधित गतिविधियों पर भी रोक लगाई गई है। उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि यदि किसी पशु में बुखार गले के आसपास सूजन शरीर पर गांठें या चकत्ते त्वचा पर नोड्यूल भूख कम लगना दुग्ध उत्पादन में कमी पैरों में सूजन अथवा लंगड़ापन जैसे लक्षण दिखाई दें तो तत्काल निकटतम पशु चिकित्सालय या पशु चिकित्साधिकारी से संपर्क करें। प्रभावित पशु को अन्य पशुओं से अलग रखने और चिकित्सकों द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। डॉ.शर्मा ने कहा कि जिन पशुपालकों ने अभी तक अपने पशुओं का लम्पी रोग से बचाव के लिए टीकाकरण नहीं कराया है वे प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण अवश्य करवाएं। गौशालाओं में नियमित साफ-सफाई कीटाणुनाशक दवाओं का छिड़काव और मक्खी-मच्छरों के नियंत्रण के उपाय अपनाने पर भी जोर दिया गया है। पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए मिनरल मिक्सचर एवं अन्य आवश्यक पोषक तत्वों का उपयोग करने की सलाह दी गई है। उन्होंने बताया कि अधिकांश मामलों में उचित देखभाल और उपचार से 14 से 21 दिनों के भीतर बीमारी के लक्षण धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने पशुपालकों से घबराने के बजाय सतर्कता बरतने और किसी भी संदिग्ध स्थिति में तत्काल पशुपालन विभाग से संपर्क करने की अपील की।

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