प्रदीप कुमार
हरिद्वार/श्रीनगर गढ़वाल। राज्य मंत्री सुनील सैनी ने कहा कि 16 सितंबर को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का जन्मदिन है। यह केवल एक व्यक्ति का जन्मदिन नहीं बल्कि उस संकल्प का दिन है जिसने उत्तराखंड की राजनीति में सादगी और सेवा को नए मायने दिए हैं। सुनील सैनी ने कहा कि एक मुख्यमंत्री के नाते जब वह पुष्कर सिंह धामी के व्यक्तित्व की ओर देखते हैं तो उन्हें ऐसा चेहरा नजर आता है जो सत्ता की चकाचौंध से कोसों दूर आज भी अपने भीतर के उस कार्यकर्ता को जीवित रखे हुए है जिसने कभी खटीमा की गलियों में भाजपा का झंडा बुलंद किया था। एक कार्यकर्ता का समर्पण ही पुष्कर सिंह धामी को शून्य से शिखर तक लेकर पहुंचा है। उन्होंने कहा कि पुष्कर सिंह धामी का जीवन भाजपा के हर उस कार्यकर्ता के लिए एक खुली किताब है जो मेहनत और ईमानदारी में विश्वास रखता है। उन्होंने राजनीति में कोई शॉर्टकट नहीं अपनाया। संगठन के एक साधारण कार्यकर्ता से लेकर विधायक राज्य मंत्री और अब मुख्यमंत्री के पद तक का उनका सफर इस बात का प्रमाण है कि भाजपा में प्रतिभा और निष्ठा का सम्मान होता है। सैनी ने कहा कि उन्हें याद है जब धामी संगठन के कार्यों के लिए प्रवास पर निकलते थे तो कभी सुख-सुविधाओं की परवाह नहीं करते थे। भाजपा के प्रति उनका यह समर्पण अटूट है। सादगी और मिलनसार व्यक्तित्व का उल्लेख करते हुए राज्य मंत्री सुनील सैनी ने कहा कि सत्ता अक्सर इंसान और आम जनता के बीच दीवारें खड़ी कर देती है लेकिन पुष्कर सिंह धामी ने इन दीवारों को गिरा दिया है। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उनकी सहजता में रत्ती भर बदलाव नहीं आया। आज भी वह उसी गर्मजोशी से मिलते हैं जैसे वर्षों पहले मिलते थे। उन्होंने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि एक बार कार्यक्रम के दौरान भारी भीड़ थी और सुरक्षा घेरा सख्त था। तभी पुष्कर सिंह धामी ने दूर खड़े एक पुराने कार्यकर्ता को पहचान लिया। उन्होंने तुरंत सुरक्षाकर्मियों को रुकने का इशारा किया और खुद उस कार्यकर्ता के पास जाकर उसके कंधे पर हाथ रखकर पूछा, “ताऊ घर-बार ठीक है न?” सैनी ने कहा कि यह कोई राजनीतिक दिखावा नहीं था बल्कि उनकी असलियत है। वह दिल से लोगों से जुड़ते हैं इसलिए आज प्रदेश का हर युवा और बुजुर्ग उन्हें ‘अपना धामी’ कहता है। कुशल प्रशासक और मजबूत नेतृत्व की चर्चा करते हुए सुनील सैनी ने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में पुष्कर सिंह धामी का कार्यकाल ‘नॉन-स्टॉप उत्तराखंड’ की अवधारणा को चरितार्थ कर रहा है। एक कुशल प्रशासक के रूप में उन्होंने निर्णय लेने में जो तेजी दिखाई है वह सराहनीय है। उन्होंने कहा कि धामी का मानना है कि फाइलें सचिवालय की मेजों पर नहीं बल्कि धरातल पर समाधान बनकर पहुंचनी चाहिए। सभी फसलों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने का ऐतिहासिक निर्णय हो या किसानों के मुआवजे की त्वरित अदायगी उन्होंने साबित किया है कि वह किसान के बेटे हैं। बिना खर्ची-बिना पर्ची के पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियां देना उनकी प्राथमिकता रही है। उनका नेतृत्व ‘लोहे की मुट्ठी’ और ‘रेशम के स्पर्श’ का मिश्रण है। जहां वह भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ सख्त हैं वहीं प्रदेश की जनता के दुख-दर्द के प्रति अत्यंत संवेदनशील भी हैं। सुनील सैनी ने कहा कि उत्तराखंड को शिक्षा स्वास्थ्य खेल और बुनियादी ढांचे में नंबर वन बनाने की उनकी ललक उन्हें चैन से बैठने नहीं देती। वह 24 में से 18-18 घंटे काम करते हैं और उनके चेहरे पर थकान की जगह मुस्कान रहती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जन्मदिन पर वह भगवान श्रीकृष्ण से प्रार्थना करते हैं कि उन्हें दीर्घायु प्रदान करें और उनका मार्गदर्शन उत्तराखंड को प्रगति के नए सोपानों पर ले जाए। पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड न केवल विकसित भारत का सारथी बनेगा बल्कि एक खुशहाल प्रदेश के रूप में विश्व पटल पर अपनी पहचान बनाएगा। राज्य मंत्री सुनील सैनी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को जन्मदिन की अनंत शुभकामनाएं दीं।
