प्रदीप कुमार
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत प्रवेशित छात्र-छात्राओं की वास्तविक शैक्षणिक स्थिति तथा विद्यालयों में उपलब्ध शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं के भौतिक सत्यापन की कार्यवाही जारी है। प्रथम चरण में 10 विद्यालयों को सत्यापन के लिए चिन्हित किया गया है। इसी क्रम में जिला शिक्षाधिकारी प्राथमिक के निर्देशन में बीआर मॉडर्न स्कूल का स्थलीय सत्यापन किया गया जिसमें विद्यालय के संचालन और मान्यता से जुड़ी विभिन्न अनियमितताएं सामने आई हैं। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार बीआर मॉडर्न स्कूल को वर्ष 2024 से 2029 तक नर्सरी से कक्षा-8 तक की मान्यता प्राप्त है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत इस विद्यालय में पांच विद्यार्थी प्रवेशित दर्शाए गए हैं। सत्यापन के दौरान ये पांचों विद्यार्थी बीआर मॉडर्न स्कूल के बजाय करीब एक किलोमीटर दूर बिना मान्यता संचालित महेश सरला चिल्ड्रन्स एकेडमी में अध्ययनरत पाए गए। इसके साथ ही बड़ी संख्या में अन्य छात्र-छात्राएं भी उसी परिसर में पढ़ते मिले। निरीक्षण में यह भी सामने आया कि उक्त विद्यार्थियों से शुल्क महेश सरला चिल्ड्रन्स एकेडमी के नाम से लिया जा रहा था जबकि इस संस्थान के नाम से कोई पृथक मान्यता अभिलेख उपलब्ध नहीं मिला। यह संस्थान यू-डायस पोर्टल पर भी पंजीकृत नहीं पाया गया। उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह स्थिति सामने आई कि बीआर मॉडर्न स्कूल को प्राप्त मान्यता की आड़ में महेश सरला चिल्ड्रन्स एकेडमी का संचालन किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान महेश सरला चिल्ड्रन्स एकेडमी में प्री-प्राइमरी कक्षाएं संचालित मिलीं। कुछ कक्षाएं गैलरी एवं बरामदों में भी संचालित पाई गईं। भवन में छात्र सुरक्षा और आपदा प्रबंधन से संबंधित कमियां भी सामने आईं। इसके अलावा बीआर मॉडर्न स्कूल में एनसीईआरटी की कुछ पुस्तकों के स्थान पर अन्य प्रकाशकों की अपेक्षाकृत महंगी पुस्तकें संचालित किए जाने की स्थिति भी सामने आई। छात्र पंजिका के परीक्षण में कक्षा-1 में प्रवेशित कुछ ऐसे विद्यार्थियों का विवरण भी मिला जिन्होंने निर्धारित आयु सीमा पूरी नहीं की थी। सत्यापन में सामने आई इन सभी स्थितियों को शिक्षा विभाग ने गंभीरता से लिया है। जिला शिक्षाधिकारी प्राथमिक अंशुल बिष्ट ने बताया कि सत्यापन में प्राप्त तथ्यों के आधार पर संबंधित विद्यालय से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है और प्रकरण में नियमानुसार वैधानिक कार्यवाही की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम एवं विद्यालयी शिक्षा से संबंधित प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करना विभाग की प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यवाही के दौरान अध्ययनरत विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी छात्र का शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हो। विद्यार्थियों और अभिभावकों के हितों को सुरक्षित रखते हुए नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
