प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। कीर्तिनगर ब्लॉक के मलेथा के समीप स्थित सिरोला गांव में मरे हुए बकरे का मांस खाने के बाद बीमार पड़े चार बच्चों और उनकी मां के लिए सोमवार का दिन राहत और खुशी लेकर आया। बेस अस्पताल श्रीकोट में तीन दिन तक उपचार के बाद अमन सपना ऋषभ प्रियांशु और उनकी मां पार्वती देवी की हालत में सुधार होने पर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। बच्चों के स्वस्थ होकर घर लौटने की खुशी में उनकी दादी लखपति देवी सबसे अधिक भावुक नजर आईं। तीन दिनों तक अस्पताल में अपने पोतों के सिरहाने बैठकर उनकी सेवा करने वाली दादी की आंखों में सोमवार को खुशी के आंसू छलक पड़े। बताया गया कि सिरोला गांव में मरे हुए बकरे का मांस खाने के करीब तीन दिन बाद कई ग्रामीणों की तबीयत बिगड़ने लगी थी। इसके बाद ग्रामीण अलग-अलग अस्पतालों में उपचार के लिए पहुंचे। शनिवार को चार बच्चे और उनकी मां भी उपचार के लिए बेस अस्पताल श्रीकोट पहुंचे थे। उस समय बच्चों की हालत काफी गंभीर थी। उन्हें बाल रोग विभाग के वार्ड में भर्ती कर तत्काल उपचार शुरू किया गया जबकि उनकी मां पार्वती देवी को मेडिसिन विभाग में भर्ती किया गया। मांस खाने के बाद बच्चों और महिला में उल्टी-दस्त पेट दर्द डायरिया बुखार कमजोरी और डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण सामने आए थे। बच्चों का बीपी भी सामान्य नहीं था। चिकित्सकों ने तत्काल उपचार शुरू करते हुए उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी। करीब तीन दिन तक चले उपचार के बाद बच्चों की हालत में लगातार सुधार हुआ और सोमवार को चिकित्सकों ने उन्हें घर भेज दिया। बेस अस्पताल के बाल रोग विभाग के एचओडी डॉ.सीएम शर्मा की निगरानी में बच्चों का उपचार किया गया। बाल रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.अंकिता गिरी और सीनियर रेजिडेंट डॉ.अजय गोस्वामी ने बच्चों की स्थिति को देखते हुए उपचार शुरू किया। वार्ड में डॉ.जाहिद डॉ.आकाश सहित नर्सिंग अधिकारी भगवत सिंह जसपाल नेहा रावत नीतू और अनीता ने भी उपचार और देखभाल में सहयोग किया। समय पर अस्पताल पहुंचने और चिकित्सकों की निगरानी में उपचार मिलने से बच्चों की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ। स्वस्थ होने के बाद जब चारों बच्चे अपनी मां के साथ घर लौटे तो अस्पताल में मौजूद चिकित्सकों और स्टाफ ने भी राहत की सांस ली। मरे हुए पशु का मांस खाने से बचने की सलाह बाल रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.अंकिता गिरी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में मरे हुए पशु का मांस नहीं खाना चाहिए। खासकर बरसात के मौसम में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। इस प्रकार के मांस के सेवन से फूड प्वाइजनिंग के साथ उल्टी-दस्त डिहाइड्रेशन और गंभीर संक्रमण की स्थिति पैदा हो सकती है। संक्रमण गंभीर होने पर अन्य अंगों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। उन्होंने कहा कि सिरोला के बच्चों को समय पर अस्पताल लाया गया जिसके कारण उपचार के बाद उनकी स्थिति में सुधार हो सका। ग्रामीणों को ऐसे मामलों में लापरवाही न बरतते हुए तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। दादी की मेहनत लाई रंग पोतों के ठीक होने पर छलकीं आंखें अस्पताल से बच्चों की छुट्टी के दौरान सबसे भावुक पल उनकी दादी लखपति देवी के लिए रहा। बीमार पड़े अमन सपना ऋषभ और प्रियांशु की हालत खराब होने के बाद से दादी ने तीन दिन तक अस्पताल में रहकर अपने पोतों की सेवा की। कभी उनके सिर पर हाथ फेरतीं तो कभी पानी पिलातीं। इन तीन दिनों में दादी की पूरी दुनिया अपने पोतों के इर्द-गिर्द ही सिमट गई थी। बच्चों को स्वस्थ देखकर सोमवार को दादी लखपति देवी की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा कि विपदा की इस घड़ी में अस्पताल के डॉक्टरों नर्सिंग स्टाफ और गांव के लोगों ने उनका पूरा साथ दिया। अस्पताल में उन्हें बेहतर इलाज के साथ घर जैसा माहौल मिला जिससे उन्हें काफी हिम्मत मिली। दादी ने बच्चों के इलाज के लिए चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ का आभार जताते हुए कहा कि समय पर बेहतर उपचार मिलने से उनके पोते अब स्वस्थ होकर घर जा रहे हैं। बच्चों के चेहरे पर लौटी मुस्कान और दादी की आंखों की खुशी ने अस्पताल से विदाई के इस पल को भावुक बना दिया।
