प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की स्थानीय संसाधनों के माध्यम से स्वरोजगार को बढ़ावा देने की पहल का असर अब पहाड़ की ग्रामीण महिलाओं के कामकाज में भी दिखाई देने लगा है। रक्षाबंधन पर्व को लेकर पौड़ी समेत ग्रामीण बाजार रंग-बिरंगी राखियों से सज गए हैं। इस बार स्थानीय महिलाओं द्वारा पीरूल धागों और अन्य पहाड़ी सामग्री से तैयार की गई हस्तनिर्मित राखियां लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इन राखियों की बढ़ती मांग से ग्रामीण महिलाओं को घर बैठे आय अर्जित करने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है। विकासखंड पौड़ी के भिताईं मल्ली निवासी विजया देवी लंबे समय से घर पर ही हाथ से राखियां तैयार कर रही हैं। वह पीरूल के धागों और स्थानीय पहाड़ी सामग्री का उपयोग कर आकर्षक एवं पारंपरिक राखियां तैयार करती हैं। उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर तैयार इन राखियों को बाजार में अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। स्वयं सहायता समूह और ब्लॉक स्तर के माध्यम से इन राखियों को अन्य स्थानों तक भी पहुंचाया जा रहा है। स्थानीय व्यापारी भी उनसे लगातार हस्तनिर्मित राखियों की मांग कर रहे हैं। इसी तरह विकासखंड पौड़ी के निसणी गांव की रीना देवी भी राखियों के साथ विभिन्न पहाड़ी उत्पाद तैयार कर स्वरोजगार से जुड़ी हैं। इस रक्षाबंधन पर उनके द्वारा तैयार राखियों की बाजार में अच्छी मांग बनी हुई है। वह विभिन्न अवसरों पर जैविक रंग टोकरियां और अन्य हस्तनिर्मित उत्पाद भी तैयार करती हैं। रीना देवी ने बताया कि ब्लॉक स्तर से उन्हें कार्य के लिए आवश्यक सहयोग और प्रोत्साहन मिल रहा है। ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय संसाधनों पर आधारित स्वरोजगार से जोड़ने के लिए हिमोत्थान के सहयोग से एनआरएलएम के माध्यम से प्रशिक्षण भी दिया गया है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद महिलाएं पीरूल सहित अन्य स्थानीय एवं पारंपरिक सामग्री का उपयोग कर उपयोगी और आकर्षक उत्पाद तैयार कर रही हैं। इसके साथ ही इन उत्पादों को बाजार तक पहुंचाकर अपनी आय बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रही हैं। मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी ने बताया कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को स्थानीय संसाधनों पर आधारित विभिन्न उत्पाद तैयार करने के लिए प्रशिक्षण और आवश्यक सहयोग दिया जा रहा है। रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं द्वारा तैयार पारंपरिक एवं हस्तनिर्मित राखियों को बाजार उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयासों से महिलाओं को घर के नजदीक रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं और स्थानीय पहाड़ी उत्पादों को बाजार में नई पहचान मिल रही है। महिलाओं को प्रशिक्षण स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से उत्पादन और बाजार से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास लगातार जारी है। स्थानीय संसाधनों को आजीविका से जोड़ने की यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए आय के नए रास्ते खोलने के साथ-साथ पहाड़ की पारंपरिक कला और उत्पादों को भी प्रोत्साहित कर रही है।
