प्रदीप कुमार
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग की ओर से हिमालय दिवस के अवसर पर गूगल अर्थ इंजन और क्यूजीआईएस जैसे आधुनिक रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस उपकरणों पर आधारित क्षमता निर्माण विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद देहरादून के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला का शुभारंभ कार्यवाहक कुलपति प्रोफेसर नारायण सिंह पंवार कुलसचिव प्रोफेसर वाईपी रैवानी कार्यक्रम संयोजक एवं संकायाध्यक्ष पृथ्वी विज्ञान प्रोफेसर महावीर सिंह नेगी प्रोफेसर अनिता रुडूला विभागाध्यक्ष भूगोल प्रोफेसर बीपी नैथानी एवं निदेशक चौरास परिसर प्रोफेसर आरएस नेगी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यशाला के शुभारंभ से पूर्व परिसर में वृहद वृक्षारोपण अभियान भी चलाया गया। पूरे शैक्षणिक एवं तकनीकी कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ.नरेंद्र कुमार ने किया। हिमालय दिवस के अवसर पर वर्ष 2012 से भूगोल विभाग द्वारा लगातार आयोजित की जा रही परंपरा को आगे बढ़ाते हुए विशेष सत्र आयोजित किया गया। इस दौरान प्रोफेसर महावीर सिंह नेगी एवं डॉ.सुनील सिंह द्वारा संयुक्त रूप से लिखित पुस्तक ‘उत्तराखंड के भूगोलवेत्ता’ का विमोचन किया गया। इसके साथ ही जियोग्राफिकल सोसायटी ऑफ सेंट्रल हिमालय द्वारा प्रकाशित ‘भौगोलिक हिमालयन बुलेटिन’ का भी मंचासीन अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया। कार्यशाला में ऑफलाइन माध्यम के साथ-साथ सैकड़ों छात्र और शोधार्थी ऑनलाइन माध्यम से भी जुड़े तथा गूगल अर्थ इंजन और क्यूजीआईएस पर सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। विभिन्न महाविद्यालयों के शिक्षकों की भी कार्यक्रम में उपस्थिति रही। इनमें डिग्री कॉलेज देवप्रयाग से डॉ.मंजू भंडारी डिग्री कॉलेज अगस्त्यमुनि से डॉ.किरण त्रिपाठी डिग्री कॉलेज बडियारगढ़ से डॉ.राजेश भट्ट भूगर्भ विज्ञान विभाग से डॉ.मीणा डॉ.शुक्ला एवं डॉ.भंडारी तथा भूगोल विभाग से डॉ.रंजन डॉ.धीरज डॉ.रहमान डॉ.दीप्ति और डॉ.सत्यम शामिल रहे। रिमोट सेंसिंग विभागाध्यक्ष डॉ.सुभाष बेरा भी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। कार्यवाहक कुलपति प्रोफेसर एनएस पंवार ने कहा कि वर्तमान समय में गूगल अर्थ इंजन और क्यूजीआईएस जैसे सॉफ्टवेयर भूगोल एवं पर्यावरण अध्ययन के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। इनके माध्यम से जटिल भौगोलिक आंकड़ों और महत्वपूर्ण जानकारियों को सरलता से समझा जा सकता है। उन्होंने कहा कि हिमालय भले ही मौन दिखाई देता है लेकिन इस मौन के पीछे पर्यावरण संतुलन और जीवन चक्र का गहरा रहस्य छिपा हुआ है। कुलसचिव प्रोफेसर वाईपी रैवानी ने भी गूगल अर्थ इंजन और क्यूजीआईएस जैसी आधुनिक तकनीकों को भूगोल एवं पर्यावरण अध्ययन के लिए उपयोगी बताया। प्रोफेसर अनिता रुडूला ने कहा कि जीआईएस और गूगल अर्थ इंजन जैसी आधुनिक प्रौद्योगिकियां शोधार्थियों को हिमालयी क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों और भूमि उपयोग में हो रहे परिवर्तनों का वास्तविक समय में सटीक अध्ययन करने की क्षमता प्रदान करती हैं। इस प्रकार की कार्यशालाएं युवाओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से हिमालय के संरक्षण और अध्ययन के लिए प्रेरित करती हैं। निदेशक चौरास परिसर प्रोफेसर आरएस नेगी ने कहा कि गूगल अर्थ इंजन और क्यूजीआईएस जैसे खुले स्रोत वाले मंचों के उपयोग से भौगोलिक अनुसंधान और आंकड़ों के विश्लेषण में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। भूगोल विभाग ऐसे तकनीकी प्रशिक्षणों के माध्यम से छात्रों को आधुनिक शोध तकनीकों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। कार्यशाला के कार्यक्रम संयोजक प्रोफेसर एमएस नेगी ने कहा कि वर्ष 2012 से भूगोल विभाग हिमालय दिवस पर लगातार जागरूकता अभियानों का आयोजन करता आ रहा है। गूगल अर्थ इंजन और क्यूजीआईएस पर आयोजित यह क्षमता निर्माण कार्यशाला इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने आयोजन में सहयोग के लिए यूकॉस्ट का विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल मैपिंग और जीआईएस तकनीक ने हिमालयी क्षेत्र के सतत विकास और संसाधन प्रबंधन के नए द्वार खोले हैं। छात्रों को इन आधुनिक तकनीकों में निपुण होकर क्षेत्रीय भौगोलिक अध्ययन और आपदा प्रबंधन में सक्रिय योगदान देना चाहिए। मुख्य विषय विशेषज्ञ के रूप में तकनीकी सत्रों का संचालन डॉ.ज्योतिर्मय विश्वास आईआईटी खड़गपुर प्रोफेसर दलजीत चिल्लर दिल्ली विश्वविद्यालय एवं डॉ.सुभाष बेरा विभागाध्यक्ष रिमोट सेंसिंग द्वारा किया गया। विशेषज्ञों ने उपस्थित शोधार्थियों और विद्यार्थियों को गूगल अर्थ इंजन तथा क्यूजीआईएस के उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। कार्यक्रम के दौरान प्रोफेसर एनएस पंवार ने सभी प्रतिभागियों को हिमालय की शपथ दिलाई। समापन सत्र में भूगोल विभागाध्यक्ष प्रोफेसर बीपी नैथानी ने सभी अतिथियों विद्वान वक्ताओं शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों का औपचारिक रूप से आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में मड़ीचौरास कीर्तिनगर ब्लॉक की क्षेत्र पंचायत सदस्य भावना नेगी तथा बावई रुद्रप्रयाग के क्षेत्र पंचायत सदस्य सम्राट राणा सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक शोधार्थी छात्र एवं अन्य संबंधित लोग उपस्थित रहे।
